हरिद्वार(कुलभूषण), विदेश मन्त्रालय भारत सरकार, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली व उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के तत्वावधान में “संस्कृत गंगा संगम” अन्तर्राष्ट्रीय शोध सम्मेलन का भव्य उद्घटान हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि संस्कृत शिक्षा व उच्चशिक्षा मन्त्री माननीय डॉ धनसिंह रावत रहे, व अतिविशिष्ट अतिथि माननीय भगतसिंह कोश्यारी जी रहे।
विशेष आकर्षण विश्व भर के 11 देशों -यू के, फिजी, मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका, कजाकिस्तान, मंगोलिया आदि के मूल निवासी विद्वान वेद,संस्कृत व भारतीय दर्शन परम्परा के विशिष्ट विद्वान् रहे, जिन्होंने अनेक सत्रों में भारतीय ज्ञान परम्परा पर अपने शोधपरक व्याख्यान दिए। ऐसा शोध सम्मेलन उत्तराखंड के विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा को लेकर एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर पहली बार हो रहा है जिसमें इतने मनीषी विद्वान एक साथ मंच पर पहुंचे हैं विदेशी विद्वानों के अतिरिक्त भारत के कोने-कोने से 350 विद्वान 2 दिन तक भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपने शोध पत्र एवं व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे
वैदिक विज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान पर चले सत्र की अध्यक्षता करते हुए नैनीताल से पधारे प्रोo विनय विद्यालंकाऱ ने कहा कि वेदों में समस्त ज्ञान विज्ञान के सूत्र विद्यमान हैं, जिनका गूढ़ ज्ञान भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों धाराओं में शोध हो रहे हैं,उन्होंने कहा कि वर्तमान में वेदों के विज्ञान पक्ष पर अधिक शोध की आवश्यकता है। इस सत्र में 8 शोधपत्र पढ़े गए, इस सत्र के मुख्य अतिथि मलेशिया में आर्षज्ञान की ज्योति जला रहे स्वामी सत्यप्रकाशानन्द जी ने संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता पर व्याख्यान दिया। इसी प्रकार के 18 सत्र इस शोध सम्मेलन में चलेंगे।



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