Thursday, March 5, 2026
HomeInternationalट्रंप ने एच-1 बी वीजा के नियमों में किया बदलाव, अब कंपनियों...

ट्रंप ने एच-1 बी वीजा के नियमों में किया बदलाव, अब कंपनियों को देनी होगी 88 लाख रुपए की फीस

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा को लेकर बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब इस वीजा के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों को 100,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) की भारी-भरकम फीस चुकानी होगी। इस कदम का असर खास तौर पर छोटी टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स पर पड़ेगा, जबकि बड़ी कंपनियों के लिए यह बोझ उतना भारी नहीं होगा।
व्हाइट हाउस के स्टाफ सेक्रेटरी विल शार्फ ने कहा कि ॥-1क्च वीजा प्रोग्राम का काफी दुरुपयोग हुआ है। इसका मकसद है ऐसे हाईली स्किल्ड वर्कर्स को अमेरिका लाना, जिन्हें अमेरिकी कर्मचारी रिप्लेस नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि 100,000 डॉलर की फीस यह सुनिश्चित करेगी कि केवल वास्तव में योग्य और जरूरी टैलेंट ही अमेरिका में प्रवेश पाए।
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लूटनिक ने बयान में कहा, अब कंपनियां किसी विदेशी को ट्रेन नहीं करेंगी। यदि ट्रेन करना ही है, तो अमेरिका की यूनिवर्सिटियों से ग्रैजुएट हुए लोगों को ट्रेन करें। हमारी जॉब्स लेने के लिए बाहर से लोगों को बुलाना बंद करें।
टेक इंडस्ट्री ॥-1क्च वीजा पर सबसे ज्यादा निर्भर है। अमेजन ने 2025 की पहली छमाही में ही 10,000 से ज्यादा ॥-1क्च वीजा हासिल किए हैं। वहीं माइक्रोसॉफ्ट और मेटा को भी 5,000 से अधिक वीजा अप्रूव हुए हैं। बड़ी कंपनियां आमतौर पर हाई-स्किल्ड वर्कर्स के लिए भारी रकम खर्च करने में पीछे नहीं हटतीं, लेकिन छोटे और मिड-साइज बिजनेस के लिए यह फीस एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ॥-1क्च वीजा पाने वालों में सबसे आगे है। 2024 में 71 प्रतिशत ॥-1क्च वीजा भारतीय प्रोफेशनल्स को मिले, जबकि चीन को सिर्फ 11.7 प्रतिशत। ॥-1क्च वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कंप्यूटर और आईटी सेक्टर में होता है, लेकिन इसका उपयोग इंजीनियर, शिक्षक, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स आदि भी करते हैं।
अब तक ॥-1क्च वीजा के लिए आवेदन करने की शुरुआती फीस 215 डॉलर थी, और आगे की प्रक्रिया में कुछ हजार डॉलर और देने होते थे। इनका भुगतान आमतौर पर कंपनियां करती थीं। हर साल 65,000 ॥-1क्च वीजा जारी किए जाते हैं, और एडवांस डिग्री वालों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा होते हैं। वीजा आमतौर पर तीन से छह साल के लिए वैध होते हैं।
॥-1क्च वीजा के आलोचक कहते हैं कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ती हैं और कंपनियां सस्ते विदेशी वर्कर्स को चुनती हैं। वहीं समर्थक कहते हैं कि अमेरिका में कई स्किल्स की भारी कमी है और ॥-1क्च टैलेंट से इन गैप्स को भरा जाता है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments