Thursday, August 13, 2026
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अंकिता वीआईपी की जांच के लिए करेंगे सीएम आवास कूच

‘अंकिता के कमरे को बुलडोजर से ढहाने के मामले को भी बनाया जाएगा मुद्दा’

देहरादून (एल मोहन लखेड़ा) , विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों से आम नागरिकों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में 4 जनवरी के मुख्यमंत्री आवास कूच में शामिल होने की अपील की है। प्रेस क्लब में बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी करने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी।
उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पंत ने कहा कि नये आरोपों के बाद अब इस मामले की फिर से जांच करने की जरूरत है। यह स्पष्ट हो चुका है कि सरकार ने पहले भी अंकिता के वीआईपी को बचाने का प्रयास किया और अब दो लोगों के नाम कथित रूप से वीआईपी के रूप में सामने आने के बाद भी सरकार इस मामले में टाल-मटोल कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास कूच के जरिये वीआईपी का नाम उजागर करने, बुलडोजर से अंकिता का कमरा ढहाने वालों पर कार्रवाई की मांग मुख्य रूप से की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाने वाली उर्मिला सनावर की सुरक्षा की भी सरकार से मांग की।
उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा ने कहा कि जो ऑडियो सामने आये हैं, वे गंभीर हैं। इसके बावजूद सरकार मामले की जांच नहीं कर रही है। आम लोगों से सबूत लाने के लिए कहा जा रहा है, जबकि जांच एजेंसियां सरकार के पास हैं, उसे जांच करवाकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन समुदाय, जाति, धर्म, क्षेत्र से ऊपर उठकर इंसानियत के लिए किया जा रहा है। मूल निवास भूकानून संघर्ष समिति के मोहित डिमरी ने कहा कि 4 जनवरी के मार्च के बाद भी सरकार आम लोगों की मांग नहीं मानती तो आगे पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इसमें राज्यभर में बंद और चक्काजाम जैसे प्रदर्शन शामिल हैं।
सीपीआई माले के इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि निचली कोर्ट के फैसले में बार-बार वीआईपी की बात कही गई है। लेकिन उस वीआईपी को जांच के दायरे से अलग क्यों रखा गया, यह बात लोगों के गले कभी नहीं उतरी। यही वजह है कि एक पूर्व बीजेपी विधायक का कथित ऑडियो सामने आने के बाद लोग फिर से सड़कों पर उतर गये हैं। उन्होंने कहा कि कानून में यह व्यवस्था है कि किसी मामले में नये तथ्य सामने आने के बाद नये सिरे से जांच की जा सकती है। इसलिए सरकार को तुरंत वीआईपी के रूप में जिन लोगों का नाम सामने आया है, उनकी जांच करनी चाहिए।
पत्रकार वार्ता में गढ़वाल सभा के अध्यक्षर रोशन धस्माना, उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, यूकेडी की प्रमिला रावत, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के कर्नल कैलाश धस्माना, मूल निवास भूकानून संघर्ष समिति की ऊषा डोभाल, जन विज्ञान समिति की डॉ. उमा भट्ट, सुलोचना ईष्टवाल, इप्टा के हरिओम पाली भी मौजूद थे।

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