आज का विश्व एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ युद्ध, तनाव और अस्थिरता ने मानवता को गहरी चिंता में डाल दिया है। विशेष रूप से इज़राइल–ईरान–अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने न केवल वैश्विक शांति को चुनौती दी है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव विश्व की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
प्रो सुलक्ष्य कुमार मुरगई प्रबंधन विशेषज्ञ ने विशेष वार्ता में कहा मध्य-पूर्व क्षेत्र विश्व के लिए कच्चे तेल (Crude Oil) का सबसे बड़ा स्रोत है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का युद्ध या तनाव वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को अस्थिर कर देता है। तेल की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम नागरिक की रोजमर्रा की जिंदगी—परिवहन, महंगाई और ऊर्जा खर्च—पर भी सीधा असर डालता है।
इसी संदर्भ में “Strait of Hormuz” का महत्व अत्यंत बढ़ जाता है। यह विश्व का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहाँ से लगभग एक-तिहाई वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। यदि इस जलमार्ग में किसी भी प्रकार का अवरोध उत्पन्न होता है, तो इसका प्रभाव पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसके साथ ही LPG (Liquefied Petroleum Gas) की आपूर्ति भी इस क्षेत्र पर निर्भर करती है। LPG का उपयोग भारत में करोड़ों परिवारों द्वारा घरेलू गैस के रूप में किया जाता है। यदि मध्य-पूर्व में संघर्ष बढ़ता है, तो LPG की आपूर्ति बाधित हो सकती है।
ऐसे जटिल और संवेदनशील समय में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना में विश्वास करता आया है। यही कारण है कि भारत ने कभी भी युद्ध को समाधान नहीं माना, बल्कि संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी है।
वर्तमान परिस्थितियों में भारत ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि किसी भी विवाद का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी विशेषता उसका संतुलन है—एक ओर इज़राइल के साथ मजबूत संबंध, तो दूसरी ओर ईरान के साथ ऐतिहासिक साझेदारी। इसी संतुलन के कारण भारत एक प्रभावी मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। यदि भारत अपने कूटनीतिक प्रयासों को और सशक्त करे, तो न केवल क्षेत्रीय तनाव को कम किया जा सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति—Crude Oil, LPG—और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों जैसे Strait of Hormuz को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
आज जब विश्व के अनेक देश युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं, भारत शांति, स्थिरता और सहयोग की बात करता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की आवाज को महत्व दिया जा रहा है। भारत का यह दृष्टिकोण न केवल नैतिक रूप से श्रेष्ठ है, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी विश्व के लिए आवश्यक है।
प्रो मुरगई ने कहा अंततः, यह कहा जा सकता है कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि एक विचार है—शांति, सह-अस्तित्व और संतुलन का विचार। यदि भारत के नेतृत्व में संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाए, तो न केवल युद्ध की स्थितियों को टाला जा सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को भी स्थिर रखा जा सकता है।



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