देहरादून, कचहरी स्थित शहीद स्मारक में उत्तराखण्ड़ राज्य आंदोलकारी मंच द्वारा मसूरी गोलीकाण्ड की शहादत दिवस के साथ ही राज्य आन्दोलन सयुंक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष व पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा की पुण्यतिथि पर स्मरण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये।
इस मौके पर रवीन्द्र जुगरान एवं प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी के साथ सुलोचना भट्ट ने कहा कि रजत जयन्ती वर्ष पर भी हम अभी शहीदों के सपनों के अनुरूप राज्य को बना नहीं पायें। आज 25-वर्षों बाद भी उमाकान्त त्रिपाठी को शहीद का दर्जा नहीं मिला जो दुःखद हैं। आज जरूरत हैं हमें इस प्रदेश को संवारने विशेषकर पहाड़ के जिलों औऱ हमारे तीर्थों को बचाने का संकल्प लेना होगा अन्यथा हम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित ना रह जाएं।
प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती एवं पूर्व राज्य मन्त्री विवेकानन्द खंडूड़ी ने के साथ राज्य मन्त्री बिना उनियाल ने मसूरी मेँ शहीद हुये, आंदोलनकारियों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुये कहा कि हमें याद हैं कि पूर्व विधायक रहें रणजीत सिंह वर्मा द्वारा संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सभी को एक सूत्र मेँ बांधकर पृथक राज्य की ऐतिहासिक आंदोलन कर दिखाया औऱ पृथक राज्य पाया।
उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच आज भी खटीमा मसूरी औऱ मुजफ्फनगर आदि शहीदों को न्याय की उम्मीद मेँ लगातार प्रयासरत हैं।
केशव उनियाल के साथ सुरेश नेगी ने नारे लगाते हुये कहा कि “कभी खटीमा कभी मसूरी देना था बलिदान जरूरी ” इन नारों ने सभी आंदोलनकारियों मेँ जोश भरा था परन्तु आज परिणाम उतने सुखद नहीं दिखाई दिये। राजधानी , मूलनिवास , परिसीमन, पहाड़ की विशेष नीति औऱ स्वास्थ्य, रोजगार पर आज भी चिन्ता का प्रश्नचिन्ह खड़ा हैं।
श्रद्धांजलि देने वालों मेँ मुख्यतः विवेकानन्द खंडूड़ी , जगमोहन सिंह नेगी, रविन्द्र जुगरान, केशव उनियाल, जगमोहन, अशोक वर्मा, बीना उनियाल, प्रदीप कुकरेती, पूरण सिंह लिंगवाल, सुरेश नेगी, उपेन्द्र सेमवाल, हरी सिंह मेहर, सुलोचना भट्ट , राधा तिवारी , गीता बिष्ट,मसंतन सिंह रावत, ललित जोशी, जीतमणि पेन्युली, प्रभात डण्डरियाल, अधिवक्ता शिवा वर्मा, मीरा गुसांई, यशोदा रावत, पुष्पा रावत, पुष्पा नेगी, साबी नेगी, विनोद असवाल, सुरेश कुमार, चण्डी प्रसाद थपलियाल, रघुवीर सिंह तोमर, जबर सिंह पावेल, लोक बहादुर थापा, अमन कुमार, विवेक बलोदी आदि रहे।



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