-पर्यावरण विरोधी एलिबेटेड रोड़ मन्जूर नहीं, पीएम, राज्यपाल व सीएम को भेजा ज्ञापन
देहरादून, आपदा पीड़ितों की समस्या को लेकर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने राज्यव्यापी प्रदर्शन के तहत आज देहरादून जिलाधिकारी कार्यालय पर विशाल प्रदर्शन किया तथा जिलाधिकारी सहित मुख्यमंत्री, राज्यपाल तथा प्रधानमंत्री भारत सरकार को ज्ञापन दिया, ज्ञापन उप जिलाधिकारी मुख्यालय श्रीमती कुमकुम जोशी ने लिया । उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।
प्रदर्शनकारियों ने मुआवजा वितरण में भेदभाव की शिकायत की तथा पर्यावरण विरोधी एलिबेटेड रोड़ निरस्त करने की मांग की । इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा उत्तराखण्ङ 11 अगस्त से 15 व 16 सितम्बर के मध्य भारी बारिश, बाढ़, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से हुई भयावह तबाही में मारे गये लोगों के प्रति गहरा दुख प्रकट किया तथा शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त कर सरकार से मांग की है कि वह मृतक के परिजनों को कम से कम 50 ,लाख का मुआवजा के साथ ही उनकी क्षतिपूर्ति करे ।वक्ताओं ने मांग की है कि आपदा के दौरान मिसिंग लोगों को भी बर्ष 2013 केदानाथ त्रासदी के दौरान घोषित नीति के तहत उनके परिजनों को अन्य भांति मुआवजा एवं क्षतिपूर्ति दिया जाये । वक्ताओं ने कहा जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास और पर्यावरणीय उपेक्षा का परिणाम वर्तमान आपदा है ।
वक्ताओं ने कहा आपदा से आम मजदूर, किसान, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जिनके घर, आजीविका और जीवन तबाह हो गए हैं । इस संकट से निपटने कै लिऐ केवल सरकारों को देहरादून कै स्थानीय प्रशासन कै भरोसे नहीं छोडा जाना चाहिए था बल्कि राज्य एवं केन्द्र सरकार को इस गम्भीर समस्याओं से निपटने कै लिये आगे आना चाहिए था, यह सरकारों की नीतियों और जवाबदेही का भी प्रश्न है ।
वक्ताओं ने कहा है कि पहले भी प्रधानमंत्री जी से इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का अनुरोध कर चुके हैं तथा केन्द्र सरकार मेहनतकश जनता के लिए तत्काल राहत, पुनर्वास और दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित करने की मांग कर चुके हैं। वक्ताओं ने कहा हमारी पार्टी नै आपदा पीड़ितों कै सवाल लगातार उठाया है ।वक्ताओं ने आरोप लगाया स्थानीय सरकार कै मत्रियों, विधायकों तथा पार्षदों मुआवजा चिन्हीकरण में भारी मनमानी कर अधिकांश वास्तविक पीड़ितों को मुआवजा मिलना तो दूर क्षति का आंकलन तक नहींं कराया तथा मुआवजा देने में भारी भेदभाव आम बात है । वक्ताओं ने कहा पार्टी ने प्रशासन एवं सरकार को आपदा पीड़ितों की समस्या के सन्दर्भ में बार बार अवगत कराया है, बावजूद प्रभावितों को समुचित सहायता एवं सहयोग नहीं मिल पा रहा है, यहां तक 11 अगस्त को आपदा पीड़ितों तक भी प्रशासन का अमला पहुंच नहीं पाया है ,आपदा पीड़ित दुखी एवं तंग हालात में हैं। वक्ताओं ने कहा है कि
संविधान के विभिन्न प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि राज्यों को अकेले छोड़ना संवैधानिक भावना के खिलाफ है । केन्द्र को जनता की रक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के लिए जवाबदेह होना होगा ।
प्रदर्शन की मुख्य मांगें :
-इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर एनडीआरएफ और पीएमएनआरएफ (प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष) से तत्काल वित्तीय सहायता और राहत प्रदान की जाए, जिसमें आम मजदूरों, किसानों और बेघर परिवारों के लिए विशेष पैकेज हो ।
