हिमालय केवल पर्वत श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह देश की जल सुरक्षा, जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रो० जोशी

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हरिद्वार (कुलभूषण)गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय, हरिद्वार के पर्यावरण विज्ञान विभाग में हिमालय दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को हिमालय के पर्यावरणीय, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिकी महत्व से अवगत कराना तथा हिमालय संरक्षण के प्रति उनमें जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना विकसित करना था।

कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर नमिता जोशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए हिमालय की वर्तमान स्थिति, इसके समक्ष उत्पन्न हो रही पर्यावरणीय चुनौतियों तथा इसके संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरणीय दबाव, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, अनियोजित विकास तथा प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसे विषयों पर विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल पर्वत श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह देश की जल सुरक्षा, जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रोफेसर संगीता मदान ने हिमालय दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को हिमालय के संरक्षण में उनकी भूमिका एवं जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को हिमालय एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने तथा अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने की शपथ दिलाई। विद्यार्थियों ने हिमालय की प्राकृतिक एवं पारिस्थितिकी संपदा की रक्षा करने, पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने तथा दूसरों को भी हिमालय संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने हिमालय संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से संबंधित संदेश प्रस्तुत किए। वहीं भाषण एवं कविता प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने हिमालय के प्रति अपनी संवेदनाओं और विचारों को अभिव्यक्त किया।