Wednesday, August 5, 2026
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उत्तराखंड़ में दलितों की भूमि कब्जाने वाले भू माफियाओं के खिलाफ हो एसआईटी जांच : नानक चंद

राष्ट्रीय सामाजिक न्याय कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दलितों की भूमि संबंधी समस्याओं को लेकर उत्तरांचल प्रेस क्लब में की पत्रकार वार्ता

देहरादून, राष्ट्रीय सामाजिक न्याय कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष नानक चंद ने आज उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए उत्तराखंड राज्य के अंदर दलितों की जमीनें भू माफियाओं द्वारा कब्जाने का बड़ा आरोप लगाते हुए मुद्दे को प्रमुखता से साथ उठाया और मांग की है कि यह मामला एसआईटी को सौंपा जाए, ताकि निष्पक्ष रूप से जांच हो सके और दलितों को उनकी जमीनें वापस मिल सकें I
मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष नानक चंद ने पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि आजादी के बाद से ही अनुसूचित जातियो तथा अनुसूचित जनजातियों को उनकी भूमि का मालिकाना हक दिये जाने व भूमि आंवटन की अनेक योजनाएं भारत सरकार ने समय-समय पर चलाई। विभिन्न प्रदेशों की सरकारों को भी केन्द्र सरकार के आदेशो के अनुसर एससी एसटी समाज के भूमिहीन परिवारो को भूमि आवंटन करने के साथ साथ भूमि पर मालिकाना हक दिए जाने के लिए कानून में संशोधन किए। लेकिन भू-माफियाओ तथा बडे जमीदारो ने सरकार की योजनाओ को शत-प्रतिशत कामयाब नहीं होने दिया, सरकार व प्रशासन में बैठे लोगो ने एससी एसटी की भूमि को खुर्द बुर्द कराने में भूमाफियाओ का सहयोग किया I उन्होंने कहा कि अनेक घटनाये एससी एसटी के विरूद्ध जमीनों पर अधिकार पाने में घटी, जिसमें दलित समाज को जानमाल का भारी नुकसान हुआ।
नानक चंद ने कहा कि केन्द्र सरकार ने एससी एसटी अत्याचारो के विरूद्ध अनेक कानून बनाये तथा उन्हे अमल मे लाने के लिए अनेक आयोगो का गठन भी किया, जिससे इस समाज को तुरन्त राहत मिल सके I उनका कहना है कि पहले उत्तर प्रदेश सरकार के समय राज्य में भू-कानून अमल में लाने के लिए अध्यादेश व कानून में संशोधन कर दलितो की भूमि को सुरक्षित करने व भूमि का मालिकाना हक, पट्टो का नियमितिकरण आदि व्यवस्था की, लेकिन सरकार में बैठे अधिकारियो व कर्मचारियो की मिली भगत से सभी भू-कानून मजाक बन कर रह गये I वर्ष 2000 में उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के बाद उम्मीद की जा रही थी कि एससी एसटी को इस छोटे राज्य में न्याय मिलेगा व अत्याचार कम होंगे, लेकिन राज्य निर्माण के बाद से उत्तराखण्ड राज्य में भूमाफियाओ का प्रभाव बहुत अधिक बढ़ा, फलस्वरूप उत्तराखण्ड राज्य में दलितों की भूमि पर कब्जे, दलित समाज को भूमि बेचने पर मजबूर करने की घटनाये बडी संख्या में बढ़ गई I उन्होंने कहा कि आज हम कुछ पीडितो को मीडिया के समक्ष पेश कर रहे है, तथा शासन प्रशासन की कार्यवाहियो को भी आपके समक्ष रख रहे है I इस रिपोर्ट में राज्य स्तर पर संविधानिक संस्थाओ के आदेशो का किस तरह धज्जियाँ उडाई जा रही है वह भी प्रस्तुत कर रहे है, राज्य की सरकारी मशीन पूरी तरह भू-माफियाओ के सामने नमस्तक है I उन्होंने पत्रकार वार्ता में मानवाधिकार आयोग के एक पत्र की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि कि हमने अनेक स्तरो पर उत्तराखण्ड राज्य में अनुसूचित जातियों की भूमि पर अनाधिकृत रूप से कब्जा होने तथा अनुसूचित जातियों को डरा धमका कर बिना प्रशानिक स्वीकृति के भूमि खरीद-फरोख्त कर उन्हें भूमि से बेदखल करने की अनेको स्तरो पर शिकायत करते रहे है, लेकिन आश्चर्य है कि शिकायतो पर ध्यान नही दिया जा रहा है, जिससे अनुसूचित जातियों के लोग बहुत अधिक पीड़ित है। वर्ष 1995 से भूमाफिया फर्जी कागजात बनाकर ग्राम “बांसागाड़” ग्राम सभा भट्टा क्यारकुली, ग्राम सभा भट्टा क्यारकुली भितरली आदि मसूरी में दलितो की भूमि पर तरह तरह से कब्जा किये जा रहे है। उन्होंने यह भी कहा कि हमने तत्कालीन उत्तर प्रदेश शासन में भी शिकायत दर्ज करायी थी, जिस पर 30 सितम्बर 1995 को मुख्य सचिव श्री माता प्रसाद ने आदेश देकर गढ़वाल कमिशनर सुभाष कुमार को मौके पर भेजा था, साथ ही इस क्षेत्र में कीर्तिलाल व अन्य की भूमि पर कब्जा किए जाने का मामला सामने आया I गढ़वाल कमीश्नर द्वारा सम्पूर्ण क्षेत्र का भू सर्वे कराने व मौके पर भूमि पर काबिज लोगो की सूची बनाने के निर्देश दिए। समय-समय पर तहसील अधिकारियो ने भूमि सर्वे किया तथा अपनी मनमर्जी कर अपनी तरह से इसमें हेरा-फेरी करते रहे, कोई अधिकृत अधिकारी निरीक्षण के लिए नही रखा गया फलस्वरूप भू सर्वे पूर्ण तरह से षडयंत्र का शिकार बन गया I उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद भी इस क्षेत्र को लेकर कई मुख्यमत्रियों ने ग्रामीणो की भूमि सम्बन्धी समस्याओ पर निर्देश दिए, लेकिन आश्चर्य है कि ग्राम बांसागाड भितरली आदि क्षेत्र का भू सर्वे सार्वजानिक नही किया गया इस पर आज भी उत्तराखण्ड अनुसूचित जाति आयोग, माननीय मुख्य मंत्री के शिकायती पोर्टल पर शिकायत दर्ज है I यहाँ यह अवगत कराना है कि जिला प्रशासन में बैठे भ्रष्ट कर्मचारी इस क्षेत्र में वर्षों से काबिज एससी समाज के लोगो का भू सर्वे घोषित नहीं कर रहे है, जिससे भूमि रिकार्ड में भारी हेरा फेरी जारी है। इस तरह से कई की जमीनों पर भूमाफियाओं ने अपने कब्जे किए हुए हैं I इसलिए मामले की एसआईटी जांच होनी चाहिए I ग्राम बांसागाड़ निवासी टिंकू कन्नौजिया पुत्र स्व० मोहन लाल की भूमि पर भी फर्जी वसीयतनामा बनाकर उनके परिवार को पीडित किया जा रहा है, तथा धमकियां दी जा रही है I

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