अंकिता हत्याकांड में पूर्ण न्याय की मांग को लेकर महापंचायत, कथित वीआईपी कौन, धामी सरकार को घेरा

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कांग्रेस, सीपीआई समेत 40 संगठन एक साथ, परेड ग्राउंड में भारी फोर्स तैनात

देहरादून, उत्तराखंड़ का बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में पूर्ण न्याय की मांग को लेकर आज देहरादून के परेड ग्राउंड में एक बड़ी महापंचायत का आयोजन किया गया। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर आयोजित इस महापंचायत में विभिन्न संगठनों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की भारी भीड़ जुट गई। लोगों ने एकजुट होकर हत्याकांड में शामिल कथित वीआईपी के खिलाफ तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
इस यहापंचायत को लेकर संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्यों और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि सीबीआई जांच के बावजूद मामले में अभी भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मुख्य दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन हत्याकांड के पीछे कथित तौर पर शामिल उच्च स्तरीय प्रभावशाली व्यक्ति वीआईपी अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। वक्ताओं ने कहा कि वीआईपी की भूमिका की गहन जांच हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, जिसमें फांसी की सजा भी शामिल है।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर हो रही इस महापंचायत में कांग्रेस, सीपीआई समेत 40 से अधिक सामाजिक, कर्मचारी और जनसंगठनों की भागीदारी सामने आ रही है।
महापंचायत में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पुलिस ने परेड ग्राउंड और आसपास के इलाकों में भारी बल तैनात किया, जिसमें प्रमुख चौकों पर बैरिकेडिंग भी की गई। आंदोलनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और घोषणा की कि न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
महापंचायत प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुँचे लोगों और आयोजकों का कहना है कि सीबीआई जांच के बाद भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं, इसलिए आंदोलन जारी है।
कार्यक्रम स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात है। कनक चौक और सर्वे चौक से आने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस अतिरिक्त फोर्स रिजर्व में रखे हुए है और पूरे इलाके पर नजर बनाए हुए है।
महापंचायत के मंच पर पंच के रूप में बसंती पाठक (सदस्य, उत्तराखंड महिला मंच), हीरा जंग पांगी (अध्यक्ष, महिला किसान अधिकार मंच), रेशमा पवार (सदस्य, जस्टिस फॉर अंकिता कमेटी), डॉ. उमा भट्ट (सदस्य, भारत ज्ञान विज्ञान समिति) और ऊषा भट्ट (राज्य आंदोलनकारी) मौजूद हैं।
महापंचायत में लोग ‘धामी सरकार शर्म करो’ और ‘अंकिता को न्याय दो’ के पोस्टर पकड़े और मंच से विभिन्न संगठनों के लोग लोकगीत के माध्यम से सरकार को वीआईपी कौन के बारे में प्रश्न पूछ रहे हैं, वहीं महापंचायत को देखते हुए कनक-सर्वे चौक पर बैरिकेडिंग की गयी और परेड ग्राउंड के आसपास भारी संख्या में पुलिस तैनात की गई है।
मंच की संरक्षक कमला पंत सहित अन्य वक्ताओं ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है। उन्होंने आगे की रणनीति पर चर्चा करते हुए कहा कि महापंचायत के बाद नए आंदोलन के कार्यक्रम तय किए जाएंगे।
महापंचायत में पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डा. सत्य नारायण सचान ने कहा मुख्यमंत्री धामी अंकिता मामले की सीबीआई जांच पर्यावरणविद् की एफआईआर को आधार बनाकर करवा रहे हैं, जबकि सीबीआई जांच उस व्यक्ति की तहरीर पर नहीं बल्कि अंकित के माता-पिता की तहरीर के आधार पर होनी चाहिए और यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए उन्होंने कहा जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाये, उनको भी सीबीआई जांच की परिधि में लाया जाए।
सचान ने कहा जिन्होंने वसंत विहार थाने में अंकिता केस में तहरीर दी है, उनका कोई संबंध अंकिता के परिवार से नहीं है, और ना ही वह किसी आंदोलन में नजर आए। इसलिए उनकी भी जांच होनी चाहिए, उनके मोबाइल की भी जांच की जानी चाहिए कि उनकी इस संबंध में किससे बातें हुई है।
इस महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि सीबीआई जांच अंकिता भंडारी के माता-पिता की तरफ से दी गई तहरीर के आधार पर की जानी चाहिए, अंकिता हत्याकांड में सजायाफ्ता लोगों के केस के तहत अग्रिम जांच होनी चाहिए अंकिता के मर्डर का क्या मोटिव रहा, यह बिल्कुल सामने नहीं आया है, उस संदर्भ में वीआईपी का साफ तौर पर जिक्र है ।अंकिता भंडारी हत्याकांड पर देहरादून में 'महापंचायत', रखी गईं 5 मांग, माता-पिता भी हुए शामिल | Ankita Bhandari murder case Mahapanchayat held in Dehradun five demands

