Tuesday, July 14, 2026
HomeStatesUttarakhandनैनबाग की बेटी प्रीति रावत ने छुआ आसमान का शिखर, बनीं हजारों...

नैनबाग की बेटी प्रीति रावत ने छुआ आसमान का शिखर, बनीं हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा

नैनबाग (शिवांश कुंवर),सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। टिहरी गढ़वाल के नैनबाग क्षेत्र के ग्राम टटोर की बेटी प्रीति रावत ने अपने संघर्ष, मेहनत और लगन के दम पर अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में पहचान बनाकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

प्रीति रावत का जन्म नैनबाग के ग्राम टटोर में हुआ। उनके पिता रघुवीर सिंह रावत और माता सुनीता रावत ने ग्रामीण परिवेश में रहते हुए भी बेटी को आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। प्रारंभिक शिक्षा नैनबाग में पूरी करने के बाद उन्होंने विकासनगर और फिर देहरादून से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

पढ़ाई के दौरान उन्हें विमानन क्षेत्र में करियर बनाने की सलाह मिली। शुरुआत में यह सपना चुनौतीपूर्ण जरूर लगा, लेकिन प्रीति ने हार नहीं मानी। उन्होंने गुरुग्राम पहुंचकर एयर होस्टेस की तैयारी की और कई इंटरव्यू पास करने के बाद विमानन क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

कोविड-19 महामारी के दौरान जब विमानन उद्योग सबसे बड़े संकट से गुजर रहा था, तब भी प्रीति ने अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा। आर्थिक और मानसिक चुनौतियों के बीच उन्होंने नौकरी के साथ-साथ अपनी तैयारी जारी रखी और कठिन दौर का डटकर सामना किया।

आज प्रीति रावत देश ही नहीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक उड़ान भर चुकी हैं। उन्होंने दुबई, कुवैत, सऊदी अरब, मलेशिया, मॉरीशस, दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों की यात्राएं कर अपने क्षेत्र और उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है।

व्यस्त जीवन के बावजूद प्रीति अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे अपने गांव टटोर लौटकर परिवार और ग्रामीणों से मिलती हैं। उनका मानना है कि सफलता का सबसे बड़ा आधार परिवार का विश्वास और संस्कार होते हैं।

प्रीति रावत का कहना है, “मैं एक छोटे से गांव टटोर से निकलकर विमानन क्षेत्र तक पहुंची हूं। मेरी सफलता का श्रेय मेरे माता-पिता, परिवार और भगवान को जाता है। मैं चाहती हूं कि गांव और पहाड़ की बेटियां बड़े सपने देखें। मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ हर मंजिल हासिल की जा सकती है।”

प्रीति रावत की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे नैनबाग, टिहरी गढ़वाल और उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। उनका संघर्ष और सफलता आज पहाड़ की बेटियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments