Wednesday, May 14, 2025
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बी0 एस0 नेगी महिला पोलिटेक्निक के 3 दशक पूर्ण होने के अवसर पर हुआ भव्य समारोह का आयोजन

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देहरादून, बी0एस0 नेगी महिला पॉलीटेक्निक की संरक्षक शोभना वाही ने आज संस्थान का दौरा किया। इस अवसर पर कोविेड नियमो का पालन करते हुए संस्थान द्वारा भव्य समारोह का आयोजन किया गया। जून 1987 में जिस पाैंधे को  शोभना वाही ने लगाया था वह 33 वर्ष पुराना पौंधा अब वृक्ष बन चुका है और असंख्य महिलाओं को रोज़गार रूपी छॉव देकर फल-फूल रहा है । जहां कर्नल एस0पी0 वाही पूर्व अध्यक्ष एंव प्रबंध निदशक, ओएनजीसी, देश को उर्जा सुरक्षा प्रदान करने का कार्य कर रहे थे वहीं उनकी पत्नी  शोभना वाही उनसे कदम से कदम मिलाते हुए महिलाओं को सशक्त करने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु प्रयासरत थीं ।

इस अवसर पर संस्थान संस्थापक के नाम पर प्रशासनिक भवन को ‘शोभना वाही ब्लॉंक‘ का नाम दिया गया और शैक्षिक भवन को फाउंडर मैम्बर के नाम पर ‘अनुराधा धर ब्लॉक‘ से नामित किया गया।

कार्यक्रम का आरंभ मुख्य अतिथि  शोभना वाही द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया । संस्थान छात्राओं द्वारा मंगलगाान एवं गणेश वंदना प्रस्तुत की गई्र। महिला सशक्तिकरण पर एक पोस्टर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया ।

कार्यक्रम के दौरान ‘संस्थापक की जीवन यात्रा‘ को डॉक्यूमेंट्री द्वारा दर्शाया गया और ‘संस्थान की यात्रा‘ एवं संस्थान में चल रहे विभिन्न कोर्सो से संबधित प्रेजनटेश्न भी प्रस्तुत किये गये।

इस अवसर पर श्रीमती वाही ने संस्थान की शिक्षिकाओं, पूर्व अध्यक्षों, प्रधानाचार्यों व वर्तमान कार्यकारिणी के सदस्यों जिसमें राष्ट्रपति से महिला सम्मान प्राप्त डा0 माधुरी बडथ्वाल एवं पदमश्री डा0 बसन्ती बिष्ट़ आदि से अपनी जीवन यात्रा को साझा किया साथ ही अपनी जीवन यात्रा पर स्वरचित काव्य संग्रह प्रकृति, तन्हाई और जीवन के अनुभव को सभी कार्यकारिणी के समस्त सदस्यों को भेंट किया ।

कार्यक्रम में बोलते हुए शोभना वाही ने कहा कि आज से 33 वर्ष पूर्व राज्य में महिलाओं के स्वावलम्बन हेतु पॉलीटैक्निक के विषय में सोचना भी अपने आप में एक चुनौती थी किन्तु यदि नीयत साफ हो और दृढ संकल्प हो तो कुछ भी असंम्भव नहीं है। मुझे अति प्रसन्नता है कि इस संकल्प के साथ जो बीज डाला गया था, आज वह संस्थान फल-फूल रहा है और न केवल उत्तराखंड वरन् सम्पूर्ण भारत की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

उन्होने आशा व्यक्त की कि ओएनजीसी सदैव की भांति संस्थान को सहयोग प्रदान करती रहेगी जिससे कि ये सभी कोर्स समस्त उत्तराखण्ड में प्रत्येक जनपद में चलायमान हो सकें ताकि उत्तराखण्ड की समस्त छात्राएं इससे लाभन्वित हो सकें । साथ ही ओएनजीसी से अपेक्षा करती हूं कि संस्थान को डिस्पले सेेंटर निर्मित करने हेतु ओएनजीसी सहयोग करेगा ताकि छात्राओं द्वारा बनाये गये कलात्मक परिधानों एवं कार्यों को डिस्प्ले सेंटर के माध्यम से पूरे देश में प्रचार-प्रसार किया जाये और संस्थान का गौरव बढता रहे ।

अनुराधाधर ने अपने संदेश में कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे इस संस्थान का फाउंडर मैम्बर होने का गौरव प्राप्त हुआ। संस्थान अध्यक्ष हर्षमणि व्यास ने कहा कि हम भरसक प्रयास कर रहे हैं और ओएनजीसी एवं अन्य प्रतिष्ठित PSU’s के सहयोग से इस संस्थान को उंचाइयों तक ले जाने के लिए दृढ़ संकल्प हैं ।

इस अवसर पर श्री राकेश वाही पुत्र श्रीमती शोभना वाही वर्तमान गवर्निंग बॉडी के सभी सदस्य, पूर्व अध्यक्ष श्री सुंदरलाल,  सुशांत वत्स,  एस0एस0 पांगती एंव  तौकीर हुसैन ने भी कार्यक्रम की शोभा बढाई ।

संस्थान छात्राओं द्वारा निर्मित कलाकृतियों को सभी पूर्व अध्यक्षों एवं प्रधानाचार्यों को भेंट किया गया तथा श्रीमती शोभना वाही एंव श्रीमती अनुराधाधर को महिला सशक्तिकरण हेतु समर्पण एवं निस्वार्थ भावना से किये गये समाज सेवा के कार्यों हेतु स्मृति चिन्ह भी प्रस्तुत किया गया ।

 

‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा नेताजी का जन्मदिन, जारी हुई अधिसूचना

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नई दिल्ली, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार ने 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन मनाए जाने को लेकर अधिसूचना जारी की है। बता दें कि 23 जनवरी 2021 को नेताजी की 125वीं जयंती है।

भारत सरकार ने हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन मनाए जाने को लेकर अधिसूचना जारी की है। बता दें कि 23 जनवरी 2021 को नेताजी की 125वीं जयंती है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने कहा कि भारत नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कारण आज़ाद हुआ। काफी सालों से भारत की जनता नेताजी का जन्मदिन देश प्रेम दिवस के रूप में मना रही है। इस घोषणा से हम खुश हैं लेकिन अगर भारत सरकार 23 जनवरी की देश प्रेम दिवस के रूप में घोषणा करती तो ज़्यादा उपयुक्त होता।

गौरतलब है कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी का गठन नेताजी की जयंती मनाने के लिए किया गया है। यह कमेटी 23 जनवरी 2021 से शुरू होने वाली एक साल की लंबी स्मृति के लिए तैयार की गई गतिविधियों का फैसला करेगी।

मुहिम ‘ड्रग्स फ्री हमारा उत्तराखंड’ हुई शुरू, काउंसलर डॉ. मुकुल शर्मा ने की सार्थक पहल

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हरादून, स्थानीय होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साईकोमीट्रिक कॉउंसलिंग के फाउंडर प्रेजिडेंट डॉ मुकुल शर्मा ने बताया कि उत्तराखंड में नशे की लत लोगों में तेजी से बढ़ रही है। खासकर यूथ इसके शिकार हो रहे हैं। उनके पास लगातार ऐसे केसेस आ रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने अब ड्रग्स फ्री हमारा उत्तराखंड मुहिम शुरू करने की जिम्मेदारी ली है। ताकि वे इसके जरिये समाज के लिए कुछ कर पाएं। बताया कि इससे पहले 817 लोगों की नशे की लत छुड़वा चुके हैं। फ्री सेवा के तहत घंटाघर के समीप स्थित काम्प्लेक्स में इसके लिए कॉउंसलिंग करेंगे। लोग ड्रग्स एडिक्ट को वहाँ लेकर जा सकते हैं और इस फ्री सेवा का लाभ ले सकते हैं। जहां कॉउंसलर्स के साथ ही पूरी टीम रहेगी। इस मौके पर पुरुषोत्तम भट्ट, लोकेश लोहिया, शैलेन्द्र कौशिक, शिवांश, सुनील थापा सहित अनुग्रह परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा ड्रग एडिक्ट है तो अब आप ड्रग्स फ्री हमारा उत्तराखंड मुहिम से जुड़िये। इसके तहत क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ मुकुल शर्मा फ्री कैम्प का आयोजन करने जा रहा हैं। जो कि हर रोज सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक होगा।

हरिद्वार : वेब सीरीज ‘तांडव’ पर लेकर धर्मनगरी में विरोध, संतों ने की प्रसारण पर रोक लगाने की मांग

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हरिद्वार, वेब सीरीज तांडव को लेकर धर्मनगरी के संत विरोध गए उतर आये और तांडव के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वेब सीरीज पर रोक नहीं लगी तो उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पडे़गा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि वेब सीरीज तांडव में हिंदू देवी देवताओं का अपमान किया गया है। संत समाज इसे कतई सहन नहीं करेगा।

कहा कि फिल्मों और वेब सीरीज के माध्यम से लगातार सनातन धर्म एवं हिंदू देवी देवताओं को निशाना बनाया जा रहा है। तांडव में जिस प्रकार हिंदू देवी-देवताओं का मजाक बनाया गया है वह निंदनीय और असहनीय है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं देश का समस्त संत समाज सड़कों पर उतरकर इस वेब सीरीज का विरोध प्रदर्शन करेगा। अवदूत मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष महंत रूपेंद्र प्रकाश ने कहा कि फिल्म जगत में एक विशेष समुदाय का वर्चस्व है।

विशेष समुदाय से जुड़े लोग फिल्मों के माध्यम से बार-बार सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं। ऐसी फिल्मों और बेब सीरीज पर सरकार को तत्काल रोक लगानी चाहिए। निरंजनी अखाड़े के संत स्वामी आलोक गिरि ने कहा कि किसी भी हालत में हिंदू देवी देवताओं का अपमान नहीं होने दिया जाएगा।

किसान नेताओं और सरकार की बातचीत में कहां आ रही है अड़चन, केंद्र ने बताई वजह

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नई दिल्ली, प्रेट्र। तीनों नए कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसान संगठनों के बीच मंगलवार को होने वाली 10वें दौर की वार्ता से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि दोनों पक्ष मामले का जल्द समाधान चाहते हैं, लेकिन अलग विचारधारा के लोगों की संलिप्तता की वजह से इसमें देरी हो रही है।

