Friday, August 28, 2026
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एसआईआर के दौरान मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने की साजिश, मुख्य निर्वाचन अधिकारी से हस्तक्षेप की मांग : धस्माना

देहरादून, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने आज उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हो रही गंभीर अनियमितताओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
धस्माना ने बताया कि देहरादून के टर्नर रोड निवासी मोहम्मद अलीम और उनकी पत्नी खशीन फारूकी, जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में भी है और जो विभाजन-पूर्व से देहरादून में बसे प्रतिष्ठित परिवारों से हैं, के आवेदन बार-बार खारिज किए जा रहे हैं। श्री अलीम हिमालयन वेलनेस के डॉ. एस. फारूक के चचेरे भाई हैं और श्रीमती फारूकी प्रसिद्ध हकीम रफत हुसैन फारूकी जी की पोती हैं, जो विभाजन-पूर्व से देहरादून के वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे हैं। वे केवल C-26 से C-24 लेन में उसी विधानसभा क्षेत्र के भीतर शिफ्ट हुए हैं।
धस्माना ने कहा कि यह मामला अकेला नहीं है। एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार ऊधमसिंह नगर जिले की 5 विधानसभाओं -किच्छा, गदरपुर, खटीमा, नानकमत्ता और रुद्रपुर में सिर्फ 5 व्यक्तियों ने लगभग 6,500 फॉर्म-7 (नाम काटने की आपत्तियां) दाखिल की हैं और रिपोर्ट के अनुसार इन सभी का निशाना मुस्लिम मतदाता हैं।

आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
– किच्छा में 4,857 में से 4,855 आपत्तियां एक ही व्यक्ति राजेश तिवारी (भाजपा BLA) द्वारा।
– गदरपुर में 670 आपत्तियां एक व्यक्ति द्वारा, जो कुल का 49% है।
– खटीमा में 394 में से 392 आपत्तियां अमित कुमार पांडे द्वारा।
– नानकमत्ता में 391 में से 353 आपत्तियां किशोर जोशी द्वारा।
– रुद्रपुर में 230 आपत्तियां सनी पासवान द्वारा। रिपोर्ट के अनुसार ये सभी भाजपा से जुड़े हैं।

श्री धस्माना ने मांग की है कि :
1. मोहम्मद अलीम दंपति के मामले की नए सिरे से पारदर्शी जांच हो।
2. 5 विधानसभाओं में थोक में दाखिल 6,500 आपत्तियों की स्वतंत्र समीक्षा हो।
3. बिना BLO की फील्ड जांच, बिना दस्तावेजी सबूत और बिना मतदाता को नोटिस व सुनवाई का मौका दिए कोई नाम न काटा जाए।
4. यह जांच की जाए कि क्या मुस्लिम मतदाताओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और SIR को गैर-पक्षपातपूर्ण व धर्म-निरपेक्ष बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है और किसी भी पात्र नागरिक को मताधिकार से वंचित करना असंवैधानिक है।

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