देहरादून, भानियावाला जॉलीग्रांट-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण में वृक्षों के कटान पर रोक लगाकर मानवीय एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण अपनाने के संबंध में प्रधानमंत्री, राजमार्ग मंत्री, पर्यावरण मंत्री सहित मुख्यमंत्री जिलाधिकारी, एन एचएआई,प्रमुख वन संरक्षक से संयुक्त नागरिक संगठन ने अपील की है। अत्यंत व्यथा के साथ लिखे पत्र में कहा है की विकास हम सभी चाहते हैं। हमें भी गर्व है कि हमारी सड़कें चौड़ी हों, चारधाम यात्रा सुगम हो, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट तक समय पर पहुंचा जा सके। परन्तु विकास की कीमत अगर हमारी सांसों, हमारे बच्चों के भविष्य और प्रकृति की हत्या से चुकानी पड़े, तो वह विकास नहीं विनाश है।
प्रेषित पत्र में आगे कहा गया है की प्रस्तावित 20 किमी का यह मार्ग केवल सड़क नहीं है।ये राजाजी के जंगल की धड़कन है। यहाँ के हर पीपल, बरगद और साल के पेड़ हमारे पूर्वजों की तरह खड़े हैं। गर्मी में ये हमें छाया देते हैं,बारिश में मिट्टी को बहने से रोकते हैं और हर पल हमें ऑक्सीजन देते हैं।
संगठन सचिव का ये भी कहना था की जब एक सौ साल पुराना पेड़ कुल्हाड़ी से कटता है, तो लगता है जैसे हमारी गर्दन पर तलवार चल रही हो। पक्षियों के घोंसले उजड़ जाते हैं,हाथी का रास्ता बंद हो जाता है,और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बंजर जमीन छोड़ जाते हैं।
सचिव सुशील त्यागी ने लिखा है की हमारे धर्मग्रंथ कहते हैं -वृक्ष कटे तो कुल का नाश होता है । विज्ञान भी कहता है कि एक पेड़ साल भर में 2 लोगों की ऑक्सीजन देता है। इसलिए जिन जगहों पर 50-100 साल पुराने पेड़ हैं,वहाँ रोड का मोड़ बदलकर या 500 मीटर एलिवेटेड बनाकर उन्हें बचाया जाए।छोटे वृक्षों को काटने की बजाय JCB से उखाड़कर पास की खाली सरकारी जमीन पर लगाया जाए।हर कटे पेड़ के बदले 10 पेड़ लगाए जाएं और 3 साल तक NHAI उनकी माँ की तरह देखभाल करे।
अंत में देहरादून शहर की सड़कों पर लगते ट्रैफिक जाम के स्थाई समाधान हेतु सड़कों के ऊपर चारों ओर एलिवेटेड रोड बनाकर इनको आपस में कनेक्ट करना एकमात्र विकल्प बताते हुए पर्यटकों के साथ साथ दूनवासियों की दुर्दशा पर भी ध्यान देकर लाखों दून वासियों को राहत दिलाने की मांग की गई है।


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