Thursday, June 4, 2026
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उत्तराखंड के पाठ्यक्रम में शामिल होंगे तकनीकी और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषय

देहरादून, उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा जगत से जुड़ी बड़ी खबर है। नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत अब प्रदेश के छात्र अपनी मनपसंद विषयों का चयन कर सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का भी अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई को लचीले ढंग से आगे बढ़ाने की सुविधा होगी। मंगलवार को सचिवालय स्थित सभागार में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में नई शिक्षा नीति-2020 के तहत गठित टास्क फोर्स की बैठक आयोजित हुई। बैठक में नीति के क्रियान्वयन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक के दौरान डॉ. रावत ने कहा कि एनईपी-2020 लागू होने के बाद प्रदेशभर के शिक्षण संस्थानों में छात्रों को अपनी पसंद के विषयों का अध्ययन करने की आजादी रहेगी। साथ ही, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू होने से छात्र बीच में पढ़ाई छोड़कर भी आगे चलकर दोबारा उसी स्तर से पढ़ाई शुरू कर सकेंगे।

उच्च शिक्षा मंत्री ने सभी प्रकार की शिक्षा से जुड़े संस्थानों को नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCF) के तहत पाठ्यक्रम तैयार कर लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों को अधिक अवसर और लचीलापन देगी, साथ ही रोजगारोन्मुख शिक्षा की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि एनईपी-2020 से राज्य के छात्रों को नई शिक्षा व्यवस्था का लाभ मिलेगा और उनकी प्रतिभा को देश-विदेश में पहचान मिल सकेगी।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मौजूदा समय की आवश्यकताओं को देखते हुए छात्रों को तकनीकी और कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में अब ईवी टेक्नोलॉजी, आईओटी, एसआई, डाटा एनालिसिस, इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप और न्यू वेंचर क्रिएशन जैसे आधुनिक तकनीकी विषय शामिल किए जाएंगे। वहीं दूसरी ओर, भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित विषयों जैसे ज्योतिष विज्ञान, आयुष विज्ञान, योग विज्ञान, वास्तु विज्ञान, कृषि, वानिकी और औद्यानिकी को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।

मंगलवार को सचिवालय में आयोजित एनईपी-2020 टास्क फोर्स की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग को नोडल विभाग के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक में विभाग की ओर से नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क और पाठ्यक्रम सुधार पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। इसमें विशेष रूप से बहुविषयक विकल्प, कौशल संवर्धन, डिजिटल इनिशिएटिव, ग्रेडेड ऑटोनॉमी, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट, अकादमिक शोध, गुणवत्ता एवं प्रशिक्षण, भारतीय ज्ञान व्यवस्था, एकेडमिया-इंडस्ट्री सहयोग और ओपन डिस्टेंस लर्निंग जैसे विषयों पर चर्चा की गई। डॉ. रावत ने कहा कि एनईपी-2020 लागू होने के बाद छात्रों को न केवल अपनी पसंद के विषय चुनने की छूट मिलेगी बल्कि उन्हें रोजगारोन्मुख शिक्षा और पारंपरिक भारतीय ज्ञान दोनों का संगम मिलेगा। इससे प्रदेश के छात्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेंगे और साथ ही भारतीय संस्कृति से भी जुड़ाव बनाए रख सकेंगे।

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