मंत्री भरत सिंह चौधरी ने एनडीआरआई (NDRI) करनाल का किया दौरा, डेयरी क्षेत्र में नई संभावनाओं पर चर्चा
ग्रामीण विकास एवं MSME मंत्री भरत सिंह चौधरी द्वारा आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल का भ्रमण
देहरादून/करनाल(हरियाणा) ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी ने आज आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल (हरियाणा) का दौरा किया। संस्थान के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा उनका स्वागत किया गया, जहाँ उन्हें संस्थान की शोध गतिविधियों तथा डेयरी क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
माननीय मंत्री ने संस्थान के पशुधन अनुसंधान केंद्र (LRC), पशु जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र (ABRC) एवं मॉडल डेयरी प्लांट का सघन भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों एवं विभागाध्यक्षों के साथ संवाद करते हुए डेयरी क्षेत्र की स्थिरता एवं उन्नयन हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना की। विशेष रूप से उन्होंने क्लोनिंग, ओवम-पिक अप एवं CRISPR जीन एडिटिंग जैसी उन्नत सहायक प्रजनन तकनीकों में एनडीआरआई की वैश्विक उपलब्धियों की प्रशंसा की।
मंत्री महोदय को संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न रैपिड डायग्नोस्टिक किट्स का प्रदर्शन भी कराया गया, जिनमें दूध में मिलावट की पहचान, सूक्ष्मजीवविज्ञानी एवं अवशेष विश्लेषण, तथा पशुओं में हीट एवं गर्भावस्था की सटीक पहचान करने वाली किट्स शामिल थीं।
श्री भरत सिंह चौधरी ने इच्छा व्यक्त की कि आईसीएआर-एनडीआरआई को उत्तराखंड के ग्रामीण विकास एवं डेयरी कार्यक्रमों से सक्रिय रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने संस्थान से अनुरोध किया कि विकसित वैज्ञानिक ज्ञान एवं तकनीकी विशेषज्ञता को राज्य के किसानों, उद्यमियों तथा विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं तक पहुँचाया जाए, जिससे उनके कौशल विकास एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सके।
काबीना मंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए डेयरी शिक्षा, प्रशिक्षण एवं ग्रामीण आधारभूत ढाँचे के सुदृढ़ीकरण हेतु ठोस प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एनडीआरआई एवं राज्य सरकार के बीच प्रभावी तकनीकी सहयोग स्थापित करने पर बल दिया, ताकि संस्थान की विशेषज्ञता का सीधा लाभ पशुपालकों एवं युवाओं तक पहुँच सके।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह, संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. आशीष कुमार, सह निदेशक (अनुसंधान) डॉ. राजन शर्मा सहित वैज्ञानिक, विभागाध्यक्ष एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।



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