हरिद्वार। कला एवं संस्कृति विभाग बिहार सरकार द्वारा मधुबनी में आयोजित भामती वाचस्पति महोत्सव 2026 में प्रोफेसर रमाकान्त पांडेय कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार ने मुख्यातिथि के रूप में प्रतिभागिता की।
बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव में देश के लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकारों,कवियों एवं दार्शनिकों को आमंत्रित किया गया है। “भारतीय ज्ञान परम्परा में पंडित वाचस्पति मिश्र का योगदान” विषय पर माननीय कुलपति प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय ने अपने विचार साझा किए। कुलपति ने कहा कि पंडित वाचस्पति मिश्र बहुत बड़े दार्शनिक थे,जिस दर्शन पर उनकी कलम चलती थी उस पर किसी दूसरे दर्शन का तनिक भी प्रभाव वह होने नहीं देते थे।
उन्होंने कहा कि वाचस्पति मिश्र ने सभी दर्शनों पर व्याख्या ग्रन्थ लिखकर भारतीय दर्शन के अध्ययन को नई दिशा दी। कुलपति प्रोफेसर पाण्डेय ने 9वीं शताब्दी के आचार्य वाचस्पति मिश्र तथा उनकी धर्मपत्नी भामती की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को भारतीय दार्शनिकों के लिए विमर्श का प्रमुख केन्द्र बताते हुए सरकार के इस प्रयास की जमकर सराहना की।
उन्होंने बताया कि मिथिला के महान दार्शनिक पण्डित वाचस्पति मिश्र को समर्पित “भामती वाचस्पति महोत्सव 2026” में मिथिला की समृद्ध ज्ञान परम्परा,साहित्य, संस्कृति, एवं दर्शन से सम्बंधित कार्यक्रमों का आयोजन ज्ञान की धारा को मजबूत करने का अनूठा प्रयास है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफ़ेसर देवनारायण झा ,पूर्व कुलपति कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा ने की। इस अवसर पर संस्कृत के कवि,साहित्यकार, दार्शनिक सहित बिहार सरकार के गणमान्य अधिकारी तथा विशाल जनसमूह उपस्थित रहा।



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