-प्रभावित क्षेत्रों में केन्द्रीय टीमें तैनात कर पुनर्वास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
-मृतकों एवं आपदा कै दौरान गुमशुदा कै परिजनों को कम से कम 50 लाख रूपया तथा क्षतिपूर्ति दिया जाना सुनिश्चित हो ।
-जिन प्रभावितों कै मकान बह गये उनका समुचित पुर्नवास एव कम से कम 20 लाख ,मकानो दरार वाले प्रभावितों को कम से कम 10 लाख ,आंशिक क्षतिग्रस्त भवनों को 5 लाख तथा जिनका जलभराव एवं बाढ़ नुकसान हुआ उनके लिए 2 लाख तथा जिनका राशन,कपड़े बर्बाद हुए उन्हें कम से कम 1,लाख का मुआवजा दिया जाये ,।यह भी संज्ञान में है कि सरकार /जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्र में प्रभावितों ढाई हजार, साढ़े हजार साढै़ नौ हजार ,साढ़े 11 हजार साढ़े 13 हजार तथा चन्द लोगों को एक लाख या 1 लाख 20 हजार दिया गया ।बड़ी संख्या में पीड़ितों को सुद हि नहीं लि गई ।
-जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास की नीतियों की समीक्षा करते हुए एलिवेटेड रोड़ आदि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली योजनाओं पर रोक लगाते हुए जनपक्षिय योजनाओं को लागू किया जाये ।
-जल प्रबंधन, वन संरक्षण और नियोजित विकास के लिए जनता- केन्द्रित नीतियां लागू की जाएं, जिसमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी हो ।
-राज्य की प्रमुख सड़कें, जैसे देहरादून-मसूरी रोड, और अन्य ग्रामीण सड़कें भूस्खलन के मलबे से पूरी तरह ढक गईं या धंस गईं। कई स्थानों पर सड़कों के पूरी तरह से ध्वस्त हो गए।
-नदियों के उफान ने कई छोटे-बड़े पुलों को कर दिया या पूरी तरह से बहा दिया, जिससे का संपर्क टूट गया।
-बिजली के खंभे गिरने और ट्रांसफार्मर खराब होने से कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। पेयजल की पाइपलाइनें भी टूट गई l
-भूस्खलन और बाढ़ के पानी ने देहरादून के शहर और आसपास के गाँवों में कई मकानों को पूर्णतः नष्ट/क्षति पहुंच गई है, बाढ़ के पानी और मलबे में कई छोटे बड़े वाहन बह गये हैं, क्षतिग्रस्त हो गए।
-नदियों के किनारों के उपजाऊ खेत बाढ़ की भेंट चढ़ गए। फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ।
-उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर है। मुख्य सड़कों के डेमेजऔर आपदा की खबरों के कारण पर्यटकों का आना कम हो गया, जिससे स्थानीय होटल, ट्रांसपोर्टेशन, और गाइड के बिजनेस पर बुरा असर पड़ा। भूस्खलन और बाढ़ से एरिया की इकोलाॕजी को भी नुकसान पहुँचा। नदियों का पानी गाद और मलबे से भर गया।
-जनविरोधी/पर्यावरण विरोधी एलिवेटेड रोड़ परियोजना निरस्त करो ।
प्रदर्शन में जिलासचिव शिवप्रसाद देवली, देहरादून सचिव अनन्त आकाश, सीआईटीयू जिला महामंत्री लेखराज, किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह सजवाण, जिला महामंत्री कमरूद्दीन, महिला समिति के उपाध्य्क्ष नुरैशा अंसारी, एसएफआई जिला महामंत्री अय्याज खान आदि ने विचार व्यक्त किये ।
इस अवसर एसएफआई के प्रदेश महामंत्री शैलेन्द्र परमार, पूर्व महामंत्री हिमन्शु चौहान, सीटू उपाध्यक्ष भगवन्त पयाल, कोषाध्यक्ष रविंद्र नौडियाल, सचिव राम सिंह भण्डारी, बस्ती बचाओ आन्दोलन के विप्लव अनन्त, प्रेम गढ़िया,अल्तफ अहमद, राजेन्द्र शर्मा, आकिल, खालिद,फरिद महिला समिति की कुसुम नौडियाल. बिन्दा मिश्रा, शबनम सुरेशी नेगी, विमला देवि, सुमित्रा रावत के अलावा प्रदीप कुमार, अभिषेक भण्डारी, इस्लाम, गुमान आदि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल थे ।



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