उत्तराखण्ड सरकार का अपना चहेता ”प्रकृति एवं पर्यावरण पुरस्कार, सरकार आपके द्वार“

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उत्तराखण्ड सरकार ने वर्ष 2022 में जनता के मध्य प्रति वर्ष राज्य के प्रकृति एवं पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं प्रशंसनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों को ”सुन्दर लाल बहुगुणा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार“ को तीन श्रेणियों (प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार) में प्रदान करने हेतु एक विज्ञप्ति जारी की थी। जो कि प्रकाशित विज्ञप्ति के अनुसार प्रति वर्ष पर्यावरण दिवस के दिन जाना प्रस्तावित है। लेकिन राज्य सरकार प्रति वर्ष दिसम्बर माह में विज्ञप्ति तो जारी करती है परन्तु परिणाम घोषित नहीं करती है। जिससे कि जनता के मध्य एक गलत संदेश जाता है और बार-बार विज्ञप्ति के अनुसार वास्तविक रुप से सुयोग्य व्यक्तियों एवं संस्थानों को आवेदन हेतु मजबूर होना पड़ता है, जो कि औचित्यहीन एवं आम-जनमानस को गुमराह करने हेतु सरकार की एक सोची-समझी साजिस है।
विज्ञप्ति के अनुसार सरकार द्वारा उक्त सम्बन्ध में अभी तक विगत चार वर्षों में सिर्फ एक बार वर्ष 2025 में ”सुन्दर लाल बहुगुणा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार“ की घोषणा की गई परन्तु न तो प्रस्तावों का विधिवत मूल्यांकन गठित समिति द्वारा किया गया और न सुयोग्य व्यक्तियों एवं संस्थानों का चयन किया गया। जिससे कि प्रकृति एवं पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं प्रशंसनीय कार्य करने वाले वास्तविक रुप से सुयोग्य एवं व्यक्तियों एवं संस्थानों का चयन नहीं हो पा रहा है। प्रकाशित विज्ञप्ति के अनुसार सरकारी एवं गैर-सरकारी विभागों एवं संस्थानों में कार्य कर रहे सुयोग्य व्यक्तियों एवं संस्थानों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार दिये जाने प्रस्तावित थे, जबकि सरकार ने वर्ष 2025 की घोषणा में सिर्फ एक सरकारी विभाग एवं अन्य दो व्यक्तियों को ”सुन्दर लाल बहुगुणा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार“ से नवाज कर अपना पल्ला झाड़ दिया। यदि सरकार को वास्तविक रुप में प्रकृति एवं पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं प्रशंसनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों को ”सुन्दर लाल बहुगुणा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार“ से नवाजा जाना है तो उसके लिए प्रकृति एवं पर्यावरण से सम्बन्धित शैक्षिक योग्यता भी अनिवार्य रुप से रखनी चाहिये, जिससे कि प्रकृति एवं पर्यावरण से सम्बन्धित शैक्षिक योग्यता रखने के साथ उक्त क्षेत्र में कार्य कर रहे सही व्यक्तियों एवं संस्थानों का चयन होना सम्भव हो सके। नहीं तो वही फिर वहीं बात सार्थक सिद्व होगी।
”बीच बचाओं-प्रकृति संरक्षण, वन्य-जीवोें से मानव भक्षण“ प्रथम पुरस्कार, 2025
”जन-गण-मन से आग बचायें, आग बचे तो वन बच जायें।“ द्वितीय पुरस्कार, 2025
”………………………….. अयोग्य …………….“ तिृतीय पुरस्कार, 2025

 

डॉ. एस. डी. तिवारी
पर्यावरण एवं सामाजिक विशेषज्ञ