Sunday, June 21, 2026
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पुण्यतिथि पर याद किये गए कालजयी लोक गायक जीत सिंह नेगी

नई दिल्ली, उत्तराखण्ड़ लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में 21 जून, 2026 को गढ़वाल भवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति के युगपुरुष स्वर्गीय जीत सिंह नेगी को उनकी 7वीं पुण्यतिथि पर नेगी जी के गीतों व संस्मरणों के माध्यम से लोगों ने उनको याद किया। ज्ञातव्य हो कि उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की शताब्दी वर्ष श्रृंखला समारोहों के अंतर्गत लगातार नेगी जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर कार्यक्रम आयोजन करता आ रहा है।
उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने बताया कि स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी हमारी लोक संस्कृति के वट वृक्ष हैं। श्री ध्यानी ने बताया कि हम स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत पूरे वर्ष नेगी जी के लोक संसार पर आयोजन होते रहेंगे तथा अगले वर्ष 2 फरबरी, 2027 को नेगी जी की 100 वीं जयंती पर विराट आयोजन होगा। श्री ध्यानी ने कहा कि कालजयी लोकगायक जीत सिंह नेगी जी ने अपनी गढ़वाली भाषा की सेवा को ही अपने जीवन का मकसद बना दिया था। इसलिए नेगी जी आजीवन अपनी भाषा व लोक संस्कृति के लिए काम करते रहे। स्वर्गीय नेगी जी का सपना था कि एक दिन गढ़वाली, कुमाउनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची शामिल जरूर होंगी। । नेगी जी का मानना था कि हमारी भाषा बचेगी तो हमारा लोक बचेगा। इसलिए भाषा को सम्मान व मान मिलना जरुरी है। श्री ध्यानी ने कहा कि उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली लगातार इस दिशा में काम कर रहा है।
ज्ञातव्य हो कि जीत सिंह नेगी का जन्म 2 फरवरी 1927 को पौड़ी गढ़वाल के पैडलस्युन के अयाल गांव में सुल्तान सिंह नेगी और रूपदेयी नेगी के घर हुआ था । और जीत सिंह नेगी जी का निधन 21 जून, 2020 को देहरादून में हुआ। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा कण्डारा ( पौड़ी ) के बेसिक स्कूल से पूरी की. उनके पिता चूँकी समय ब्रिटिश सेना में थे और वे म्यामार ( तब बर्मा ) में तैनात थे. पॉचवी तक की शिक्षा गॉव में ही ग्रहण करने के बाद उनके पिता उन्हें अपने साथ म्यामार ले गए और उन्होंने मिडिल तक की शिक्षा मेमियो ( म्यामार ) से पूरी की. उसके बाद उनके पिता का तबादला लाहौर हो गया और उन्होंने मैट्रिक की शिक्षा जुगल किशोर पब्लिक स्कूल, लाहौर से पूरी की. बाद में वे फिर इपने गॉव चले गए और जीत सिंह नेगी ने पौड़ी के गवरमेंट कॉलेज से इंटर मीडिएट पास किया।
स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी उस दौर में उत्तराखण्ड के ऐसे पहले लोक गायक थे, जिनका एलपी रिकार्ड ( ग्रामोफोन ) 1949 में बन गया था. उस समय ऐसे रिकार्ड हिन्दी गानों व फिल्म के गीतों के ही बनते थे. लोक संगीत में एलपी रिकार्ड बनना एक तरह से अनोखी घटना थी. इससे पता चलता है कि नेगी जी का गायन उस दौर में कितना उच्च कोटि का रहा होगा। जीत सिंह नेगी के इसमें 6 गीत शामिल किए गए थे। जीत सिंह नेगी अपने दौर के न केवल जाने-माने लोकगायक रहे, बल्कि उत्कृष्ट संगीतकार, निर्देशक और रंगकर्मी भी रहे। उन्होंने बम्बई में मूवी इंडिया की फिल्म ” खलीफा ” में 1949 में और मून आर्ट पिक्चर की फिल्म ” चौदहवीं रात ” में सहायक निर्देशन के तौर पर भी काम कार्य किया. नेशनल ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग कम्पनी में भी सहायक संगीत निर्देशक रहे ‘शाबासी मेरो मोती ढांगा…’ ‘रामी बौराणी…’ ‘मलेथा की गूल…’ जैसे कई उनके नाटक भी लोकप्रिय हुए।
‘तू होली उंचि डांड्यूं मा बीरा-घसियारी का भेष मां-खुद मा तेरी सड़क्यां-सड़क्यों रूणूं छौं परदेश मा…।’ तू होगी बीरा उंचे पहाड़ों पर घसियारी के भेष में और मैं यहाँ परदेश की सड़कों पर तेरी याद में भटक रहा हूं-रो रहा हूं। 1950 के दशक की शुरूआत में रेडियो से यह गीत प्रसारित हुआ तो उत्तराखंड से लेकर देश के महानगरों तक प्रवासी उत्तराखंडियों के बीच पलक झपकते ही बेहद लोकप्रिय भी हो गया।
उन्हें जितना लगाव गीत / संगीत से था, उतना ही लगाव अभिनय से भी था. इसी कारण उन्होंने कई नाटक भी लिखे और उनका निर्देशन व मंचन भी किया. जिनमें माधो सिंह भण्डारी के जीवन पर आधारित ” मलेथा की गूल “, भारी भूल राजू पोस्टमैन, रामी बौराणी, जीतू बगडवाल आदि प्रसिद्ध हैं. भारी भूल उनका पहला नाटक था. उनके गीतों के संग्रह की पुस्तकों में गीत गंगा, जौंल मंगरी, छम घुंघरू बाजला शामिल हैं. उनका एक खुदेड़ गीत ” हे दर्जी दिदा मेरा अंगणी बणें द्या ” बहुत ही लोकप्रिय हुआ।
इस आयोजन में उत्तराखण्ड के कई साहित्यकार, गीतकार और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने शिरकत की। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी की बेटी श्रीमती मधु नेगी,मंजू नेगी नेगी जी की पोती रितिका ने भी नेगी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किये। सुप्रसिद्ध संगीतकार राजेन्द्र चौहान, महावीर सिंह राणा, कोटद्वार से भारती चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डाक्टर कमलेश कुमार, नेगी जी की दोनों सुपुत्री श्रीमती मधु नेगी, मंजू नेगी, , कवि उमेश बन्दूणी ने अपने संस्मरण सुनाये। कवियों और गीतकारों ने स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी के गीत और उनपर अपने लिखे ओर से कविता/गीत और संस्मरण सुनाये। कार्यक्रम का संचालन दिनेश ध्यानी ने किया।

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