Thursday, June 4, 2026
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गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी ने किया दो दिवसीय अखिल भारतीय संगोष्ठी का आयोजन

नई दिल्ली, गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी द्वारा 7 एवं 8 सितम्बर को संस्कृत अकादमी सभागार में दो दिवसीय अखिल भारतीय गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी भाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में दिल्ली, एनसीआर समेत उत्तराखण्ड से भी कई साहित्यकारों, भाषाविदों ने शिरकत की।
इस आयोजन में उत्तराखंड भाषा, साहित्य एवं संस्कृति, कुमाऊंनी भाषा एवं उसका साहित्य, गढ़वाली भाषा एवं उसका साहित्य जौनसारी भाषा एवं उसका साहित्य चर्चा की गयी। वहीं आँचलिक भाषाओं में गीत-ग़ज़ल, गद्य लेखन, आँचलिक भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन में फिल्म और रंगमंच का योगदान, आँचलिक भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन में सोशल मीडिया का प्रभाव, आँचलिक भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन में आर्टिफिशल इंटेलीजेंट का प्रयोग सहित कई विषयों पर विद्वान साहित्यकारों/भाषाविदों ने चर्चा की व अपने व्याख्यान दिए।
गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी, दिल्ली सरकार के सचिव संजय गर्ग ने सभी साहित्यकारों का स्वागत किया और कहा कि अकादमी हमेशा गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी भाषाओं के विकास के लिए कार्य करने को तैयार है। भविष्य में भी अकादमी के माध्यम से और अच्छे और सकारात्मक कार्य होंगे।
सुप्रसिद्ध समाजसेवी, उद्यमी व उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संरक्षक डॉ. विनोद बछेती ने आपके वक्तव्य में कहा कि गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी बहुत अच्छे आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से हमारी भाषाओं को राष्ट्रीय फलक पर स्वीकार्यता और पहचान मिलेगी।
गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय भाषा कार्यशाला में बरिष्ठ साहित्यकार सर्वश्री ललित केशवान, पूरन चन्द्र कांडपाल, रमेश घिल्डियाल, लोकेश नवानी, गिरीश विष्ट हंसमुख, दीनदयाल बंदूणी, दिनेश ध्यानी, चन्दन प्रेमी, रमाकांत बेंजवाल, श्रीमती बीना बेंजवाल, मदन मोहन डुकलाण, डॉ. नंदकिशोर हटवाल, मोहन चंद्र जोशी, डॉ. जगदम्बा कोटनाला, डॉ. हेमा उनियाल, शांति प्रकाश जिज्ञासु, डा. हयात सिंह रावत, डॉ. सरस्वती कोहली, पृथ्वीसिंह केदारखण्डी, रमेश हितैषी, डॉ. मनोज उप्रेती, जगमोहन सिंह जगमोरा, ओमप्रकाश आर्य, राघव शर्मा, पायश पोखड़ा, दर्शन सिंह रावत, जयपाल सिंह रावत, प्रदीप रावत खुदेड़, श्रीमती निर्मला नेगी, आशीष सुन्द्रियाल, खजान दत्त शर्मा, सुश्री मञ्जूषा जोशी, रोशन लाल सहित कई सहितयकारों/भाषाविदों ने शिरकत की। दो दिवसीय इस भाषा सम्मलेन में भाषा के सभी पक्षों, भाव, लेखन, कविता, नवलेखन समेत सभी पक्षों को छूने का प्रयास किया गया।
इस दो दिवसीय संगोष्ठी के समन्वयक/सूत्रधार, उत्तराखण्ड लोक- भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने सदन में चार प्रस्ताव रखे जिनको ध्वनिमत से स्वीकार किया गया।
कुल मिलाकर गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय संगोष्ठी में भाषाई सरकारों पर गंभीर चर्चा व विचार विमर्श हुआ। गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी अकादमी ने इस आयोजन को सम्पन करने हेतु हर संभव प्रयास किया जिसके कारण यह दो दिवसीय आयोजन स्मरणीय और अपने आप में एक अलग छाप छोड़ने में सफल रहा।
कार्यक्रम का समन्वय व संचालन उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने किया। वहीं सहयोग सत्रों का संचालन शांति प्रकाश जिज्ञासु, रमेश हितैषी, श्री आशीष सुंदरियाल, डॉ. पृथ्वी सिंह केदारखण्डी आदि ने किया।

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