Saturday, April 25, 2026
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करिगरी में स्वाद का उत्सव: शेफ हरपाल के साथ दून में सजी स्वाद की महफिल

  • करिगरी रेस्टोरेंट में लाइव क्यूलिनरी मास्टरक्लास का आयोजन।

  • क्षेत्रीय स्वाद और यादों का संगम:‘नमक-शमक’ फेम शेफ हरपाल ने दूनवासियों को सिखाए कुकिंग के गुर, मास्टरक्लास में उमड़े फूड लवर्स

देहरादून,  राजधानी देहरादून में रविवार को एक यादगार क्यूलिनरी शाम का आयोजन हुआ। मशहूर शेफ और टेलीविजन पर्सनैलिटी शेफ हरपाल सिंह सोखी ने ‘करिगरी’ में एक लाइव मास्टरक्लास के जरिए फूड लवर्स को भारतीय स्वादों की गहराई से रूबरू कराया। कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों और विशेष अतिथियों ने शिरकत की, जहां भोजन सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि कहानियों का जरिया बना। जिन्होंने भारतीय स्वाद, यादों और स्ट्रीट फूड संस्कृति से जुड़ा एक गहरा अनुभव साझा किया। यह मास्टरक्लास एक लाइव और इंटरैक्टिव सत्र के रूप में डिज़ाइन की गई थी, जिसमें शेफ हरपाल ने चुने हुए प्रतिभागियों के साथ मिलकर खाना बनाया। इस दौरान उन्होंने हर डिश के पीछे की कहानियाँ साझा की और पारंपरिक स्वादों को आधुनिक प्रस्तुति के साथ संतुलित करने की तकनीकें भी बताई। यह मेनू भारत भर में उनकी निजी भोजन यात्रा को दर्शाता है बनारस के दीनानाथ महाराज से प्रेरित दीनानाथ की टमाटर चाट, जो वाराणसी के घाटों के कालातीत स्वादों को समेटे हुए है, से लेकर क्लचे-छोले पकौड़े पॉकेट्स, जो उनके बचपन की उन यादों से निकले हैं जब वे अपने पिता के साथ लुधियाना की गलियों में स्ट्रीट फूड का आनंद लिया करते थे। यह यात्रा आगे बढ़ती है जलेबी वाफ़ल्स के साथ भारत की सड़कों के कारीगरों को सम्मान देते हुए, पारंपरिक मिठाई को नई पीढ़ी के लिए एक आधुनिक, गॉरमेट अंदाज़ में पेश किया गया है।

मेहमानों के लिए एक विशेष रूप से तैयार किया गया बुफे भी रखा गया, जिसमें करिगरों की दाल मखनी, कढ़ाही पनीर पालक मेथी, सब्ज़ बिरयानी, इंडियन ब्रेड्स और मिर्चा वाला हलवा जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ शामिल थीं। पेय पदार्थों में क्षेत्रीय भारतीय ड्रिंक्स को प्रमुखता दी गई, खासतौर पर बेला चमेली शरबत, जो बीकानेर के छोटे कारीगरों और पारंपरिक दुकानों की विरासत को सम्मान देता है।

मास्टरक्लास के बारे में बात करते हुए शेफ हरपाल सिंह सोखी ने कहा, “”मेरे लिए खाना सिर्फ रेसिपीज़ तक सीमित नहीं है, यह लोगों, जगहों और यादों से जुड़ा होता है। देहरादून में हुई यह मास्टरक्लास उन्हीं कहानियों को थाली तक लाने की कोशिश थी बनारस से पंजाब तक की यात्रा, देर्शकों के साथ मिलकर खाना बनाना, भारत के कारीगरों और उनकी कारीगरी को अपनी रसोइयों में सम्मान देना, और हमारी क्षेत्रीय व्यंजनों का उत्सव मनाना। जब लोग साथ मिलकर खाना बनाते हैं, तब भोजन एक उत्सव बन जाता है।”

यह शाम पारंपरिक स्वागत के साथ शुरू हुई, जिसके बाद ढोल के साथ शेफ हरपाल की भव्य एंट्री हुई। कार्यक्रम में दर्शकों की भागीदारी के साथ लाइव कैकिंग सेशंस और एक विस्तृत मीट-एंड-ग्रीट सेशन भी शामिल था। मेहमानों ने भोजन को उसी रूप में अनुभव किया, जैसा उसका असली आनंद होता है ताज़ा बना हुआ और साथ बैठकर साझा किया गया।

देहरादून मास्टरक्लास ने एक बार फिर शेफ हरपाल सिंह सोखी के उस विश्वास को मज़बूत किया, जिसमें वे भारतीय पाक विरासत को संरक्षित करते हुए उसे नए दौर और नई पीढ़ी से जोड़ने पर जोर देते हैं। कार्यक्रम का समापन स्वाद, सीख और गर्मजोशी से भरी यादों के साथ हुआ।

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