सरकार ने कहा कि मामले को सुलझाने में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि किसान नेता अपने हिसाब से समाधान चाहते हैं। सरकार और आंदोलनकारी 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच मंगलवार दोपहर 12 बजे विज्ञान भवन में 10वें दौर की वार्ता प्रस्तावित है। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा, ‘जब किसान हमसे सीधी बात करते हैं तो अलग बात होती है, लेकिन जब इसमें नेता शामिल हो जाते हैं तो अड़चनें सामने आती हैं। अगर किसानों से सीधी वार्ता होती तो जल्द समाधान हो सकता था।’

उन्होंने कहा कि चूंकि विभिन्न विचारधारा के लोग इस आंदोलन में प्रवेश कर गए हैं इसलिए वे अपने तरीके से समाधान चाहते हैं। दोनों पक्ष समाधान चाहते हैं, लेकिन दोनों के अलग-अलग विचार हैं इसलिए विलंब हो रहा है। कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा।

10वें दौर की वार्ता से पहले मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के 270 कृषि उत्पादक संघों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को रूपाला से मुलाकात की और तीनों कानूनों को वापस नहीं लेने की अपील की। इस बैठक में दूसरे कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी भी उपस्थित थे।

इन राज्‍यों में 19 जनवरी और 1 फरवरी से खुलेंगे सभी स्‍कूल-कॉलेज, यहां देखें पूरी सूची

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School Reopen: भारत में COVID-19 मामले कम हो रहे हैं, देश भर के कई राज्य कई महीनों तक बंद रहने के बाद कक्षाएं फिर से शुरू करने और स्कूलों को फिर से खोलने की योजना बना रहे हैं। जो राज्य स्कूल खोल रहे हैं, वे सख्त COVID-19 दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। देश भर में स्कूल और कॉलेज जगह-जगह फिर से खुल रहे हैं। कई राज्यों ने जनवरी 2021 से अपने शैक्षणिक संस्थानों को फिर से खोलने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय ने संबंधित राज्य सरकारों के निर्णय के अनुसार, 2020 में देश के स्कूलों और कॉलेजों को फिर से खोलने की अनुमति दी थी। जबकि कुछ राज्य इस सप्ताह अपने स्कूल खोलने के लिए तैयार हैं, कुछ अन्य राज्य सरकारें योजना के चरण में हैं और उसी के बारे में निर्णय लेने से पहले उनकी स्थिति की समीक्षा कर रही हैं। कर्नाटक, बिहार और ओडिशा सहित कई ने पहले ही कक्षाएं शुरू कर दी हैं। पिछले महीने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी CBSE कक्षा 10 वीं और 12 वीं बोर्ड परीक्षा 2021 के लिए तिथि पत्र की घोषणा की थी। तिथि पत्र के अनुसार, कक्षा 10 वीं और कक्षा 12 वीं बोर्ड परीक्षा 4 मई से 10 जून तक आयोजित की जाएगी, जबकि CBSE द्वारा परिणामों की घोषणा 15 जुलाई को की जाएगी। अगरतला, पुणे, पुडुचेरी, नागपुर और बिहार में 4 जनवरी से उच्च कक्षाओं के लिए स्कूल फिर से खुल गए। उत्तर प्रदेश और हरियाणा ने दिसंबर से ही कक्षाएं खोलीं। यहां एक राज्यवार सूची दी जा रही है, जहां आने वाले हफ्तों में स्कूल और कॉलेज फिर से खोलने के लिए तैयार हैं।

उत्तराखंड में कक्षा 6 से 11 तक की पढ़ाई होगी शुरू राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश में अब कक्षा छह से 11वीं तक पढ़ाई जल्द प्रारंभ हो सकती है। इसमें भी नवीं और 11वीं की कक्षाओं को तत्काल प्रभाव से खोलने पर विचार किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने सोमवार को विभागीय समीक्षा बैठक में इस संबंध में जल्द प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बताया कि बोर्ड की 10वीं व 12वीं कक्षाओं का बीते नवंबर माह से संचालन हो रहा है। कोरोना संक्रमण के चलते परिस्थितियों का आकलन करने के बाद शेष कक्षाओं की पढ़ाई सुचारू करने पर चर्चा की गई। नवीं व 11वीं की कक्षाएं तत्काल प्रभाव से खोलने के संबंध में विभाग से प्रस्ताव तैयार करेगा। उन्होंने बताया कि सरकारी विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का मानदेय 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। इसी तरह सहायताप्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में मानदेय से वंचित पीटीए शिक्षकों को 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा।

