नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग साफ हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के गठबंधन ने 202 पर बढ़त हासिल कर ली है और महागठबंधन को 35 सीटों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। वैसे तो अभी प्रत्याशियों के हार और जीत की घोषणा होनी बाकी है, लेकिन ये तय है कि अंतिम नतीजे लगभग इसी के आस-पास रहने वाले हैं।
बिहार में प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद अब देश के 21 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में भाजपा के गठबंधन वाली एनडीए की सरकार है। ये 2018 का ही रिकॉर्ड है, जिसे एनडीए ने दोहराया है। 2018 में भी एनडीए की 21 राज्यों में सरकार बनी थी। आजाद भारत में ये दूसरा मौका था, जब किसी गठबंधन के केंद्र के साथ-साथ इतने राज्यों में सरकार बनी हो।
पहले दिल्ली और अब बिहार, 2026 में भाजपा ने दो बड़ी जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। अब 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में एनडीए की सरकार है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर, नगालैंड शामिल हैं। बिहार में नीतीश कुमार के चेहरे को आगे कर एनडीए ने चुनाव लड़ा और नतीजा आपके सामने हैं। बिहार में बरसों से एक कहावत चलती है- ‘बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है।’ ये कहावत नीतीश कुमार के दो दशक के शासन के बावजूद आज भी चरितार्थ है। एग्जिट पोल के आंकड़ों में भी एनडीए को इतना विशाल जनमत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही थी। लेकिन सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए भाजपा लगभग 90 सीटों, जेडीयू 84, एलजेपी 19, एचएएम 5 और एरएलएम 4 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। अंतिम नतीजे आने तक आंकड़ों में 1-2 सीटों का फर्क दिख सकता है, लेकिन ये बात तय हो चुकी है कि बिहार की जनता ने मोदी और नीतीश की जोड़ी पर मुहर लगा दी है।
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2025 में दिल्ली और बिहार के चुनाव हुए, जिन्हें जीतकर एनडीए ने अपने खाते में जोड़ लिया है। अब अग्निपरीक्षा 2026 की है। 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है, जो लगभग डेढ़ दशक से सत्ता पर काबिज हैं। भाजपा यहां सेंध लगाने की हर संभव कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक उसे सफलता नहीं मिल पाई है।



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