गोपेश्वर, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग उत्तराखंड के तत्वावधान में अक्षत नाट्य संस्था इन दिनों देवाल ब्लॉक के उन सुदूरवर्ती और दुर्गम इलाकों में अलख जगा रही है, जहां मुख्यधारा की पहुंच अक्सर चुनौतीपूर्ण होती है। डिजिटल विज्ञापनों से दूर, यह संस्था नुक्कड़ नाटकों और पारंपरिक जनगीतों के सजीव माध्यम से राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को सीधे ग्रामीणों के दिलों तक पहुँचा रही है।
संस्था के प्रबंधक सुनील नाथन ने उत्साहपूर्वक बताया कि उनकी टीम पिछले चार दिनों से लगातार देवाल विकासखंड के पहाड़ों और घाटियों को नाप रही है। टीम अब तक कई सुदूर गाँवों में अपनी कला का जादू बिखेर चुकी है ।
कला यात्रा के पड़ाव (अब तक):
वाण और बांक के ऊंचे पहाड़, ल्वाणी और देवसारी की वादियाँ, धरातल्ला और फलदिया गाँव के आँगन, नंदकेशरी के ग्रामीण चौराहे ।
क्यों खास है यह अभियान :
मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्धन का यह अनूठा संगम ग्रामीणों को बेहद पसंद आ रहा है। स्थानीय बोली और लोक-संगीत के तड़के के कारण लोग न सिर्फ नाटकों का आनंद ले रहे हैं, बल्कि अपने हक और सरकारी योजनाओं (जैसे स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा लाभ) के प्रति जागरूक भी हो रहे हैं।
पहाड़ की यह सांस्कृतिक और विकासात्मक यात्रा अभी थमी नहीं है, नुक्कड़ नाटकों का यह कारवां आगे के गाँवों के लिए लगातार जारी है ।




