ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे, 56 हिमनदीय झीलें बेहद खतरे में
देहरादून, । हिमालय देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। देश की 20 फीसदी से ज्यादा आर्थिक गतिविधियां सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से हिमालय पर निर्भर हैं। यह बात Integrated Mountain Initiative (IMI) और Systemiq की ओर से तैयार ‘Prosperous and Resilient Himalayas’ रिपोर्ट में कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार हिमालयी राज्यों का देश की GDP में सीधा योगदान करीब 4.5 फीसदी है। लेकिन हिमालय से मिलने वाले पानी और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों पर देश के कई मैदानी इलाकों की खेती और उद्योग भी निर्भर हैं। गंगा के मैदानों में गेहूं और धान की खेती, असम और पश्चिम बंगाल में चाय उत्पादन और पूर्वोत्तर में बिजली उत्पादन इसका उदाहरण है।
ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे
रिपोर्ट में हिमालय पर बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई गई है। हिमालय के ग्लेशियर करीब 10 साल पहले की तुलना में 65 फीसदी ज्यादा तेजी से बर्फ खो रहे हैं। देश में 56 हिमनदीय झीलों को बेहद ज्यादा खतरे वाली श्रेणी में रखा गया है। आने वाले वर्षों में ग्लेशियरों से निकलने वाले पानी में कमी आने की आशंका भी जताई गई है।
शनिवार को रिपोर्ट को लेकर ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें हिमालयी राज्यों, पूर्वोत्तर और दूसरे पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े करीब 28 विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। Systemiq की निदेशक Arushi Chopra और Deeptanshu Kotru ने रिपोर्ट की जानकारी दी।
आपदा से पहले हो तैयारी
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमालय में बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है। मौसम, नदी और ग्लेशियरों से जुड़ी जानकारी समय पर मिलने पर लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने और सड़कों व जरूरी ढांचे को बचाने के कदम पहले उठाए जा सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार हिमालय में करीब 40 हजार ग्लेशियर हैं, लेकिन अभी लगभग 21 की ही नियमित निगरानी हो रही है।
पर्यटन से स्थानीय लोगों को मिले ज्यादा फायदा
रिपोर्ट में हिमालयी पर्यटन को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। क्षेत्र में हर साल करीब 40 करोड़ पर्यटक यात्राएं होती हैं। सुझाव दिया गया है कि केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के बजाय ऐसा पर्यटन विकसित किया जाए, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़े और पर्यावरण को भी नुकसान कम हो।
रिपोर्ट में ब्लैक कार्बन कम करने, आपदा से बचाव की तैयारी, मजबूत ढांचे और बेहतर पर्यटन समेत 10 प्राथमिकताएं बताई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन उपायों में निवेश से हर एक रुपये पर औसतन करीब आठ रुपये का लाभ मिल सकता है।
रिपोर्ट का पूरा संस्करण अक्टूबर में श्रीनगर में होने वाले Sustainable Mountain Development Summit में जारी किया जाएगा। ऑनलाइन बैठक में IMI के अध्यक्ष श्री रमेश नेगी(से नि IAS) सचिव रोशन राय, कोषाध्यक्ष विनिता शाह समेत विभिन्न हिमालयी राज्यों और पूर्वोत्तर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।




