Thursday, August 13, 2026
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अमानत में खयानत :  बैंक कर्मचारी ने ग्राहकों को लगा दी लाखों  की चपत

देहरादून(आरएनएस)। आईसीआईसीआई बैंक की जाखन शाखा में अमानत में खयानत का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां तैनात एक बैंक कर्मचारी ने म्यूच्यूअल फंड और मुनाफा देने वाली स्कीमों का लालच देकर करीब 31 लाख 17 हजार रुपये डकार लिए। बैंक प्रबंधन की आंतरिक जांच में पोल खुलने के बाद अब राजपुर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मंगलवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस को दी गई तहरीर में बैंक के रिजनल मैनेजर रितेश श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी कर्मचारी राजेश रंजन निवासी डांडा नूरीवाला बैंक में आने वाले ग्राहकों को टारगेट करता था। वह उन्हें भरोसा दिलाता था कि उसकी बताई स्कीम में निवेश करने पर उन्हें मोटा रिटर्न मिलेगा। ग्राहक बैंक कर्मचारी समझकर उस पर भरोसा कर लेते थे। राजेश वह पैसा उनके हित में निवेश करने के बजाय चालाकी से अपने खाते में ट्रांसफर कर लेता था। इस फर्जीवाड़े की परतें तब खुलीं जब 15 जुलाई 2025 को गीता पासवान नाम की एक ग्राहक बैंक पहुंचीं। उन्होंने शिकायत की कि उनके खाते से धोखे से चार लाख रुपये निकाल लिए गए हैं। इसके कुछ दिन बाद ही एक और ग्राहक अजीत ताक ने तीन लाख रुपये निकाले जाने की शिकायत दर्ज कराई। जब बैंक ने आंतरिक जांच बैठाई तो पता चला कि राजेश रंजन ने कुल आठ ग्राहकों को चूना लगाया है। इंस्पेक्टर राजपुर प्रदीप सिंह रावत ने बताया कि शिकायत पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। दोस्त के खाते और फोन पे का खेल जांच में सामने आया कि राजेश शातिर तरीके से काम करता था। उसने गीता पासवान के पैसे आरटीजीएस के जरिए अपने दोस्त प्रांशु के खाते में भेजे और फिर वहां से अपने एसबीआई खाते में मंगवा लिए। कई ग्राहकों के चेक के जरिए कैश निकालकर अपने खाते में जमा कर लिए। हद तो तब हो गई जब उसने एक ग्राहक गुरु प्रसाद के प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट कार्ड से फोन पे रेंटल के नाम पर करीब सवा तीन लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए। अगस्त में भी की थी शिकायत, अब केस दर्ज बैंक प्रबंधन को मुकदमा दर्ज कराने के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। क्षेत्रीय प्रबंधक रितेश श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया कि इस मामले में उनके पूर्वाधिकारी वैभव गोयल ने बीते सात अगस्त को ही पुलिस को प्रार्थना पत्र दे दिया था। उस वक्त बैंक ने धोखाधड़ी की सारी जानकारी साझा की थी। तब पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। महीनों तक यह मामला लटका रहा। अब दोबारा नई तहरीर देने और गुहार लगाने के बाद करीब चार महीने की देरी से 30 दिसंबर को राजपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।

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