 

महापंचायत में पांच प्रस्तावों को किया गया पारित

देहरादून, ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के बैनर के तले की गई महापंचायत में अंकिता के माता और पिता भी शामिल हुये, महापंचायत में पांच प्रस्तावों को पारित किया गया है, इसके साथ ही महापंचायत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच को लेकर पत्र भी भेजा गया है l

महापंचायत में रखे गए पांच प्रस्‍ताव :
+अंकिता के माता-पिता, सोनी देवी और वीरेंद्र सिंह भंडारी द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गये पत्र को सीबीआई जांच के लिए शिकायती पत्र माना जाए और उसी के आधार पर सीबीआई जांच, उच्चतम न्यायालय की निगरानी में करवाई जाए l
+अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच, मामले से पूरी तरह असंबद्ध व्यक्ति अनिल प्रकाश जोशी की एफआईआर पर कराए जाने के फैसले को पूरी तरह खारिज करती है. अंकिता हत्याकांड से संबंधित पूर्व में लक्ष्मण झूला ऋषिकेश थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 01/2022 के तहत ही आरोपित वीआईपी और सबूत मिटाने वालों को केंद्र में रख कर ही आगे की जांच करवाई जाए l
+अंकिता हत्याकांड के बाद रातों-रात बुलडोजर द्वारा वनन्तरा रिज़ॉर्ट के बड़े हिस्से को ध्वस्त करके साक्ष्यों को नष्ट किया गया, जिसकी अनुमति मुख्यमंत्री द्वारा दी गई थी. इसको देखते हुए इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच जब तक पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना नैतिक एवं क़ानूनी रूप से उचित नहीं है, पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए, इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में बाधा बनी रहेगी, इसलिए जब तक जांच कार्यवाही पूरी हो या न्यायालय का निर्णय नहीं आ जाए, तब तक मुख्यमंत्री को स्वयं पद से हट जाना चाहिए l
+भाजपा के दो पदाधिकारियों दुष्यंत कुमार गौतम और अजय कुमार का नाम, क्योंकि भाजपा से ही जुड़े लोगों ने वीआईपी के तौर पर लिया है, इसलिए यह महापंचायत मांग करती है कि इन दोनों को तत्काल जांच के दायरे में लाया जाये और भाजपा के द्वारा इन दोनों को तत्काल इनके पदों से हटाया जाये और इन्हें जांच में सहयोग करने के लिए निर्देशित करे l
+यह महा पंचायत यह चेतावनी देती है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर इस हत्याकांड में शामिल वीआईपी के खुलासे की, जो सीबीआई जांच अनिल जोशी की एफआईआर पर शुरू की जा रही है, उसको दरकिनार करते हुए सीबीआई जांच को पीड़ित पक्ष द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर ही आगे नहीं बढ़ाया जाता है, तो उत्तराखण्ड की समस्त जनता सम्पूर्ण उत्तराखंड़ में एक व्यापक शांतिपूर्ण जनांदोलन के लिए बाध्य होगी l