नौ देशी आमों की किस्मों, पारंपरिक व्यंजनों और भारतीय खाद्य विरासत का अनूठा संगम; डॉ. वंदना शिवा ने कहा— देशी किस्मों का संरक्षण ही भविष्य की खाद्य सुरक्षा की कुंजी
देहरादून। जैव विविधता संरक्षण के लिए समर्पित नवदान्य में रविवार को आम विविधता महोत्सव (Mango Diversity Festival) का आयोजन किया गया। महोत्सव में देशी आमों की नौ पारंपरिक किस्मों, उनसे तैयार विविध व्यंजनों तथा भारतीय खाद्य संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। लगभग 80 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर विभिन्न देशी आमों का स्वाद चखा, आम से बने पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया और जैव विविधता संरक्षण के संदेश से जुड़ने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. वंदना शिवा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर नवदान्य बोर्ड सदस्य डॉ. मीरा शिवा, श्रीमती माया गोबर्धन तथा अन्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती भावना ने किया।
उद्घाटन अवसर पर डॉ. वंदना शिवा ने कहा, “आम केवल फलों का राजा नहीं, बल्कि भारत की जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत और खाद्य संप्रभुता का जीवंत प्रतीक है। देशी आम की प्रत्येक किस्म अपने भीतर सदियों का स्थानीय ज्ञान, विशिष्ट स्वाद और पोषण समेटे हुए है। जब हम देशी किस्मों का संरक्षण करते हैं, तो हम केवल पेड़ों या फलों को नहीं बचाते, बल्कि किसानों की आजीविका, पोषण सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी सुरक्षित करते हैं।”
उन्होंने कहा कि नवदान्य विभिन्न फसलों की सैकड़ों देशी प्रजातियों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत नवदान्य फार्म में आम की नौ देशी किस्मों का संरक्षण किया गया है। महोत्सव में प्रतिभागियों ने चौसा, दशहरी, फजली, लंगड़ा, कलमी, गुलाब जामुन, लाल परी, तोतापुरी तथा अन्य स्थानीय किस्मों के आमों का स्वाद लिया और उनकी विशिष्टता को जाना।
महोत्सव में आम से तैयार पारंपरिक व्यंजनों की समृद्ध श्रृंखला भी प्रस्तुत की गई। इनमें आम पन्ना, मैंगो जूस, आम पापड़, कच्ची कैरी चाट, पापड़ी चाट, मैंगो फ्लेवर्ड राइस, खट्टा-मीठा कद्दू, अमचूर वाले छोले, गुडांबा, आम की चटनी, आम का अचार, सूखा अचार, मुरब्बा, आम रायता, आम-खीरा सलाद, आमरस, श्रीखंड तथा मैंगो हलवा प्रमुख आकर्षण रहे।
महोत्सव के दौरान प्रतिभागियों ने नवदान्य फार्म में संरक्षित विभिन्न देशी किस्मों के आमों की खरीदारी भी की। साथ ही, जैव विविधता, बीज संरक्षण, प्राकृतिक खेती, खाद्य संप्रभुता एवं पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नवदान्य के प्रकाशनों और साहित्य में भी लोगों ने विशेष रुचि दिखाई तथा उनकी अच्छी बिक्री हुई।
आयोजन का उद्देश्य केवल आम के स्वाद का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि देशी फलों की विविधता, पारंपरिक खाद्य संस्कृति और जैव विविधता संरक्षण के महत्व को समाज तक पहुँचाना था। महोत्सव ने स्वाद, स्वास्थ्य, प्रकृति और भारतीय कृषि विरासत के संरक्षण का प्रभावी संदेश देते हुए प्रतिभागियों को प्रकृति और पारंपरिक खाद्य संस्कृति से जोड़ने का प्रेरक प्रयास किया।


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