देहरादून, उत्तराखंड़ के विभिन्न सामाजिक एवं पर्यावरणीय संगठनों तथा चिंतित नागरिकों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर राज्य में तेजी से घटते वनावरण और पेड़ों की कटाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पत्र में कहा गया है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं, लिनियर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, खनन गतिविधियों और अव्यवस्थित शहरी विकास के कारण उत्तराखंड की हरित पहचान लगातार कमजोर हो रही है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि लोक निर्माण विभाग जैसी एजेंसियों द्वारा विकास कार्यों को संवेदनशीलता के बिना लागू करने के कारण राज्य भर में बड़ी मात्रा में वन भूमि का डायवर्जन हुआ है और अनेक परिपक्व पेड़ों को काटा गया है।
नागरिकों ने इस विडंबना की ओर भी ध्यान दिलाया है कि उत्तराखंड, जो कभी गौरा देवी और सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक चिपको आंदोलन का केंद्र रहा है, आज व्यापक स्तर पर हरित आच्छादन के विनाश का सामना कर रहा है। पत्र के अनुसार कंप्रेसेटरी प्लांटेशन और पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन के प्रयास अब तक परिपक्व पेड़ों के पारिस्थितिक महत्व की भरपाई करने में असफल रहे हैं। इसका समग्र प्रभाव अब बढ़ते तापमान, खराब होती वायु गुणवत्ता, अनियमित वर्षा और बढ़ती जलवायु संवेदनशीलता के रूप में दिखाई दे रहा है।
पत्र में देहरादून की न्यू कैंट रोड के प्रस्तावित चौड़ीकरण को विकास के नाम पर हो रही वनों की कटाई के एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 23 जून 2024 को लगभग 5,000 नागरिकों ने इस परियोजना के लिए प्रस्तावित लगभग 250 पेड़ों की कटाई के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। यह विरोध उस समय हुआ जब शहर भीषण गर्मी की लहर से गुजर रहा था और तापमान 43°C तक पहुंच गया था। कई निवासियों ने कहा कि इतनी भीषण गर्मी के दौरान पेड़ों की कटाई की घोषणा करना अत्यंत असंवेदनशील और चिंताजनक था।
उस समय जनआक्रोश के बाद मुख्यमंत्री ने कथित रूप से आश्वासन दिया था कि एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा और इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया गया है। नागरिकों का कहना है कि इस आश्वासन का व्यापक रूप से स्वागत किया गया था और शहर की घटती हरियाली को लेकर चिंतित लोगों को राहत मिली थी। हालांकि बाद में हुई कुछ घटनाओं ने यह सवाल खड़े किए कि क्या उस आश्वासन को कमजोर किया जा रहा है।
24 नवंबर 2025 को लोक निर्माण विभाग द्वारा दिए गए एक आरटीआई उत्तर में बताया गया कि दिलाराम चौक से मुख्यमंत्री आवास तक सड़क के फोर-लेनिंग के लिए 30 पेड़ों को काटा जा सकता है। इसके बाद फरवरी 2026 में नागरिकों को जानकारी मिली कि कम से कम 17 पेड़ों को तुरंत काटा जा सकता है और भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद कई और पेड़ प्रभावित हो सकते हैं। इससे स्थानीय निवासियों में बाकी पेड़ों के भविष्य को लेकर नई चिंता पैदा हो गई।
1 मार्च 2026 को लगभग 300 नागरिकों ने “वादा याद दिलाओ” नाम से एक शांतिपूर्ण पदयात्रा आयोजित की, जो दिलाराम बाजार से सेंट्रियो मॉल तक निकाली गई। इस मार्च में वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और विभिन्न नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने कहा कि यह कार्यक्रम देहरादून घाटी में तेजी से घटती हरियाली को लेकर बढ़ती सार्वजनिक चिंता को दर्शाता है।
मीडिया में आई खबरों और नागरिकों की सक्रियता के बाद 2 मार्च 2026 को लोक निर्माण विभाग ने एक बयान जारी कर कहा कि कैंट रोड के इस हिस्से पर पेड़ नहीं काटे जाएंगे। हालांकि नागरिक अभी भी चिंतित हैं क्योंकि खुदाई और सड़क चौड़ीकरण के कार्यों के कारण कई पेड़ों की जड़ें उजागर हो गई हैं, जिससे वे कमजोर हो सकते हैं और समय से पहले सूखने या गिरने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए हस्ताक्षरकर्ताओं ने मांग की है कि निर्माण कार्यों के दौरान पेड़ों की जड़ों को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो, इसके लिए लिखित गारंटी दी जाए।
पत्र में देहरादून घाटी में पहले से दिखाई दे रहे पर्यावरणीय प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है। वर्ष 2024 की गर्मियों में देहरादून का तापमान रिकॉर्ड 43°C तक पहुंच गया था, जिससे शहर के निवासियों को अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ा। वहीं सर्दियों 2025 में शहर में कई दिनों तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 से ऊपर दर्ज किया गया, जो “गंभीर” श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने यह भी कहा कि केवल सड़कों को चौड़ा करना ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और इससे अक्सर वाहनों की संख्या और बढ़ जाती है। उन्होंने राज्य सरकार से बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, मजबूत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली, विकेंद्रीकृत शहरी योजना और पैदल यात्रियों के अनुकूल अवसंरचना को प्राथमिकता देने की अपील की है। साथ ही एक पारदर्शी और वैज्ञानिक योजना ढांचे की मांग की है, जो विकास की जरूरतों को पूरा करते हुए उत्तराखंड के पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा करे।
इस पत्र का समर्थन कई प्रमुख नागरिकों और संगठनों ने किया है, जिनमें उत्तराखंड इंसानियत मंच के रवि चोपड़ा, उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के विजय भट्ट, संयुक्त नागरिक संगठन के जगमोहन मेंदिरत्ता और सुशील त्यागी, बलभद्र खालंगा समिति के कर्नल थापा, बीटीडीटी के लोकेश ओहरी, प्रमुख से परमजीत कक्कड़, पिंडर घाटी यूथ क्लब के सूरज नेगी, मेकिंग ए डिफरेंस के करण कपूर, धाद के तन्मय ममगाईं, फ्रेंड्स ऑफ द दून की फ्लोरेंस पांधी, वेस्ट वॉरियर्स के नवीन सदाना और एसडीसी फाउंडेशन के अनुप नौटियाल शामिल हैं। इसके अलावा सिटिजंस ऑफ ग्रीन दून और देहरादून सिटीजंस फोरम के सदस्य तथा कई अन्य चिंतित नागरिकों ने भी इस अपील का समर्थन किया है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे अपने पहले दिए गए आश्वासन को दृढ़ता से लागू करें और सुनिश्चित करें कि न्यू कैंट रोड पर एक भी पेड़ न काटा जाए। साथ ही उन्होंने सरकार से देहरादून और उत्तराखंड के लिए ऐसा विकास मॉडल अपनाने की अपील की है जो राज्य की अनूठी हरित पहचान की रक्षा करे, न कि उसे कमजोर करे।



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