Friday, December 12, 2025
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रिटायर्ड जवान के बेटे ने लिखी हत्या की पटकथा, दोस्तों के साथ मिलकर कर डाली हत्या

हरिद्वार, जनपद में 29 नवंबर को एयरफोर्स के रिटायर्ड जवान भगवान सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। रिटायर्ड जवान का हत्यारोपी कोई और नहीं, बल्कि मृतक का इकलौता बेटा यशपाल ही निकला है। रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी भगवान सिंह की हत्या का पुलिस और सीआईयू की टीम ने खुलासा कर दिया है। हत्या किसी लिफ्ट मांगने वाले बदमाश ने नहीं, बल्कि भगवान सिंह के अपने ही बेटे ने रची थी। करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा जमाने की नीयत से बेटे ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर पूरे घटनाक्रम की पटकथा लिखी और पिता को मौत के घाट उतरवा दिया। पुलिस ने बेटे सहित तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल तमंचा भी बरामद कर लिया गया है।

क्या है पूरा मामला :
आपको बता दें कि दो दिन पहले 29 नवंबर की रात एयरफोर्स के रिटायर्ड जवान भगवान सिंह की किसी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। भगवान सिंह के बेटे यशपाल ने ही पुलिस को इस मामले की सूचना दी थी। भगवान सिंह के बेटे यशपाल ने पुलिस को बताया था कि लिफ्ट लेने के बाहने अज्ञात व्यक्ति उनकी कार में बैठा और उस व्यक्ति ने उसके पिता को गोली मार दी। गोली मारने का बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और भगवान सिंह के बेटे से पूछताछ की तो उसने बताया कि वो किसी दोस्त की शादी में जा रहा था। पुलिस ने जब दोस्त के बारे में पूछा तो आरोपी कोई सही जवाब नहीं दे पाया। इस वजह से पुलिस के शक की सुई भगवान सिंह के बेटे यशपाल पर भी गई, क्योंकि उसी दिन यशपाल के किसी दोस्त की शादी थी ही नहीं।
पुलिस के मुताबिक सख्ती से पूछताछ में बेटे के जवाब लगातार उलझते गए, आखिरकार वह टूट गया और उसने स्वीकार किया कि पिता की हत्या उसी ने दोनों दोस्तों के साथ मिलकर करवाई है। पुलिस के मुताबिक मृतक भगवान सिंह रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी थे और उनके पास करोड़ों की संपत्ति थी। बेटे की गलत संगत और आदतों के चलते दोनों के बीच विवाद रहते थे। बेटे ने पिता पर कई बार संपत्ति अपने नाम कराने के लिए दबाव बनाया था, लेकिन मृतक ने साफ मना कर दिया और उसे बेदखल करने तक की चेतावनी दी। इसी रंजिश में बेटे ने हत्या की योजना बनाई।

30 लाख और एक स्कॉर्पियो में दी सुपारी :
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि यशपाल ने अपने दोस्त ललित मोहन उर्फ राजन और शेखर से बात कर पिता की हत्या के बदले 30 लाख और एक स्कॉर्पियो देने का सौदा तय किया था। तीनों ने 29 नवंबर की दोपहर नहर पटरी पर रेकी की और रात में वारदात को अंजाम दिया। रात करीब आठ बजे यशपाल अपने पिता को दोस्त की शादी का झांसा देकर कार से साथ ले गया। जटवाड़ा पुल से आगे बैराज के पास उसके साथी राजन और शेखर पहले से मौजूद थे। योजना के तहत यशपाल ने पिता से गाड़ी रुकवाई और खुद ड्राइवर सीट पर बैठ गया। इसी दौरान राजन को उसने दोस्त बताकर कार में बैठाया। कार चलने के कुछ ही मिनट बाद राजन ने तमंचे से भगवान सिंह की कनपटी पर दो गोलियां मार दीं। वारदात के बाद राजन मौके से फरार हो गया। कुछ देर बाद बेटे ने घटना को अंजान बताकर 112 पर कॉल कर पुलिस को गुमराह किया। आरोपी यशपाल, ललित मोहन उर्फ राजन, शेखर को धर दबोचा। राजन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा, एक खोखा कारतूस, वारदात के समय पहने कपड़े व जूते उसके किराये के कमरे से बरामद हुए।

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