बिहार में 18 जनवरी से फिर से खुलने की संभावना नहीं

बिहार सरकार ने 18 जनवरी से पहली से आठवीं कक्षा के लिए स्कूलों को फिर से नहीं खोलने का फैसला किया है। जेडीयू-भाजपा सरकार ने 9 वीं कक्षा तक के स्कूलों की अनुमति दी है। 4 जनवरी से फिर से खोलने के लिए 12, पहले संकेत दिया था कि राज्य में जूनियर कक्षाएं 18 जनवरी से फिर से खुल सकती हैं। हालांकि, बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने अब कहा है कि पहली से आठवीं कक्षा के स्कूल 18 जनवरी से फिर से नहीं खुलेंगे और इस संबंध में निर्णय 25 जनवरी के बाद राज्य में स्थिति का आकलन करने के बाद लिया जाएगा। राज्य सरकार ने अब तक 27 जिलों में स्थिति का आकलन किया है और पाया है कि बड़ी संख्या में छात्रों ने COVID ​​-19 के डर से अपनी कक्षाओं को फिर से शुरू नहीं किया है। बिहार में माता-पिता भी अपने बच्चों को स्कूलों में भेजने से डरते हैं, यही वजह है कि राज्य सरकार ने 18 जनवरी से कक्षा 1 से 8 के लिए स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला नहीं किया है।

दिल्ली में 18 जनवरी से इस शर्त पर खुल सकेंगी 10वीं, 12वीं की कक्षाएं, सरकार का आदेश

दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि यहां प्री-बोर्ड तैयारी और Practical Work से संबंधित गतिविधियों का संचालन करने के लिए, सरकारी और सहायता प्राप्त / सहायता प्राप्त स्कूल केवल कक्षा 10 और 12 के छात्रों को 18 जनवरी से स्कूल में बुला सकते हैं। दिल्ली सरकार ने कहा है कि माता-पिता की सहमति से ही बच्चे को स्कूल बुलाया जाना चाहिए, जबकि स्कूल में आने वाले बच्चों के रिकॉर्ड को बनाए रखा जाना चाहिए, वहीं इसका उपयोग उपस्थिति उद्देश्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि स्कूल में बच्चे को भेजना माता-पिता के लिए पूरी तरह से वैकल्पिक है।

उत्तर प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक के स्कूल सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक खुलेंगे

यूपी सरकार ने कक्षा नौ से 12 तक के स्कूल सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक खोलने का निर्देश दिया है। यूपी बोर्ड और शिक्षा के अन्य बोर्डों से जुड़े माध्यमिक स्कूल अब एक ही पाली में संचालित होंगे। सभी जिलाधिकारियों, डीआईओएस और अन्य अधिकारियों को इसे लागू करने का निर्देश दिया गया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के सचिव दिव्यकांत शुक्ला ने जिला विद्यालय निरीक्षकों से एक ही पाली में स्कूल संचालित करने के लिए सुझाव मांगे थे, एक कदम जो कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए लिया गया था। इससे पहले, पिछले साल 10 अक्टूबर को, सरकार ने राज्य के सभी शिक्षा बोर्डों के कक्षा 9 से 12 तक के स्कूलों को 19 अक्टूबर से 9 बजे तक दो शिफ्टों में और दोपहर 12 से 3 बजे तक संचालित करने के निर्देश जारी किए थे, ताकि शारीरिक छात्रों के बीच दूरी का पालन किया जाता है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग ने आदेश दिया कि उन बच्चों के माता-पिता जिनकी सहमति से स्कूलों में कैराना परीक्षण किया जाएगा।

तमिलनाडु सरकार ने दी कक्षा 10 वीं, 12 वीं कक्षाओं, छात्रावासों को फिर से शुरू करने की अनुमति दी

तमिलनाडु सरकार ने 19 जनवरी से 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए राज्य भर में स्कूलों को फिर से खोलने की अनुमति दी है। राज्य सरकार ने 19 जनवरी को राज्य भर में संबंधित कक्षा के छात्रों के लिए छात्रावासों को फिर से खोलने की अनुमति दी है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी द्वारा जारी एक प्रेस बयान के द्वारा निर्णय को सार्वजनिक किया गया। बयान में कहा गया है कि माता-पिता सहित सभी हितधारकों के साथ परामर्श के बाद निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार ने स्कूलों को अपने बोर्ड परीक्षाओं से आगे 10 वीं और 12 वीं कक्षाओं के लिए स्कूल फिर से खोलने के संबंध में 6 से 8 जनवरी के बीच माता-पिता के साथ परामर्श सत्र आयोजित करने का आदेश दिया था।

तेलंगाना में स्कूल और कॉलेज 1 फरवरी से फिर से खुलेंगे: सीएम केसीआर

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने घोषणा की है कि तेलंगाना के स्कूल और कॉलेज 1 फरवरी, 2021 से राज्य में फिर से खुलेंगे। स्कूल 9 और ऊपर की कक्षाओं के लिए फिर से खुलेंगे और कॉलेजों में इंटर और डिग्री कक्षाएं भी उसी दिन फिर से शुरू होंगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। तेलंगाना अभिभावक संघ के सदस्यों ने राज्य के शिक्षा मंत्री सबिता इंद्र रेड्डी से दोबारा मुलाकात करने पर चर्चा करने के एक हफ्ते बाद सोमवार को प्रगति भवन में मंत्रियों और जिला कलेक्टरों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला लिया गया।

