सरकारी वकीलों को पारदर्शी भर्ती प्रणाली से रखें

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-पूर्व जिपंस मर्तोलिया ने लिखा प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र

-वादकारी को निजी वकील रखने का विधिक अधिकार मिले

-अंग्रेज चले गए और हम इस व्यवस्था को नहीं बदल पाए

मुनस्यारी (पिथौरागढ़), पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने भारत के प्रधानमंत्री को एक खुला पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि अंग्रेज तो चले गए, लेकिन हम अपनी न्याय व्यवस्था में सुधार नहीं ला पाए। उन्होंने निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक रखे जाने वाले सरकारी वकीलों को पारदर्शी परीक्षा प्रणाली से रखे जाने की मांग की। यह भी कहा कि वादकारी को निजी वकील रखने का विधिक अधिकार भी दिया जाना चाहिए।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य मर्तोलिया ने बताया कि ब्रिटिश काल से यह परंपरा चली आ रही है कि जिसकी सरकार होंगी वह सरकारी वकीलों को मनमाने ढंग से रखते रहेगी। आज देश में आलम यह है कि सत्ता पक्ष की नेताओं के रिश्ते नातेदार सरकारी वकील बना दिए जाते है। जिन्हें लाखों रुपए का लाभ मिल जाता है।
उन्होंने दावा किया कि सरकारी वकीलों को रखने की यह परंपरा नहीं होती तो पिथौरागढ़ की नई परी को सुप्रीम कोर्ट में भी न्याय मिल जाता। कहा कि जब आप संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए परीक्षा आयोजित कर रहे है, तो सरकारी वकीलों के लिए क्यों नहीं ? उन्होंने कहा कि सरकारी वकीलों को रखे जाने की व्यवस्था पारदर्शी परीक्षा प्रणाली से होनी चाहिए।
इससे भाई-भतीजाबाद और अपना पराया का भेद भी समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज भी भारतीय न्यायिक व्यवस्था में वादकारी को अपना निजी वकील रखे जाने की का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है।
फौरी तौर पर निजी वकील रख सकते है, लेकिन वह आपको न्याय दिलाने के लिए प्रत्यक्ष रूप से भूमिका नहीं निभा सकता।
उन्होंने कहा कि जब तक इस न्याय व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन नहीं होगा, तब तक नन्ही परी जैसी बेटीयां न्याय प्रक्रिया में अन्याय का शिकार होती रहेगी।

उत्तराखंड में विधान परिषद बना दो, लेकिन……
पूर्व जिला पंचायत सदस्य मर्तोलिया ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को इस खुले पत्र की प्रति भेजते हुए कहा कि उत्तराखंड इस पर उदाहरण पेश करें।
उन्होंने कहा कि सत्ताधारी नेताओं के परिजन भारी संख्या में बेरोजगार है, तो उत्तराखंड में विधान परिषद बना दीजिए।
दायित्वधारियों की संख्या बढ़ा दीजिए, लेकिन निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक सरकारी वकीलों की भर्ती में अपना पराया ना हो। उन्होंने कहा कि इसका खामियाज़ा नन्ही परी जैसी बेटियों के परिवारों को उठाना पड़ता है,जो न्याय क्या लगाए बैठे हैं।