Thursday, June 4, 2026
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विश्व धरोहर गंगा को हमें शोषण के लिए ‘संसाधन’ के रूप में देखना करना होगा बंद : विद्या भूषण रावत

‘दून पुस्तकालय में गंगा : उद्गम से समुद्र तक विषय पर हुआ व्याख्यान’

देहरादून, दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से गंगा : उद्गम से समुद्र तक विषय पर विद्या भूषण रावत का व्याख्यान और उस पर आधारित वृत्तचित्र फिल्म का प्रदर्शन का एक कार्यक्रम किया गया, इसमें नदी प्रणाली और समुदायों के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया, विद्या भूषण रावत ने अपने व्याख्यान में वृत चित्रों के प्रदर्शन के जरिये कहा कि गंगा हिमालय की ओर से मानव जाति को दिया गया सबसे बड़ा उपहार है। मैं इसे हमारी प्राकृतिक धरोहर कहता हूँ। मैं पिछले 30 वर्षों से संसाधन अधिकारों पर काम कर रहा हूँ, लेकिन आज मैं स्पष्ट रूप से कहता हूँ कि गंगा मेरे लिए मेरी धरोहर है, मेरी पहचान है और मैं इसे केवल एक ‘संसाधन’ बनकर नहीं रहने दूँगा जिसका शोषण विशुद्ध व्यावसायिक लालच के लिए किया जा सके, चाहे वह व्यावसायिक हितों के लिए हो या ‘राष्ट्रीय’ हित के लिए।
अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक दृष्टि से, हिमालयी क्षेत्र शिव और शक्ति का निवास स्थान है। भगवान शिव हिमालय के पशुपालकों के देवता हैं। जनजाति समुदाय के लोग प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। मैं चाहूंगा कि आप चिपको के केंद्र लाता गांव के श्री धन सिंह राणा के ये ज्ञानवर्धक शब्द सुनें। वह ज्ञान से भरे थे जब उन्होंने मुझसे कहा, विशेषज्ञ कह रहे हैं कि पचास साल बाद हिमालय गायब हो जाएगा क्योंकि ग्लेशियर पिघल रहे हैं। फिर वही विशेषज्ञ इन बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी देते हैं, पहाड़ों को नष्ट करते हैं और पारिस्थितिकी को नष्ट करते हैं।
गंगा से आजीविका और जैव विविधता को होने वाले खतरे के विषय में बोलते हुये रावत ने कहा कि गंगा एक विश्व धरोहर है और हमें इसे शोषण के लिए ‘संसाधन’ के रूप में देखना बंद करना होगा। इसे संरक्षित और सम्मानित किया जाना चाहिए क्योंकि यह हमारी पहचान है। मुद्दा केवल एक विशेष धर्म की धार्मिक पहचान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी धर्मों से जुड़ा है। गंगा पर बौद्ध धर्म फला फूला। बंगाल और बांग्लादेश में हमारे पास खूबसूरत मस्जिदें और इस्लामी विरासत थी। गंगा पर कुछ सबसे बड़े शिव मंदिर हैं। उत्तराखंड भगवान शिव की भूमि है और पूरे हिमालय में शार्ववाद के साथ बौद्ध धर्म फला-फूला। इसलिए, अब समय आ गया है कि हम वास्तव में गंगा, हिमालय और उससे निकलने वाली विभिन्न नदियों और धाराओं की रक्षा करें क्योंकि वे हमारी जीवन रेखा हैं।
यही नहीं हाल ही में विद्या भूषण रावत ने यूट्यूब पर हिमालयकी नाम से एक श्रृंखला शुरू की है, जिसमें हर सप्ताह गंगा और उसकी यात्रा के बारे में बताया जाता है।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में केंद्र के प्रोग्राम एसोसिएट चंद्रशेखर तिवारी ने उपस्थित लोगों और अतिथि वक्ता का स्वागत किया और निकोलस हॉफलैण्ड ने अन्त में सबका आभार व्यक्त किया।
इस दौरान डॉ. कल्याण सिंह रावत, विजय भट्ट, नंदलाल भारती, डॉ.राजेश पाल, जिनेन्द्र भारती, डॉ. हर्ष डोभाल, सुन्दर सिंह विष्ट,अंजलि भरतरी, समदर्शी बड़थ्वाल, हिमांशु आहूजा, मनीष ओली, नरेन्द्र सिंह रावत, जगदीश सिंह महर, अरुण कुमार असफल, जगदीश बाबला, राकेश कुमार, आलोक सरीन, अवतार सिंह, कुल भूषण नैथानी, सहित बड़ी संख्या में दून पुस्तकालय में अध्ययनरत युवा छात्र,शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण विद लेखक और अन्य लोग उपस्थित रहे।

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