देहरादून। आज के दौर में जहां युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं, वहीं देहरादून की 13 वर्षीय अंशिका बिष्ट ने अपनी जड़ों के प्रति प्रेम दिखाकर मिसाल कायम की है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर शहर के प्रतिष्ठित सेंट्रियो मॉल में अंशिका ने पारंपरिक पहाड़ी परिधान और अपनी बोली-भाषा के माध्यम से देवभूमि की संस्कृति को गर्व के साथ प्रस्तुत किया।
सार्वजनिक मंच पर अंशिका का यह आत्मविश्वास न केवल काबिले तारीफ रहा, बल्कि वहां मौजूद प्रवासियों के लिए भी एक संदेश बना। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से यह सिद्ध कर दिया कि अपनी भाषा बोलना और पारंपरिक परिधान पहनना ही हमारी पहचान को जीवित रखने का सबसे सशक्त माध्यम है।
कहावत ‘जेठू बुलाण तेथू पछाड़’ (जैसा बोलना वैसी पहचान) को चरितार्थ करते हुए अंशिका ने प्रवासियों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। उनकी इस पहल की चारों ओर सराहना हो रही है। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए लोगों ने आशा व्यक्त की है कि वे इसी तरह उत्तराखंड का नाम रोशन करती रहेंगी।



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