Friday, April 24, 2026
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सिंद्रवाणी पहुंचे जिलाधिकारी ने गुलदार के हमले से मृतक बच्चे के परिजनों को बंधाया ढांढस, पीड़ित परिवार को आवास व गांव में सुरक्षा उपायों के दिए निर्देश।

(देवेन्द्र चमोली)
रुद्रप्रयाग -विगत दिवस जनपद के विकासखंड अगस्त्यमुनि अंतर्गत ग्राम सिंद्रवाणी में गुलदार के हमले से मृतक पांच वर्षीय बालकके परिजनों से आज जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया। जिलाधिकारी ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए परिवार को इस विषम परिस्थिति में धैर्य एवं हौसला बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संपूर्ण जिला प्रशासन इस कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है तथा हर संभव उनको सहायता प्रदान की जाएगी।
जिलाधिकारी ने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास लाभ दिलाने के निर्देश दिए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर गांव में ही सुरक्षित स्थान पर परिवार के विस्थापन की भी व्यवस्था किए जाने की बात कही। उन्होंने आश्वस्त किया कि मृतक बालक की माता के बैंक खाते में 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी।
जिलाधिकारी ने मृतक बालक की दो बहनों को राज्य सरकार की छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 18 वर्ष की आयु तक शिक्षा का लाभ दिलाने तथा मृतक के दादा-दादी को वृद्धावस्था पेंशन से आच्छादित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने गांव एवं सड़क किनारे उगी झाड़ियों के तत्काल कटान के निर्देश दिए। गांव में आज ही पांच सोलर लाइट स्थापित कराई गई हैं तथा आवश्यकता अनुसार और लाइट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही गांव के आसपास घेरबाड़ (फेंसिंग) कराने के भी निर्देश दिए गए।
गुलदार की धरपकड़ के लिए वन विभाग द्वारा ग्रामीणों की राय को शामिल करते हुए विभिन्न स्थानों पर 3 पिंजरे लगाए गए हैं तथा 5 ट्रैप कैमरों सहित आधुनिक उपकरणों की सहायता से लगातार निगरानी की जा रही है। वन विभाग की गश्ती टीम क्षेत्र में निरंतर गश्त कर रही है। इसके अतिरिक्त वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञों को भी मौके पर बुलाया गया है, जो आगामी 4-5 दिनों तक क्षेत्र में रहकर गुलदार की गतिविधियों की मॉनिटरिंग करेंगे।
जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगली जानवरों की संभावित गतिविधियों को देखते हुए सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन व वन विभाग को दें।

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