ओडिशा में कक्षा 10, 12 के स्कूल खुले तो 31 शिक्षक, छात्र निकले कोरोना पॉजिटिव

COVID महामारी के कारण 9 महीने से अधिक समय तक बंद रहने के बाद 8 जनवरी को ओडिशा में कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए स्कूल फिर से खुल गए। स्कूलों के फिर से खोलने के बाद 31 शिक्षकों और छात्रों ने ओडिशा के गजपति जिले में कोरोनोवायरस संक्रमण के लिए परीक्षण किया तो वे पॉजिटिव निकले। COVID महामारी के कारण 9 महीने से अधिक समय तक बंद रहने के बाद 8 जनवरी को ओडिशा में कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए स्कूल फिर से खुल गए। मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी प्रदीप कुमार पात्रा ने कहा 26 शिक्षकों ने पिछले दो दिनों में जिले में परीक्षण किया। उन्होंने कहा कि मोहाना ब्लॉक के स्कूलों में सबसे ज्यादा 21 मामले दर्ज किए गए हैं।

गुजरात Gujarat

गुजरात सरकार ने बुधवार को 11 जनवरी से 10 वीं और 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने की घोषणा की है। कक्षाएं 10 और 12 कक्षाओं के साथ-साथ स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए फिर से खुलेंगी। अंतिम वर्ष कोविड-19 रोकथाम मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और माता-पिता की सहमति के अनिवार्य अनुपालन के साथ यह होगा। गुजरात सरकार ने 6 जनवरी को घोषणा की कि कक्षा 10 और 12 के लिए राज्य में स्कूल 11 जनवरी से फिर से खुलेंगे। राज्य के शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा ने कहा कि छात्रों को स्कूलों में आने के दौरान अपने माता-पिता की सहमति लेनी होगी। हालाँकि, सरकार के मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन स्कूल करेंगे, इस समय उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। कि 10 वीं और 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए कक्षाएं 11 जनवरी से फिर से शुरू हो जाएंगी। मार्च से राज्य में स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थान बंद हैं।

राजस्थान Rajasthan

राजस्थान में मेडिकल कॉलेज, पैरामेडिकल कॉलेज, और नर्सिंग कॉलेज 11 जनवरी से फिर से खुलेंगे। 18 जनवरी से राज्य के स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों को फिर से खोलने की घोषणा सरकार कर चुकी है। गिरते कोविड -19 मामलों को ध्यान में रखते हुए, राजस्थान में 18 जनवरी से स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग सेंटर सहित शैक्षणिक संस्थान फिर से खुलेंगे। मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज को जनवरी से फिर से शुरू करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के निर्देश के अनुसार, सभी जगहों पर चेहरे के Mask के सामाजिक भेद और उपयोग जैसे उपायों का पालन किया जाना है।

महाराष्ट्र Maharashtra

महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार 50 प्रतिशत क्षमता वाले कॉलेजों को फिर से खोलने के बारे में 20 जनवरी तक निर्णय लेगी। 23 नवंबर के बाद से स्कूल महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में फिर से खुल गए हैं। कोविड -19 महामारी के तेजी से प्रसार के कारण मार्च 2020 से महाराष्ट्र में स्कूल और कॉलेज सहित सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हो गए हैं। कुछ स्कूलों और जूनियर कॉलेजों को इस महीने की शुरुआत में राज्य के कुछ हिस्सों में कक्षा 9 से 12 के लिए फिर से खोल दिया गया था।

दिल्ली Delhi

दिल्ली सरकार ने कहा कि वह अभी तक स्कूलों को नहीं खोल रही है। वर्गों को फिर से शुरू करने का निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि फ्रंटलाइन श्रमिकों के टीकाकरण के बाद COVID-19 टीके जनता के लिए उपलब्ध हैं।दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकार स्कूलों को फिर से खोलने के लिए योजना बना रही थी जैसे कि वह COVID-19 टीकाकरण के लिए योजना बना रही थी। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में शुरुआती स्कूलों को फिर से कैसे खोला जा सकता है, इस पर मंथन हुआ है।

पंजाब Punjab

पंजाब सरकार ने 7 जनवरी से अपने सभी स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला किया है। सरकार के निर्देश के अनुसार, केवल 5 से 12 वीं कक्षा के छात्रों को शारीरिक रूप से कक्षाओं में भाग लेने की अनुमति होगी। राज्य के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने पहले कहा था कि सरकार ने माता-पिता की मांग का पालन करते हुए सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला किया है। स्कूल सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक चलेंगे और स्कूल प्रबंधन सभी प्रोटोकॉल का पालन करेंगे और COVID-19 दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे।

