देहरादून, राज्य इस समय भयंकर आपदा की त्रासदी से गुजर रहा है, आपदा की इस घड़ी में शासन, प्रशासन से लेकर पूरी मशीनरी जुटी हुई है। हर कोई अपने स्तर से आपदा प्रभावितों को राहत दिलाने में जुटा है, इस बीच एक वायरल वीडियो ने सिस्टम को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह वायरल वीडियो राज्य के कैबिनेट मंत्री और देहरादून के जिलाधिकारी के बीच का है, जिसने सबका ध्यान अपनी और खींचा है, वीडियो में आपदा के ऐसे समय में दोनों के बीच आपसी बातचीत और व्यवहार को लेकर टकराव नजर आया है। जो कि चर्चा का विषय बना हुआ है। दून में आपदा के बीच मसूरी विधायक एवं मंत्री गणेश जोशी और डीएम सविन बंसल के बीच संवाद को लेकर है। वायरल वीडियो में मंत्री ने डीएम को फोन न उठाने पर सार्वजनिक स्थान पर गुस्सा जाहिर कर दिया। डीएम ने भी सुनकर हाथ जोड़ा और आगे बढ़ गए। इस दौरान डीएम, एसएसपी समेत कई आलाधिकारी मौके पर मौजूद थे। अब इस वीडियो को लेकर कई तरह की चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है। बताया जा रहा है कि मंत्री गणेश जोशी दिल्ली में थे, सोमवार रात को बादल फटने के बाद मंत्री देहरादून के लिए निकल गए। इस बीच मंत्री ने कई अधिकारियों और डीएम को फोन लगाया, डीएम का फोन नहीं उठा।
इस दौरान आपदा ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करते हुए अचानक से कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और देहरादून जिलाधिकारी सविन बंसल का आमना-सामना हो गया। इसके बाद वो जो कुछ हुआ वो मोबाइल में भी कैद हो गया। यहीं वीडियो सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मामला यह हुआ कि आपदा क्षेत्र में जाते हुये दून जिलाधिकारी सविन बंसल के सामने आते ही मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि रंग-ढंग ठीक कर दे अपना, इस पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने पूछा कि क्या हुआ तो मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि रात को मुख्य सचिव ने फोन उठा लिया, गढवाल कमिश्नर विनय शंकर ने फोन उठा लिया. एसडीएम ने फोन उठा लिया, लेकिन जब मैंने सुबह मुख्यमंत्री के यहां फोन किया, तब साहब ने फोन उठाया, इसके बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने मंत्री गणेश जोशी को नमस्ते किया और बिना कुछ कह वहां से चले गए । इसे जिलाधिकारी की शालीनता समझे या कुछ ओर, लेकिन कुछ भी हो अपनी सकारात्मक कार्यशैली के चलते डीएम सविन बंसल ने जन सेवक के रुप में अलग पहचान बनायी है, यह अधिकारी किस तरह से जन सेवा में लगा है यह जगजाहिर है, ऐसे में कई वरिष्ठ नागरिक मंत्री के इस हनक भरे रवैये से खासे नाराज भी दिखते हैं, उनका कहना कि जनसेवा में जुटे इस प्रशासनिक सिपाही के कर्तव्य पथ के सार्थक सेवा भाव सलाम करना चाहिये ।
इधर वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते ही कांग्रेस भी पीछे नहीं रही, कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का जिलाधिकारी आपदा के समय जनता को देखे या नेताओं के फोन उठाएं ? सबके सामने इस तरह की भाषा का प्रयोग करना किसी मंत्री को शोभा नहीं देता, कांग्रेस का आरोप है कि नेता लगातार अधिकारियों को धमका रहे हैं । कभी फोन पर कभी सड़क पर ताकि अपनी राजनीति चमका सकें. विपक्ष का कहना है कि यदि राज्य के मंत्री और विधायक अधिकारियों पर इस तरह दबाव बनाएंगे तो आपदा प्रबंधन जैसी गंभीर जिम्मेदारी खतरे में पड़ जाएगी
गरिमा ने कहा कि उत्तराखंड़ में ये कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी उत्तराखंड में नेताओं द्वारा अधिकारियों को हड़काने के कई मामले सामने आ चुके है, वहीं अधिकारियों पर आरोप लगते रहते है कि वो जनप्रतिनिधियों की सुनते नहीं, कांग्रेस ने इस इस तरह के घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाया है कि आखिर आपदा प्रबंधन और जनता की समस्याओं के बीच अधिकारी किसे प्राथमिकता दें, जनता की मदद करें या इन सभी बातों को देखते रहे । लेकिन कुछ भी हो एक बार फिर मंत्री के व्यवहार पर लोग अपनी प्रक्रिया दे रहे हैं और ईमानदार और साफ छवि के जिला अधिकारी के जनहित के कार्यो की तारीफ कर रहे है ।



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