चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
आज ट्रांस भारत एविएशन प्रा. लि. का हेलीकॉप्टर, कॉल साइन VT-HCX, बद्रीनाथ से सहस्त्रधारा (देहरादून) के लिए रवाना हुआ था। हेलीकॉप्टर ने लगभग 13:12 बजे बद्रीनाथ से उड़ान भरी, जिसके कुछ समय बाद लगभग 13:14 बजे ज्योतिर्मठ घाटी के ऊपर उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर का संपर्क टूट गया। हेलीकॉप्टर के लापता होने की सूचना आर्मी पोस्ट के माध्यम से प्राप्त हुई।
सूचना प्राप्त होते ही पुलिस प्रशासन द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए पांडुकेश्वर एवं ज्योतिर्मठ से पुलिस, एसडीआरएफ और सेना की संयुक्त टीमें सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए रवाना की गईं। इसके अतिरिक्त जिला मुख्यालय गोपेश्वर से ड्रोन टीमों को भी सर्च अभियान के लिए रवाना किया गया है। लापता हेलीकॉप्टर की तलाश के लिए सभी टीमें समन्वय स्थापित करते हुए लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। हेलीकॉप्टर एवं उसमें सवार व्यक्तियों के संबंध में जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
हेलीकॉप्टर में सवार छः व्यक्तियों का विवरण पायलट सहित कैप्टन हिमांशु सभरवाल, उम्र 48 वर्ष, निवासी दिल्ली, प्रतापा, उम्र 41 वर्ष, निवासी कर्नाटक, अरुण सालुंके, उम्र 44 वर्ष, निवासी कर्नाटक, वी.बी. शंकर गौड़ा, उम्र 39 वर्ष, निवासी कर्नाटक, सुधीर के., उम्र 50 वर्ष, निवासी कर्नाटक, एच.एस. नटराजा, उम्र 51 वर्ष, निवासी कर्नाटक, सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
(संशोधित)- अपडेट खबर) बदरीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर जोशीमठ के पास दुर्घटनाग्रस्त, छह लोगों की मौत
-चमोली के चाई गांव के निकट मिला मलबा, पायलट समेत सभी छह यात्रियों के शव बरामद; खराब मौसम और घना कोहरा हादसे की वजह होने की आशंका
देहरादून ,। उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास शुक्रवार को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट समेत हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। हेलीकॉप्टर बदरीनाथ धाम से यात्रियों को लेकर देहरादून के सहस्रधारा लौट रहा था। दुर्घटना के बाद चलाए गए तलाशी अभियान में बचाव दल को घटनास्थल से छह जले हुए शव और हेलीकॉप्टर का मलबा मिला। हादसा भारी बारिश और घने कोहरे के बीच हुआ। खराब मौसम को दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे जोशीमठ के निकट पहुंचा था। इसी दौरान उसका हवाई यातायात नियंत्रण से संपर्क टूट गया। कुछ ही देर बाद हेलीकॉप्टर का निगरानी तंत्र भी संकेत भेजना बंद हो गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने तलाशी अभियान शुरू किया। अभियान में दो हेलीकॉप्टर और मानवरहित विमान लगाए गए। भारतीय सेना और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) की टीमें भी खोज एवं बचाव कार्य में जुटीं।
हेलीकॉप्टर में पायलट हिमांशु सभरवाल के अलावा अरुण सालुंके, एच.एस. नागराजा, प्रताप बच्चिहाली निंगराजन, सुधीर और शंकरगौड़ा वी.बी. सवार थे। जानकारी के मुताबिक, पायलट दिल्ली के निवासी थे, जबकि अन्य पांच यात्री बेंगलुरु के रहने वाले थे। मृतकों में अरुण सालुंके बेंगलुरु पुलिस में कार्यरत थे।
दुर्घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और खराब मौसम के कारण राहत एवं बचाव कार्य में चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सामाजिक माध्यम ‘एक्सÓ पर हादसे की जानकारी देते हुए दुख जताया। उन्होंने कहा कि जोशीमठ के निकट चाई गांव में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली है। जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ की टीमें संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह स्वयं पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को घायलों को तत्काल बेहतर उपचार के लिए बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के निर्देश दिए थे। हालांकि, बाद में घटनास्थल से सभी छह लोगों के शव बरामद होने की पुष्टि हुई।
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले कुछ समय के दौरान कई हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले वर्ष 8 मई को उत्तरकाशी में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 7 जून को रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ, हालांकि उसमें सवार सभी यात्री सुरक्षित बच गए थे। वहीं, 15 जून को केदारनाथ जा रहा एक अन्य हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ था, जिसमें पांच लोगों की जान गई थी।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों मौसम खराब बना हुआ है। केदारनाथ धाम में गुरुवार से लगातार बर्फबारी हो रही है और आसपास की पहाड़ियां बर्फ की मोटी चादर से ढकी हुई हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 30 अक्टूबर को चमोली जिले के लिए नारंगी सतर्कता संकेत जारी किया था। विभाग ने 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और तूफानी मौसम की चेतावनी दी थी।
उत्तराखंड नागरिक विमानन विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि मौसम में सुधार होने के बाद ही हेलीकॉप्टर को उड़ान की अनुमति दी गई थी। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की आवश्यकता है।





