देहरादून(दीपक पंवार), इंटर्न और पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन जारी है। इंटर्न डॉक्टरों के बाद अब पीजी रेजिडेंट डॉक्टर भी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनका स्टाइपेंड लंबे समय से नहीं बढ़ाया गया है, जबकि पड़ोसी राज्यों में उन्हें अपेक्षाकृत अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
पीजी रेजिडेंट्स के प्रतिनिधि डॉ. अखिल चौहान ने बताया कि इंटर्न डॉक्टरों ने सात सितंबर से आंदोलन शुरू किया था, जबकि आठ सितंबर से पीजी रेजिडेंट्स भी आंदोलन में शामिल हो गए। उनके मुताबिक अस्पताल में इमरजेंसी, आईसीयू और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में पीजी रेजिडेंट्स की अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग लंबे समय से लंबित है।
डॉ. चौहान ने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर स्वास्थ्य मंत्री सुरेश दनियाल समेत संबंधित अधिकारियों और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के समक्ष पिछले पांच-छह महीने से लगातार मांग रखी जा रही थी। इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाए जाने के बाद अब पीजी रेजिडेंट्स की मांग पर भी सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि आंदोलन के आठवें दिन भी बड़ी संख्या में जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर धरने पर बैठे हैं। PG रेजिडेंसी तीन वर्ष की होती है, जिसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के रेजिडेंट शामिल होते हैं। तृतीय वर्ष के कुछ रेजिडेंट परीक्षा के कारण धरनास्थल पर मौजूद नहीं हैं, लेकिन उन्होंने आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। वहीं, सीनियर रेजिडेंट भी मांग के समर्थन में आंदोलन में शामिल हैं।
डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि पीजी रेजिडेंट्स के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी कर इसे कम से कम पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के स्तर तक किया जाए। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें लिखित आश्वासन दिया जाए, ताकि उनकी मांग को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
डॉ. अखिल चौहान ने कहा कि डॉक्टर बारिश समेत तमाम परिस्थितियों के बावजूद अपनी मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। आंदोलन के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से जल्द वार्ता कर समस्या का समाधान करने की मांग की।