तेलंगाना स्कूल और कॉलेज फिर से खोलने पर करना होगा इस एसओपी का पालन

राज्य केंद्र द्वारा जारी किए गए सभी एसओपी को फिर से खोलने वाले स्कूलों के लिए लागू करेगा। स्कूलों और कॉलेजों को फिर से खोलने से पहले, प्रयोगशालाओं सहित सभी कक्षाओं, शिक्षण और प्रदर्शन कार्य क्षेत्रों, आदि को नियमित रूप से छुआ सतहों पर विशेष ध्यान देने के साथ 1% सोडियम हाइपोक्लोराइट समाधान के साथ साफ किया जाएगा। छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को फेसमास्क पहनना होगा और नियमित अंतराल पर अपने हाथ धोते रहना होगा। थर्मल स्कैनिंग के माध्यम से सभी के शरीर के तापमान की जाँच की जाएगी। सर्दी, खांसी के लक्षणों वाले छात्रों को, जब भी पता चले, तुरंत स्कूल छोड़ना होगा। कक्षाओं और स्कूल परिसर में न्यूनतम 6 फीट की दूरी बनाए रखनी होती है। स्कूलों के प्रवेश द्वार पर हैंड सैनिटाइजर लगाए जाएंगे। जहां भी संभव हो वहां हैंड सैनिटाइजर का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे पहले, सरकार ने इंटरमीडिएट कॉलेजों को फिर से खोलने और 120 दिनों की अवधि के लिए कक्षाएं चलाने का फैसला किया था, लेकिन योजना से काम नहीं हुआ। अब, कॉलेजों में कक्षाएं पूरी तरह से फिर से शुरू होंगी। हालांकि, राज्य में इस शैक्षणिक वर्ष के लिए कक्षा 1 से 5 तक के स्कूल बंद रहेंगे और सभी छात्रों को अगली कक्षा में पदोन्नत किया जाएगा।

कर्नाटक Karnataka

कर्नाटक में प्रथम और द्वितीय वर्ष के कॉलेज के छात्रों के लिए नियमित कक्षाएं 14 जनवरी को फिर से शुरू होंगी। 10 वीं कक्षा के लिए ऑफ़लाइन कक्षाएं, द्वितीय पूर्व-विश्वविद्यालय, अंतिम वर्ष की डिग्री और स्नातकोत्तर छात्र पहले ही शुरू हो चुके हैं।

निजी स्कूलों के दोबारा खुलने तक शिक्षकों को 50 फीसदी वेतन का भुगतान करें, यहां प्रस्ताव पारित

COVID-19 महामारी के दौरान कई स्कूलों को अत्यधिक वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा है, और इसलिए सरकार को निजी स्कूलों के शिक्षकों को वेतन का कम से कम 50% स्कूलों को फिर से भुगतान करना होगा। एफपीएसए के सदस्यों ने रविवार को यहां आयोजित बैठक में कई प्रस्ताव पारित किए। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन (FePSA), संघों का एक संघ राज्य में 38 जिले शामिल होते हैं। इस बैठक में 200 से अधिक सदस्यों ने भाग लिया। एफपीएसए के राज्य अध्यक्ष एम। अरुमुगम ने कहा, स्कूलों को जनवरी के अंत से पहले कक्षा 1 के छात्रों के लिए फिर से खोलना चाहिए। जो स्कूल COVID-19 महामारी के दौरान काम नहीं कर रहे थे, उन्हें अपने वाहनों के बीमा और रोड टैक्स का भुगतान करने के लिए समय विस्तार दिया जाना चाहिए। निजी स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को भी ऋण के लिए अपनी किस्तों का भुगतान करने के लिए समय विस्तार दिया जाना चाहिए, जब तक कि स्कूल फिर से नहीं खुलते। प्राथमिक और नर्सरी स्कूलों को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशालय से अनुमोदन प्राप्त करने के लिए आवश्यक नियम को रद्द करना होगा। अरुणगम ने कहा, निजी स्कूलों के लिए जारी किए गए मान्यता आदेशों को पांच साल की अवधि के लिए बढ़ाया जाना चाहिए। उन स्कूलों के लिए जिनके पास मान्यता के आदेश हैं और 10 वर्षों से सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं, सरकार को मान्यता आदेशों को स्थायी रूप से बढ़ाना चाहिये।

सरकार का फैसला, स्कूल न जाने वाले बच्चों का पता लगाने के लिए होगा घर-घर सर्वे

सरकार ने उन बच्चों का पता लगाने को कहा जो स्कूल नहीं जा सकते थे। इसके लिए राज्यों को डोर-टू-डोर सर्वे करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही, उन्हें असफल बच्चों के नियम में ढील देने के लिए भी कहा गया है। अधिकारियों ने कहा कि महामारी के दौरान स्कूली बच्चों की पहचान करने, उन्हें दाखिला दिलाने और उनकी शिक्षा जारी रखने के उद्देश्य से सिफारिश की गई है। महामारी के कारण स्कूली बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों को कम करने के लिए, यह महसूस किया गया था कि सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को बढ़ती ड्रॉपआउट, कम पंजीकरण और शिक्षा के नुकसान की समस्या से निपटने के लिए मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। उचित नीति बनाने की आवश्यकता है। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि कोरोना महामारी के प्रभाव को कम करने के प्रयास में, सरकार ने राज्यों से डोर-टू-डोर बच्चों का सर्वेक्षण करने और उन्हें स्कूलों में पंजीकृत करने की योजना तैयार करने को कहा है। अधिकारियों ने कहा कि मंत्रालय ने इस वर्ष बच्चों की विफलता के लिए नियमों में छूट की भी सिफारिश की है।

साथ ही ब्रिज कोर्स शुरू करने की तैयारी

उन छात्रों के लिए जो अपनी पढ़ाई से चूक गए हैं, ब्रिज कोर्स शुरू करने के लिए एक अभ्यास शुरू किया जा सकता है। साथ ही, स्कूल खुलने के बाद, सरकार ने उन्हें एक ऐसा माहौल बनाने के लिए कहा है, ताकि वे बिल्कुल तनाव महसूस न करें। मंत्रालय ने अपनी समझ बढ़ाने के लिए प्रयास करने के लिए कहा है, उन्हें पाठ्यक्रम से परे किताबें पढ़ने और रचनात्मक लेखन के लिए प्रोत्साहित करें। अधिकारी ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह सिफारिश की गई है कि छह से 18 साल के बच्चों की पहचान के लिए डोर-टू-डोर गहन सर्वेक्षण किया जाए जो स्कूलों से दूर हैं। साथ ही, उनके स्कूलों में प्रवेश के लिए एक कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए। मंत्रालय ने स्कूल बंद होने के दौरान और उनके फिर से खोलने के बाद छात्रों को सभी सहायता प्रदान करने के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। स्कूल बंद होने के दौरान बच्चों की मदद के लिए स्कूलों और गांवों में छोटे समूहों में कक्षाएं संचालित की जा सकती हैं। टेलीविजन और रेडियो के माध्यम से अध्ययन करने के लिए ऑनलाइन और डिजिटल पहुंच बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है।

 

 

इस स्कीम में निवेश करने पर पैसे होंगे डबल, जान लें सबकुछ

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वजह से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में है. ऐसे में हर कोई चाहता है कि कैसे नुकसान की भरपाई की जाए. ऐसे हालात में लोग ऐसी जगहों पर निवेश करना चाहते हैं जहां से उन्हें मुनाफा हो. ऐसे लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस की स्कीम में निवेश करना बेहतर साबित हो सकता है.

 

आपको बता दें कि पोस्ट ऑफिस में कुछ ऐसी भी स्कीम हैं जहां बिना ज्यादा जोखिम के पैसे डबल हो सकते हैं. ऐसी ही एक स्कीम है किसान विकास पत्र योजना. भारत सरकार की यह स्कीम वन टाइम इंवेस्टमेंट स्कीम है. जहां आप हर महीने, तिमाही, छमाही या सालाना पैसे निवेस कर सकते हैं. यह स्कीम देश के सबी बड़े डाकघरों में है.

 

फायदा यह है कि किसान विकास पत्र योजना में निवेशकों को मैच्योरिटी पीरियड तक पैसे जमा करने के बाद दोगुनी रकम मिलती है.

 

कितने का निवेश जरूरी

किसान विकास पत्र योजना में कम से कम 1000 रुपये का निवेश करना होता है. इसमें कोई अधिकतम सीमा नहीं है. इस स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 124 महीने यानी 10 साल 4 महीने है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अगर आप किसी भी तरह की आर्थिक मुश्किल में हैं तो आपके लिए यह स्कीम बेहतर विकल्प हो सकता है.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने जेईई और नीट की परीक्षा देने वाले छात्रों के संशय को किया दूर

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नई दिल्ली, । केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सोमवार को छात्रों के एक बड़े संशय को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि जेईई और नीट की परीक्षाओं में जो भी सवाल पूछे जाएंगे, वह उन्हें पढ़ाए गए पाठ्यक्रम के हिस्से से ही पूछे जाएंगे। यानी बारहवीं में जितना हिस्सा पढ़ाया गया है, परीक्षाओं में सवाल भी उतने ही हिस्से से पूछे जाएंगे। इसके अलावा कम किए गए तीस फीसद हिस्से से कोई सवाल नहीं पूछे जाएंगे। कोरोना संकट को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई के पाठ्यक्रम को इस बार तीस फीसद तक कम दिया था। केंद्रीय मंत्री निशंक देश भर के केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों से शिक्षा संवाद कार्यक्रम के जरिये बातचीत कर रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक ने कहा-जो पढ़ाया गया, सवाल भी उन्हीं में से पूछेंगे

इस दौरान उन्होंने छात्रों के सवालों का अपने अंदाज में जवाब भी दिया। एक सवाल के जवाब में निशंक ने छात्रों से कहा कि फिलहाल अभी जो स्थिति है उनमें स्कूलों के खुलने के बाद भी सभी छात्रों को क्लासरूम में बुलाना संभव नहीं है। ऐसे में आगे भी छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी। इस दौरान उन्होंने प्रत्येक कक्षाओं में फिलहाल आधे-आधे बच्चों को ही बुलाए जाने के संकेत भी दिए हैं। उन्होंने इस दौरान छात्रों के अलग- अलग विषयों से जुड़े करीब पंद्रह सवालों के जवाब दिए।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) पढ़ाए जाने से जुड़े एक सवाल पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि फिलहाल वह नौवीं से स्कूलों में इसे पढ़ाने जा रहे है। इस दौरान उन्होंने छात्रों से कोरोना संकट काल के अपने अनुभवों को डायरी में लिखने का सुझाव दिया।साथ ही कोई ऐसा भी अनुभव है जो उन्हें लगता है कि यह कोरोना संकट में हो पाया है, वह उन्हें लिखकर सीधे मेरे पास भी भेज सकते हैं। इस मौके पर उन्होंने सभी छात्रों को जमकर प्रोत्साहित किया और कहा कि उनके पास नई ऊंचाई को छूने की पूरी क्षमता है। साथ ही इस मौके पर शिक्षकों, प्राचार्यों और अभिभावकों के सहयोग को सराहा।

