कीमोथेरेपी के बाद दोबारा लौटा आक्रामक ब्लड कैंसर, साकेत मैक्स के डॉक्टरों ने CAR-T सेल थेरेपी से 65 वर्षीय बुजुर्ग को दिया नया जीवन

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देहरादून: मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के डॉक्टरों ने एडवांस्ड CAR-T सेल थेरेपी के जरिए 65 वर्षीय मरीज का सफलतापूर्वक इलाज कर चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। देहरादून निवासी शरद चंद्र झाल्डियाल आक्रामक ब्लड कैंसर ‘रिलैप्स्ड डिफ्यूज लार्ज बी-सेल लिम्फोमा’ (DLBCL) से पीड़ित थे।

मरीज को 2020 में कैंसर का पता चला था और मुंबई में R-CHOP कीमोथेरेपी के छह चक्र पूरे करने के बाद भी बीमारी दोबारा लौट आई थी। इसके बाद उन्हें मैक्स हॉस्पिटल, साकेत में भर्ती कराया गया, जहाँ हीमैटो-ऑन्कोलॉजी और सेलुलर थेरेपी विशेषज्ञों की टीम ने उनका मूल्यांकन कर CAR-T सेल थेरेपी शुरू की।

  • क्या है CAR-T सेल थेरेपी: इसमें मरीज की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाओं (इम्यून सेल्स) को लैब में पुनः मॉडिफाई और जेनेटिकली री-इंजीनियर किया जाता है, ताकि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर सीधा हमला कर सकें।

  • सफलता की वजह: अस्पताल के हीमैटोलॉजी एंड बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. रयाज अहमद ने बताया कि जब सामान्य कीमोथेरेपी बेअसर साबित होती है, तब CAR-T थेरेपी एक वरदान की तरह काम करती है। मरीज का सही चुनाव, एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और क्रिटिकल केयर मॉनिटरिंग के चलते यह जटिल इलाज सुरक्षित रूप से पूरा हुआ।

लगभग एक महीने तक अस्पताल में विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में रहने के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनमें कैंसर के कोई लक्षण नहीं हैं और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।