गढ़वाली गज़ल संग्रह ‘हवैजाज सी उड़दन सुख’ का लोकार्पण

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देहरादून, गढ़वाली भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार, संपादक एवं रंगकर्मी मदनमोहन डुकलाण के गढ़वाली गज़ल संग्रह का लोकार्पण दून लाइब्रेरी देहरादून में हुआ । लोकार्पण कार्यक्रम दो सत्रों में हुआ ।
कार्यक्रम के प्रथमसत्र में पुस्तक का लोकार्पण एवं उस पर चर्चा – परिचर्चा की गई । इस सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व पुलिस महानिदेशक तथा वरिष्ठ साहित्यकार अनिल रतूड़ी, विशिष्ट अतिथि के रूप में जागर सम्राट पद्मश्री प्रीतम भरतवाण एवं धाद पत्रिका के सम्पादक एवं गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर में लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र के निदेशक गणेश खुगशाल गणी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति थी । वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जगदम्बा प्रसाद कोटनाला ने एक समीक्षक के रूप में लोकार्पित पुस्तक की सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की तथा लोकार्पित पुस्तक के लेखक मदनमोहन डुकलाण ने अपनी लेखन यात्रा का सार उपस्थित जनों के सम्मुख रखा । इस सत्र का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षक गिरीश सुन्दरियाल ने किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र ‘गजल गुमणाट’ में मदनमोहन डुकलाण द्वारा इस गज़ल संग्रह में रचित कुछ गढ़वाली गज़लों को प्रसिद्ध गायकों द्वारा स्वर दिया गया। जिसमें नरेन्द्रसिंह नेगी ने आन्दि जान्दि सांस छै तू, डॉ. कुसुम भट्ट ने जंदरि सि रिटणी रैन्द, नाज सि पिसेणी रैन्द, गिरीश सुन्दरियाल ने लासों मा पहाड़ का बीजिगे बुरांस आज, श्रीमती संगीता ढौंडियाल ने आज डाळों मूड़ि छैल नि रैगे, आलोक मलासी ने कबि घाम छन, कबि छैल छन, श्री किशन महिपाल द्वारा आँख्यूँ मा स्वीणा खीण दे, मैं तैं सुनिन्द सीण दे आदि गजलों की सुमधुर प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह को झूमने पर मजबूर कर दिया । आलोक मलासी ने हारमोनियम, त्रिष्ठव बडोनी ने तबला और सोनू ने गिटार में संगत दी। इस सत्र का संचालन गढ़वाली साहित्यकार व शिक्षक धर्मेन्द्र नेगी ने किया ।
कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती बीना बेन्जवाल, रमाकान्त बेन्जवाल, ओमप्रकाश सेमवाल, अनिल नेगी, आशीष सुन्दरियाल, श्री दिनेश ध्यानी, कान्ता घिल्डियाल, भगवती सुन्दरियाल संस्कृतिकर्मी डॉ. सुनील कैन्थोला, कुलानन्द घनशाला, रामशरण जुयाल, अभिषेक मैन्दोला, दीपक रावत, रमेश बडोला, रमेश रावत, गोकुल पंवार, मनोज ईष्टवाल, अनुप्रिया सुन्दरियाल आदि उपस्थित रहे ।

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