Sunday, July 26, 2026
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आरबीआई के फैसले से ईएमआई और लोन होंगे सस्ते, रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा बूस्ट

मुंबई, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक के फैसलों का ऐलान किया। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है, जिसके बाद रेपो रेट अब 5.50 प्रतिशत से कम होकर 5.25 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा, मौद्रिक नीति के रुख को ‘न्यूट्रल’ रखा गया है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वो इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। यानी, आने वाले दिनों में होम और ऑटो जैसे लोन 0.25% तक सस्ते हो जाएंगे। ताजा कटौती के बाद 20 साल के 20 लाख के लोन पर ईएमआई 310 रुपए तक घट जाएगी। इसी तरह 30 लाख के लोन पर ईएमआई 465 रुपए तक घट जाएगी।
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, केंद्रीय बैंक 1 लाख करोड़ रुपए की सरकारी सिक्योरिटीज खरीदकर ओपन मार्केट ऑपरेशंस के जरिए इकोनॉमी में लिक्विडिटी ऐड करेगा। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक 5 बिलियन डॉलर का डॉलर-रुपया स्वैप अरेंजमेंट भी करेगा।
केंद्रीय बैंक ने स्टैंडिग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) रेट को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) रेट को घटाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले अक्टूबर में एमपीसी बैठक में रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला लिया गया था और मौद्रिक नीति का रुख भी न्यूट्रल रखा गया था।
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत दे रहे हैं। वहीं, जीएसटी रेशनलाइजेशन, कृषि में बेहतर संभावनाएं और कंपनियों के बेहतर बही-खाते जैसे कारक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देंगे। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 7.3 प्रतिशत लगाया है। पहले, जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.8 प्रतिशत रखा गया था।
वहीं, इस वर्ष दिसंबर तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत, अगले वर्ष मार्च तिमाही के लिए 6.5 प्रतिशत, जून तिमाही के लिए 6.7 प्रतिशत और सितंबर तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं, केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई 2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो कि पहले 2.6 प्रतिशत अनुमानित थी। आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि देश का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व बढ़कर 686 बिलियन डॉलर हो गया है, जो 11 महीने का मजबूत इंपोर्ट कवर देने के लिए काफी है।
इससे पहले, आरबीआई गवर्नर ने बीते हफ्ते संकेत दिया था कि अच्छे मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स की वजह से 5 दिसंबर को मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश है।

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