Saturday, April 25, 2026
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हरिद्वार में वेटलैंड्स पर अतिक्रमण से बढ़ रहा जलभराव का खतरा, प्रोफेसर दिनेश भट्ट ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग

विश्व आर्द्रभूमि दिवस : 2 प्रो.भट्ट

हरिद्वार (कुलभूषण ) अंतर्राष्ट्रीय पक्षी एवं पर्यावरण वैज्ञानिक व गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर व कुल सचिव ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है की जिला प्रशासन को प्रतिवर्ष 2 फरवरी को विश्व वेटलैंड डे मनाना चाहिए क्योंकि हरिद्वार के कई वेटलैंड्स पर लोगों ने अतिक्रमण कर दिया है l उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि गोविंदपुरी कॉलोनी के बाहर गंगा नहर तट के पास स्थित आद्र भूमि पर कई तरह के अतिक्रमण हो चुके हैं जिनकी फोटो संलग्न की जा रही है यह अतिक्रमण वेटलैंड अधिनियम के विरुद्ध है अतः इस प्रकार के अतिक्रमण को शीघ्र हटाया जाना चाहिए ताकि बरसात और किसी भी वर्षा के दिन हरिद्वार और गोविंदपुरी कॉलोनी व रानीपुर मोड़ में जल भराव हो जाता है उससे निजात पाया जा सके l

यह वैज्ञानिक तथ्य है कि वेटलैंड यानी आद्रभूमि ब्लाटिंग पेपर का कार्य करती है जो वर्षा जल को सोखने का कार्य करती है l दुर्भाग्य से इस पूरे वेटलैंड पर अवैध रूप से अतिक्रमण हो चुका है l इसी तरह से हरिद्वार के अन्य क्षेत्रों में भी जहां वेटलैंड थे या दलदली भूमि थी उन पर अतिक्रमण हो चुका है l

डॉक्टर दिनेश चंद्र भट्ट ने बताया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने भारत में आर्द्रभूमि के संरक्षण और प्रबंधन के लिए नियामक ढांचे के रूप में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के अनुसार
आर्द्रभूमि के भीतर ठोस अपशिष्ट फेंकना, अतिक्रमण, औद्योगिक अपशिष्ट डालना, और किसी भी प्रकार का अप्राकृतिक निर्माण निषिद्ध है।इन नियमों का उद्देश्य जैव विविधता की रक्षा करना, बाढ़ को नियंत्रित करना और पानी की गुणवत्ता को बनाए रखना है विश्व आर्द्रभूमि दिवस हर साल 2 फरवरी को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार इस दिन को आधिकारिक तौर पर विश्व आर्द्रभूमि दिवस के रूप में चुना गया था। इसका उद्देश्य मानवता और पूरे ग्रह के लिए आर्द्रभूमि के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है।

प्रोफेसर दिनेश भट्ट ने बताया कि यह दिन अपशिष्ट और प्रदूषण को कम करने और आर्द्रभूमि के नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के लिए सतत तरीकों को अपनाने पर जोर देता है यह स्थल संकटग्रस्त, लुप्तप्राय या गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों को आश्रय स्थली प्रदान करता है l इसमें ऐसे पौधे और/या जीव-जंतुओं की आबादी पाई जाती है जो इसके जैव-भौगोलिक क्षेत्र की जैविक विविधता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह स्थल नियमित रूप से सैकड़ो किस्म के जलपक्षियों व पौधों और जानवरों की प्रजातियों के जीवन चक्र के महत्वपूर्ण चरणों में उनके आवास के रूप में या प्रतिकूल परिस्थितियों के दौरान शरणस्थल के रूप में कार्य करता है। प्रोफेसर भट्ट ने कहा कि यह उल्लेखनीय है कि विश्व में यह स्थल 10,000 या उससे अधिक जलपक्षियों और मछली एवं अन्य जीव जंतुओं की प्रजातियां को आश्रय प्रदान करता है।
यह आर्द्रभूमि स्थानीय व प्रवासी पक्षियों के भोजन के एक महत्वपूर्ण स्रोत, प्रजनन स्थल, पालन-पोषण स्थल या प्रवास मार्ग के रूप में कार्य करती है l इतना ही नहीं आर्द्रभूमि कार्बन सोखने, बाढ़ रोकने और पानी को शुद्ध करने में भी मदद करती हैं।

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