Thursday, August 13, 2026
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अंकिता भंडारी हत्याकांड के विभिन्न बिन्दुओं को लेकर कांग्रेसियों ने सौंपा ज्ञापन

देहरादून, उत्तराखण्ड़ प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमण्डल ने आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में उत्तराखण्ड़ के अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था वी. मुरूगेशन से मुलाकात कर अंकिता भंडारी हत्याकांड के विभिन्न बिन्दुओं पर ज्ञापन प्रेषित कर उनका ध्यान आकर्षित करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की ।
अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि सर्व विदित है कि अंकिता भडारी हत्याकांड में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक की पत्नी द्वारा अपने पूर्व विधायक पति एवं स्वयं के बीच हुई वर्तालाप को सोशल मीडिया पर जारी किया गया है। जिसमें तथाकथित पूर्व विधायक यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि प्रश्नगत प्रकरण में कथित वी.आइ.पी. दुष्यन्त कुमार गौतम उर्फ गट्टू है। तद्दोपरान्त आपके द्वारा राज्य सरकार/पुलिस विभाग की ओर से समाचार चैनलों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से वीडियो जारी कर दिया गया स्पष्टीकरण मिला। हमारा स्पष्ट मत है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड प्रकरण में कोई न कोई व्यक्ति कथित वी.आई.पी. अवश्य था, जिसकी इच्छापूर्ति न करने की ऐवज में अंकिता भंडारी की निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि भाजपा के पूर्व विधायक द्वारा ताजा रहस्योद्घाटन एवं आपके द्वारा सरकार और पुलिस विभाग की ओर से जारी स्पष्टीकरण के मद्देनजर आपसे अपेक्षा है कि कृपया निम्न प्रश्नगत बिन्दुओं पर भी स्पष्टीकरण दें :
1. अंकिता भंडारी का पार्थिव शरीर नहर से निकालने की अगली रात को वनन्तरा रिसॉर्ट पर बुल्डोजर किसके आदेश पर चलवाया गया?
2. राज्य सरकार द्वारा गठित एस.आई.टी. ने यदि बुल्डोजर चलाने वालों के बयान दर्ज किये हों, तो उत्तराखंड के नागरिकों को यह भी बताने का कष्ट करें कि एस.आई.टी. की रिपोर्ट में उपरोक्त पैरा-1 के सम्बन्ध में क्या तथ्य सामने आये?
3. क्या जांच ऐजेंसी या एस.आई.टी. इस तथ्य से विज्ञ है कि रात्रि 2ः30 बजे अंकिता भंडारी के वनन्तरा रिसॉर्ट स्थित निवास कक्ष को बुल्डोजर द्वारा ध्वस्त करने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा यह स्वीकार किया गया कि उनके द्वारा रिसॉर्ट का ध्वस्तीकरण कराया गया है, जिसका उनके द्वारा श्रेय लेने की कोशिश की गई? क्या एस.आई.टी. द्वारा अपनी जांच में मुख्यमंत्री जी की इस बात का उल्लेख किया गया है?
4. क्या एस.आई.टी. ने अंकिता भंडारी एवं उसके मित्र के बीच हुई व्हाट्सअप बातचीत संदेशों की गहनता से जांच की गई जिसमें अंकिता के द्वारा स्पष्ट रूप से यह बताया गया था कि किसी वी.आई.पी. को विशेष सेवायें देने का उस पर भारी दबाव है?
5. आपके द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण में बताया गया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की सी.बी.आई. जांच इसलिए संभव नहीं है कि मा0 न्यायालय द्वारा इसे अमान्य कर दिया गया है। इस सम्बन्ध में आपसे स्पष्टीकरण की अपेक्षा है कि सभी पक्षकारों द्वारा सी.बी.आई. जांच की मांग के उपरान्त सरकार द्वारा इसका विरोध क्यों किया जा रहा है?
6. भाजपा विधायक रेणु बिष्ट की अंकिता भंडारी के शयन कक्ष को ध्वस्त करने में जो भूमिका थी, क्या जांच ऐजेंसी/एस.आई.टी. द्वारा इसका संज्ञान लिया गया है? यदि जांच ऐजेंसी ने इसका संज्ञान लिया तो जांच ऐजेंसी की खोज के परिणाम क्या थे? उन्हें सार्वजनिक किये जाने की आवश्यकता है।
7. अंकिता भंडारी के पिता ने अनेकों बार तथा अभी कुछ दिन पहले एक चैनल को दिये गये साक्षात्कार में स्पष्ट रूप से कहा है कि अंकिता भंडारी की गुमशुदगी के बाद जब वे पहली बार पटवारी चौकी में पहुंचे तो पटवारी द्वारा उन्हें धमकाकर चुप कराने की कोशिश की गई और उनके इन आरोपों पर (जिसमें उन्होंने यह कहा कि पटवारी द्वारा मुझ पर दबाव बनाया गया कि मैं आपरोपियों के पक्ष में बातें कहूं और अंकिता की हत्या को आत्महत्या मान लूं यही नहीं आरोपी पक्ष द्वारा भी उन्हें डाराया-धमकाया गया) अभी तक जांच ऐजेंसी/एस.आई.टी. द्वारा कोई समाधान कारक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। कृपया इस पर भी स्थिति स्पष्ट करें।
8. पुलिस विभाग का बार-बार यह कहना कि किसी के पास हत्याकांड के प्रमाण हो तो पुलिस को उपलब्ध कराये, संदेह को और गहराता है। यह जानते हुए भी कि सत्ता पक्ष के लोगों द्वारा हत्याकांड के सबूत नष्ट किये गये और इसकी सच्चाई सत्तापक्ष के सबूत नष्ट करने वाले लोग ही जानते हैं, इसके बावजूद उन्हें जांच के घेरे में न लाने वाली स्थिति पर भी आपका स्पष्टीकरण वांछनीय है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड प्रकरण में उपरोक्तानुसार अनगिनत प्रश्न आज भी अनुत्तरित खडे हैं, जिनके समाधान कारक स्पष्टीकरण सरकार और जांच ऐजेंसी को सपष्ट करने चाहिए। उन्होंने अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था से मांग की कि एस.आई.टी. द्वारा की गई जांच को उपरोक्त प्रश्नों के आलोक की सीमा में स्पष्टीकरण के रूप में सार्वजनिक करने का कष्ट करें, ताकि प्रदेश में आमजन वस्तु स्थिति से अवगत हो सके तथा प्रदेश की जनता का कानून पर विश्वास बना रहे।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, कर्नल रामरतन नेगी, विरेन्द्र पोखरियाल, सुरेन्द्र रांगड, अभिनव थापर, नीरज त्यागी, कमल रावत, विजय पाल रावत, डॉ. प्रतिमा सिंह, गरिमा दसौनी, राजेश चमोली, डॉ. प्रदीप जोशी, महेन्द्र सिह नेगी, मदन लाल, अमेन्द्र बिष्ट, मधुसूदन सुन्द्रियाल, बब्बन सती, टीटू त्यागी, विजय गुसांई, गुल मोहम्मद, हुकम सिंह कठैत, विजय गुसाई, सुलेमान अली, अनिल नेगी, राजेन्द्र दानू, यशपाल चौहान आदि शामिल थे।

 

 

अंकिता के मामले में सीएम आवास कूच 4 जनवरी को

“सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों का राज्यव्यापी संयुक्त आंदोलन का आह्वान”

देहरादून, अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में सामने आये नये घटनाक्रम के बाद अब सभी जन पक्षधर सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ने की घोषणा कर दी है। आंदोलन के पहले चरण में 4 जनवरी को मुख्यमंत्री का घेराव किया जाएगा। इसके लिए परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया जाएगा। इसके साथ ही राज्यभर में सभी जिला और तहसील मुख्यालयों पर भी सामाजिक संगठनों से विरोध प्रदर्शन की अपील की जाएगी।
उत्तराखंड महिला मंच की अपील पर आज शहीद स्मारक में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि मुख्यमंत्री आवास कूच के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। इसमें देहरादून सहित राज्यभर में चक्काजाम और राज्य के विभिन्न मुद्दों को लेकर जन जागरूकता यात्राएं भी शामिल हैं। 4 जनवारी के मुख्यमंत्री आवास कूच को सफल बनाने के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन भी किया गया।Ankita Bhandari Murder Case: नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट से मुकरे तीनों  आरोपी, 3 जनवरी को अगली
बैठक में फैसला लिया गया कि इस कूच के माध्यम से राज्य सरकार से उर्मिला सनावर के आरोपों की जांच किसी मौजूदा जज की अध्यक्षता वाली कमेटी से करने की मांग की जाएगी। यह भी मांग की जाएगी कि इस कमेटी में कम से 4 सदस्य सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों के भी होंगे। इसके साथ ही बीेजेपी के प्रदेश महामंत्री संगठन अजय कुमार और राज्य प्रभारी दुष्यंत गौतम को जांच पूरी होने तक उनके पदों से हटाने और उर्मिला सनावर की सुरक्षा की मांग भी की जाएगी।
बैठक में शामिल प्रतिनिधियों का कहना था कि उत्तराखंड के लोगों के मन में यह टीस लगातार बनी हुई थी कि अंकिता भंडारी के मामले में पूरा न्याय नहीं मिला है। हत्या का कारण बना वीआईपी को पूरी तरह बचा लिया गया है। लोग यह भी महसूस कर रहे थे कि जनता के दबाव में निचली अदालत ने तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा बेशक सुनाई हो, लेकिन यह मामला ऊपरी अदालतों में टिक नहीं पाएगा और तीनों आरोपी बरी हो जाएंगे। ऐसे में उर्मिला सनावर के आरोपों ने चिंगारी का काम किया है। इसलिए नई परिस्थितियों में जरूरी है कि अंकिता के वीआईपी को बेनकाब करने के लिए जन दबाव बनाया जाए।
बैठक में गरिमा दसौनी, ज्योति रौतेला, समर भंडारी, प्रमिला रावत, शंभु प्रसाद मंमगाईं, इंद्रेश मैखुरी, सुलोचना इष्टवाल, ऊषा डोभाल, डॉ. रवि चोपड़ा, ़ऊषा भट्ट, रजिया बेग, आकांक्षा नेगी, मोहित डिमरी, एसएस पांगती, त्रिलोचन भट्ट, मनीष केडियाल, जगमोहन मेहंदीरत्ता, नन्द नन्दन पांडेय, प्रो राघवेन्द्र, विजय भट्ट, ऊमा भट्ट, कविता कृष्णपल्लवी, सतीश धौलाखंडी, लुशुन टोडरिया, लताफत हुसैन, हरवीर सिंह कुशवाहा, धीरेन्द्र प्रताप आदि ने अपने विचार रखे। संचालन कमला पंत ने किया।
इस बैठक में कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई माले, उत्तराखंड क्रांति दल, राष्ट्रीय रीजिनल पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ ही उत्तराखंड इंसानियत मंच, मूल निवास भूकानून संघर्ष समिति, सर्वोदय मंडल, चेतना आंदोलन, दून सिटीजन फोरम, भारत ज्ञान विज्ञान समिति, जन संवाद समिति, पूर्व सैनिक संगठन, साथिणी महिला संगठन, स्त्री मुक्ति लीग, भारत की नौजवान सभा, इप्टा, आइसा आदि के प्रतिनिधि शामिल हुए।

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