Monday, June 1, 2026
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विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’ के कपाट खुले, पहले ही दिन रवाना हुआ पर्यटकों का दल

जोशीमठ (चमोली): विश्व प्रसिद्ध और यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल ‘फूलों की घाटी’ (वैली ऑफ फ्लावर्स) के कपाट सोमवार को पारंपरिक विधि-विधान और विशेष पूजा-अर्चना के साथ देश-विदेश के पर्यटकों के लिए खोल दिए गए हैं। कपाट खुलते ही प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का पहला दल घाटी के दीदार के लिए रवाना हो गया, जिससे समूचे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

सोमवार सुबह वन विभाग और राष्ट्रीय पार्क प्रशासन के आला अधिकारियों की उपस्थिति में मुख्य द्वार पर वैदिक मंत्रोचार के साथ द्वार पूजन संपन्न हुआ। फूलों की घाटी रेंज की रेंजर चेतना कांडपाल ने बताया कि इस वर्ष भी देश-विदेश से रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों की सुगम आवाजाही, सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पार्क प्रशासन द्वारा ट्रैक रूट की मरम्मत सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली गई थीं।

हिमालय की गोद में, समुद्र तल से लगभग 10,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर बसी यह घाटी अपनी अत्यंत दुर्लभ वनस्पतियों, औषधीय पौधों और रंग-बिरंगे फूलों के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। हालांकि कपाट सोमवार से खुल गए हैं, लेकिन जुलाई और अगस्त के महीनों के दौरान यह घाटी अपने पूरे शबाब (सौंदर्य) पर होती है। इस अवधि में यहां 500 से अधिक प्रजातियों के फूल खिलते हैं, जो पूरी घाटी को एक प्राकृतिक और सतरंगी कालीन के रूप में तब्दील कर देते हैं।

चूंकि यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील इको-जोन में आता है, इसलिए पार्क प्रशासन ने घाटी की यात्रा पर आने वाले पर्यटकों से पर्यावरण संरक्षण के नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है। पर्यटकों से आग्रह किया गया है कि वे घाटी की जैव विविधता को नुकसान न पहुंचाएं और कूड़ा-कचरा (विशेषकर प्लास्टिक) केवल निर्धारित स्थानों पर ही डालें।

स्थानीय रोजगार और पर्यटन को मिलेगी गति

कपाट खुलने के साथ ही सीमांत जिले चमोली और जोशीमठ क्षेत्र में पर्यटन और तीर्थाटन से जुड़ी गतिविधियों को भारी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय होटल व्यवसायियों, गाइडों और डंडी-कंडी संचालकों के चेहरे भी पर्यटकों की आमद से खिल उठे हैं।

इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि, वन्यजीव विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में देश के कोने- कोने से पहुंचे ट्रैकर और प्रकृति प्रेमी मौजूद रहे।

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