देहरादून, अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी संयुक्त नागरिक संगठन की पहल कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि सयुंक्त नागरिक संगठन के मुख्यालय में आयोजित गोष्ठी में शामिल हुये।
शुक्रवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण गोष्ठी में राष्ट्र के लियॆ बलिदान देने वाले स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों को याद करने के साथ श्रद्धासुमन अर्पित किये और उत्तरकाशी के धराली आपदा में हुये लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त कर आत्मशांति हेतु दो मिनट का मौन रखा गया, कार्यक्रम का संचालन संयुक्त नागरिक संगठन के नरेश चन्द्र कुलाश्री एवं अध्यक्षता सयुंक्त नागरिक संगठन के अध्यक्ष ब्रिगेडियर के. जी. बहल द्वारा किया गया।
गोष्ठी में चर्चा करते हुये पूर्व आईएफएस जयराज एवं स्पेक्स के प्रमुख बृजमोहन शर्मा के साथ मेजर कुलदीप सिंह रावत ने कहा कि हमें सबको मिलकर आजादी की लड़ाई की तर्ज पर समाज को जगाने एवं ऊर्जा की आवश्यकता हैं जैसे पूर्व में हमारे स्वतंत्रता सैनानी केवल एक मकसद को लेकर अंग्रेजों भारत छोड़ो औऱ आजादी के लियॆ लामबंद हुये थे उसी प्रकार अब हमें इन आपदाओं को रोकने हेतु पर्यावरण को बचाने एवं सघन वृक्षारोपण अभियान चलाना होगा नदी व नालों के छोर से निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाना होगा इसके लियॆ सरकार पर दबाव बनाना होगा।
पूर्व शिक्षा महानिदेशक महावीर सिंह बिष्ट एवं देवेन्द्र पाल सिंह के साथ जगदीश बाबला ने जोर देते हुये कहा कि कुछ आपदाएं स्वयं मानव निर्मित हैं औऱ कुछ सरकारों द्वारा कठोरता से नियमों को लागू ना बनाने एवं कराने से उत्पन्न हो रही हैं इसके लिए यदि हमें भारी संख्या में पहाड़ चढ़ने वाले तीर्थयात्रियों पर अंकुश लगाना होगा अन्यथा भविष्य में बहुत नुकसान होगा। अन्त में ब्रिगेडियर के जी बहल एवं प्रदीप कुकरेती के साथ हरिराज ने कहा कि आज अगस्त क्रांति के सैनानियों का स्मरण करते हुये आज हिमालय को बचाने के लिये अगस्त क्रांति की भांति एक मिशन बनाकर चलना होगा सरकार को पुनः कुछ ठोस सुझाव देने होंगे और साथ ही आम जनमानस को भी जगाने हेतु वार्डवार एक मुहिम चलानी होंगी कि हम प्लास्टिक का उपयोग छोड़े अपने घर सें पर्यावरण संरक्षण का कार्य प्रारम्भ करें औऱ शासन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें ताकि नदी व नालों के साथ पहाड़ों पर अतिक्रमण पर ठोस कार्यवाही करें औऱ औचक निरीक्षण कर ठोस कार्यवाही करें।
गोष्ठी में शामिल सामाजिक संस्थाओं में संयुक्त नागरिक संगठन की पहल पर कई संगठन जिसमें स्पेक्स, उत्तरांचल उत्थान परिषद, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी समिति, दून रेजिडेंट वेलफेयर फ्रंट, बलभद्र खलगां विकास समिति, पूर्व सैनिक संगठन, दून सिख वेलफेयर सोसाइटी, हिमालय पर्यावरण समिति, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, हर्षल फाउंडेशन, सोशल जस्टिस फाऊंडेशन, धाद के प्रतिनिधि के साथ ही कई पूर्व आईएफएस व शिक्षाविद के साथ ही पूर्व उच्चाधिकारी भी मौजूद रहे।
इनमें मुख्यतः पूर्व मुख्य वन संरक्षक जयराज एवं पूर्व शिक्षा महानिदेशक महावीर सिंह बिष्ट, डा. बृजमोहन शर्मा, पूर्व मुख्य वन संरक्षण अधिकारी डॉ. धनंजय मोहन, ब्रिगेडियर के.जी. बहल, नरेश चंद्र कुलाश्री, गिरीश चंद्र भट्ट, कर्नल विक्रम सिंह थापा, देवेंद्रपाल सिंह मोंटी, मेजर एम एस रावत, जितेंद्र डंडोना, एसपी दूबे, एस पी चौहान, मुकेश शर्मा, दिनेश भंडारी, प्रदीप कुकरेती, अवधेश शर्मा, आशा लाल, डा. रमा गोयल, खुशवीर सिंह, कुलदीप सिंह रावत, जीएस जस्सल, हरिराज सिंह, जगदीश बावला, उमेश्वर सिंह रावत,राजेंद्र सिंह रावत आदि शामिल थे।



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