मुझे विशेष रूप से इस बात का संतोष है कि इस समृद्ध परंपरा को संजोकर रखने में मातृ-शक्ति की भूमिका सदैव केंद्रीय रही है। पहाड़ की महिलाओं ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन परंपराओं को जीवित रखा है। आज जब विश्व जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की ओर बढ़ रहा है, उत्तराखण्ड इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। पुस्तक से जुड़े सभी रचनाकारों और टीम को इस प्रेरक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
लोक भवन में “फ्लेवर ऑफ देवभूमि” पुस्तक का विमोचन
मुझे विशेष रूप से इस बात का संतोष है कि इस समृद्ध परंपरा को संजोकर रखने में मातृ-शक्ति की भूमिका सदैव केंद्रीय रही है। पहाड़ की महिलाओं ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन परंपराओं को जीवित रखा है। आज जब विश्व जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की ओर बढ़ रहा है, उत्तराखण्ड इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। पुस्तक से जुड़े सभी रचनाकारों और टीम को इस प्रेरक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।



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