नई दिल्ली, डीपीएमआई सभागार , न्यू अशोक नगर दिल्ली में उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली व साबली विकास समिति द्वारा गढ़वाली कवयित्री ममता रावत को श्रद्धांजलि दी गई।
ज्ञातव्य हो कि ममता रावत का 25 मार्च, 2026 को अनायास निधन हो गया था। ममता रावत का जन्म 13 जून 1990 को बीरोंखाल ब्लाक के अरकंडाई गांव में श्रीमती पीताम्बरी देवी व जगदीश सिंह रावत के घर हुआ। ममता बचपन से विलक्षण प्रतिभा की धनी थी। वर्तमान में वह अपने पति अजय सिंह रावत व बेटा आदित्य के साथ फरीदाबाद में रह रही थी। गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएड ममता रावत ने सरस्वती शिशु मंदिर समेत कई विद्यालयों में बतौर शिक्षिका काम किया।
ममता रावत गढ़वाली भाषा की सुप्रसिद्ध कवयित्री व गीतकार थी। मांगल गीतों को गाने का हुनर ममता रावत में बहुत सलीके का था। ममता रावत में ने स्पेशल बच्चों व अलग-अलग मनोवृत्तियों और कौशल वाले बच्चों के साथ काम करने की क्षमता सबसे अलग थी । ऐसे बच्चों के साथ सहजता से घुलमिल जाने की क्षमता। बच्चों के लिए प्रभावी शिक्षण विधि विकसित करने की क्षमता के कारण ही ममता रावत ऐसे बच्चों को जीवन की मुख्य धारा में लाने के लिए सतत प्रयास करती रहीं । 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के व्यवहार को संभालने और शोध कौशल। शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न साधनों, जैसे पुस्तकें, संगीत और खेल, का उपयोग करने में उच्च दक्षता। बच्चों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद करने की क्षमता ताकि वे जल्दी सीख सकें, जैसे तुकबंदी वाले खेल, कहानी सुनाना आदि। बच्चों को प्रेरित करने की क्षमता ताकि वे खुद को एक विशेष व्यक्तित्व समझें।
उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने बताया कि ममता रावत बहुत ही होनहार कवयित्री थी। बहुत कम समय में ममता रावत ने साहित्य में अपनी जगह बना ली थी। ममता ने सिर्फ एक कवयित्री थी बल्कि गीतकार व मा़गलगीत गायिका के रुप में भी प्रसिद्ध थी। श्री ध्यानी ने कहा कि ऐसी होनहार कवयित्री का असमय निधन भाषा साहित्य व समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
इस श्रद्धांजलि सभा में ममता रावत को स्वरांजली देकर सुप्रसिद्ध लोकगायक सर्वेश्वर बिष्ट ने भजन और गीतों के माध्यम से ममता रावत को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर की साहित्यकारों व समाजसेवी लोगों ने ममता रावत को श्रद्धांजलि दी। आदि ने अपनी बात रखी। थी। सभी वक्ताओं ने कहा की ममता रावत का यूँ असमय जाना साहित्य व समाज के अपूर्णीय क्षति है। ममता रावत की कविताओं, गीतों को संकलित करके पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने पर भी विचार होना चाहिए।
इस मौके पर ममता रावत के परिजनों समेत कई गणमान्य लोग जिनमें साहित्यकार सर्वश्री चन्दन प्रेमी, जयपाल सिंह रावत, दर्शन सिंह रावत, पूरणचन्द्र कांडपाल, भगवती प्रसाद जुयाल गढदेशी, बृजमोहन वेदवाल, दीनदयाल बन्दूणी दीन, जबर सिंह कैंतुरा, जगमोहन सिंह रावत जगमोरा, सुशील बुडाकोटी, दिनेश ध्यानी, रमेश हितैषी, सर्वेश्वर बिष्ट, वीरेंद्र जुयाल उपरि, दयाल नेगी, ओम ध्यानी, प्रदीप रावत खुदेड़, युगराज रावत, दीवान सिंह नेगी, सुरेश रावत, डाक्टर सतीश कालेश्वरी, अनिल कुमार पंत, प्रताप सिंह थलवाल, हेमलता जुयाल, दिग्पाल कैंतुरा, दीवान सिंह नेगी, युगराज रावत, सुंदरलाल आर्य, दिनेश रावत, दलबीर सिंह रावत, अनूप सिंह बिष्ट, दीपा रावत, रेखा रावत सहित कई लोग उपस्थित थे। अंत में दो मिनट के मौन के बाद श्रद्धांजलि सभा का समापन हुआ।



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