निशंक बोले- समय निकालकर अभी भी लिखते हैं कविताएं, सुनाई भी

शिक्षा संवाद में निशंक से एक छात्र ने उनकी कविताओं को लेकर भी सवाल किया और पूछा कि मंत्री की जिम्मेदारी संभालते हुए क्या वह अभी भी कविताएं लिख पाते हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि बिल्कुल वह कविताओं के लिए अभी भी समय निकाल लेते हैं। इससे पहले भी जब वह मुख्यमंत्री थे और केंद्रीय मंत्री थे, तब भी कविताओं को लिखते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी पंसद की कविता -हे मन यहां से कहीं दूर जाओ- को भी सुनाया।(जागरण )

अभ्युदय वात्सल्यम् संस्था ने किया जलम जीवनम् अभियान का श्रीगणेश, उत्तरायणी कौतिक में हुई रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

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देहरादून, उत्तराखण्ड राज्य में अभ्युदय वात्सल्यम् संस्था द्वारा उनके पंजीकत कार्यालय देहरादून के समीप दिनांक 17 जनवरी, 2021 को लोक संस्कृति एवं लोक संरक्षण के उददेश्य से उत्तरायणी कौतिक, 2021 सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं जलम-जीवनम् अभियान के संचालन हेतु कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तरायणी कौतिक, 2021 में लोक गायक हरीश मेहरा (हरदा नैनोई), मनोज सावंत, भगत मेहता, राजीव चौहान (सोनू), सुश्री दीपा दानू, देवेन्द्र विष्ट, विनोद चौहान एवं कुन्दन सिंह कोरंगा द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गयी। .

वात्सल्यम् संस्था द्वारा जलम-जीवनम् अभियान का श्रीगणेश किया गया, जिसमें संस्था के अध्यक्ष श्रीमती गागा मिश्रा द्वारा साफ-सफाई स्वच्छता, जल संरक्षण-संवर्द्धन एवं पेयजल की उपयोगिता एवं मित्यवययितापूर्ण उपयोग के प्रचार-प्रसार हेत जनजागरण अभियान के संचालन पर जोर देते हुए, अभियान की सफलता का श्रीगणेश किया गया। जलम-जीवनम् अभियान की सफलता का श्रीगणेश किया गया।

जलम-जीवनम् अभियान में जन जागरूकता के उद्देश्य से पेयजल संरक्षण, साफ-सफाई एवं पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से इंजीनियर वी0पी0 नौटियाल ने विस्तार से अपनी बात रखी। जल संरक्षण एवं पेयजल की उपयोगिता पर डॉ० अंकित जोशी ने उदाहरण सहित अपने विचार व्यक्त किये। श्री नरेश प्रसाद रतूडी द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए, सामूहिक वृक्षारोपण पर जोर दिया और कहा गया कि जल हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। स्वच्छ पेयजल सबकी आवश्यकता है। इसके लिये हमें जल संरक्षण करना चाहिए।

जल की बर्बादी नहीं करनी चाहिए। जल संरक्षण हेतु संचालित किया जा रहा कार्यक्रम संस्था का एक सराहनीय प्रयास है। जलम-जीवनम अभियान के संचालन के लिये संस्था के जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं अपनी लोक सांस्कतिक गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिये संस्था की अध्यक्ष एवं निदेशक श्रीमती गार्गी मिश्रा एवं संस्था के संस्थापक डॉ अशोक कुमार मिश्र क्षितिज” व स्वयंसेवकों की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ० अशोक कुमार मिश्र क्षितिज” ने किया।

अब राज्य के सरकारी विभागों में उपनल से ही होगी आउटसोर्स भर्ती

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देहरादून, प्रदेश के सरकारी विभागों में आउटसोर्स श्रेणी के रिक्त पदों पर उपनल के जरिए ही नियुक्तियां की जाएंगी। प्राइवेट कंपनियों से आउटसोर्स नियुक्तियां करने पर सरकार ने रोक लगा दी। मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों, डीएम और सभी विभागों को इस बाबत आदेश कर दिए।

निजी एजेंसियों से नियुक्तियों को लेकर हो रहे विवादों को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। मुख्य सचिव के अनुसार सरकार ने सभी सरकारी विभागों में आउटसोर्स सेवाओं के लिए उपनल को वरीयता दी है। पहले भी इस बाबत स्पष्ट आदेश जारी किए जा चुके हैं।

हाल में यह जानकारी में आया है कि कुछ विभाग निजी आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए कर्मचारी ले रहे हैं। यह सरकार के आदेशों को उल्लंघन है। सख्ती की वजह: लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी वापस लौटे हैं। उन्हें रोजगार के अवसर मुहैया कराना भी सरकार के लिए चुनौती है।

इसके लिए सरकार ने पिछले साल उपनल को सिविलियन के लिए भी खोल दिया था। लेकिन विभागों से पद न मिलने से उपनल अपेक्षा के अनुसार नौकरियां नहीं दे पा रहा है। कुछ ही महीनों के भीतर उपनल में 50 हजार से ज्यादा लोग नौकरी के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं |