Friday, April 24, 2026
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‘इकोलॉजी फर्स्ट, इकॉनमी लेटर’ के मंत्र से सुरक्षित होगा हिमालय का भविष्य: विशेषज्ञ

देहरादून। हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरणीय असंतुलन और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच शुक्रवार को राजपुर रोड स्थित एक स्थानीय होटल में ‘समृद्ध हिमालयी भविष्य को सुरक्षित करना’ विषय पर उच्च स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान नीति-निर्माताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास, विनाश की कीमत पर नहीं होना चाहिए। कार्यशाला को संबोधित करते हुए इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (IMI) के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी रमेश नेगी ने कहा, “जब तक हमारी योजनाओं के केंद्र में प्रकृति नहीं होगी, तब तक कोई भी निवेश न तो प्रभावी होगा और न ही टिकाऊ।” उन्होंने ‘इकोलॉजी फर्स्ट, इकॉनमी लेटर’ (पहले पारिस्थितिकी, फिर अर्थव्यवस्था) के सिद्धांत को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अब आजीविका और सामाजिक व्यवहार में बदलाव लाना अनिवार्य हो गया है।

यह कार्यशाला IMI और यूके स्थित सिस्टमिक लिमिटेड की एक संयुक्त परियोजना का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए एक ‘हरित निवेश पोर्टफोलियो’ तैयार करना है। आयोजकों ने बताया कि फरवरी 2026 में दिल्ली में हुई प्रारंभिक बैठक के बाद अब देहरादून में क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया गया है। IMI की कोषाध्यक्ष बिनीता शाह ने कहा कि इस पहल का लक्ष्य हिमालयी मुद्दों पर नीति-आधारित संवाद को मजबूत करना है।

उत्तराखंड कृषि विभाग, जी.बी. पंत संस्थान और दून विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में एसटीए लेप्चा, एसके सिंह, सुशील रमोला, मनोज पंत, देवाशीष सेन, अनुप नौटियाल और दिनेश सी सेमवाल सहित करीब 50 हितधारक मौजूद रहे। इस पूरी पहल को रॉकफेलर फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त है।

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