Tuesday, June 2, 2026
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फ्लाईओवर तो बना लेकिन साइड लेन 7 वर्ष बाद भी पक्की नहीं बन पाई

‘सड़क नहीं बनने से कीचड़ व धंसाव से स्थानीय लोगों का चलना हो रहा मुश्किल’

देहरादून (राजीव खनसली), देहरादून हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर मोहकमपुर में फ्लाईओवर तो बना, लेकिन साइड लेन आज लगभग 7 वर्ष बाद भी पक्की नहीं बन पाई।
पहले से ही खस्ताहाल साइड लेन को जब से सीवर और पेयजल लाइन डालने के लिए खोदा गया तब से तो स्थिति दिन ब दिन बदतर ही होती जा रही है। खुदाई के कारण गर्मियों में धूल, बरसात में ट्रेंच धसाव और कीचड़ से चलना मुश्किल हो गया हैं। इस साइड लेन पर, मोहकमपुर, माजरी माफ़ी, नवादा, लोवर नत्थनपुर, नेहरूग्राम, मियांवाला आदि क्षेत्र के लगभग 40- 50 हजार लोग और हजारों वाहन रोज आना जाना करते हैं। वाहनों का धसना- फसना और जाम अब रोज की बात हो गई हैं।
यही स्थिति अंदर की एकता विहार, उन्नति विहार, गणेश पुरम आदि कॉलोनियों की हैं। सीवर और पेयजल लाइन डालने का काम लगभग ढाई सालों से कछुआ गति से चल रहा हैं। सारी सड़के खुदी पड़ी हैं, सड़क बनाना तो दूर पैचिंग तक नहीं हो रही हैं। धूल, गड्ढे, बंद नालियों, कीचड़ से परेशानी कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही हैं।
गणेशपुरम लोवर नत्थनपुर, में ही लगभग 600 मीटर लंबी एक गली में 50 घरों के लिए सीवर का काम पिछले 6 – 7 महीनों से चल रहा था। अब काम खत्म तो हो गया हैं पर सड़क नहीं बनने से कीचड़ व धंसाव से चलना रिस्की व मुश्किल हो रहा है। जब ट्रेंच धंसने से बने गड्ढे में लोग चोटिल हुए तब जाकर निर्माण एजेंसी ने कुछ गड्ढे भरवाए।
जो गलियां और मुख्य सड़क का कुछ हिस्सा बना भी हैं तो, वहां नालियां न होने या नालियां बंद होने के कारण सड़क टूटनी शुरू हो गई है। सड़क का मलवा और नालियों का कचरा साइड पर इकट्ठा करके छोड़ दिया जाता हैं जो फिर से नालियों में ही गिर जाता है। सिर्फ ओर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है मॉनिटरिंग की कमी है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना हैं कि यदि मैंन पावर/सामान की कमी थी तो एक साथ पूरा क्षेत्र खोदने की बजाय एक एक कॉलोनी करके काम कराया जाना चाहिए था। हम जागरुक नागरिक होने का अपना कर्तव्य बख़ूबी निभा रहे हैं। विगत कई सालों से टूटी हुई नालियों और सड़क के निर्माण के लिए, बरसात से कई महीने पहले से ही लगातार निवेदन कर रहे हैं। समाचार पत्रों सहित विभिन्न माध्यमों से भी यूयूएसडीए (UUSDA) के अधिकारियों, जिला प्रशासन, सभी जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में समस्या को लाया गया हैं। लेकिन न तो अधिकारियों और न ही जनप्रतिनिधियों को जनता की इस परेशानी से मतलब हैं। चुनाव के समय ही जनसेवकों को वोटो के लिए जनता की याद आती हैं।
अब बरसात में खुदाई का कार्य बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।पहले से खुदी हुई सभी गलियों, नालियों और सड़कों का फाइनल निर्माण यदि फिलहाल संभव न भी हो तो फिलहाल उन्हें चलने लायक तो तुरंत बनाया जाय।May be an image of 4 people, people smiling and text that says 'मध्ुकांतसिलोड़ी सिलोड़ी मधुकांत 13:3' सुनील सुनीलनोटियालएडवोकेट नौटियाल एडवोकेट 13 मंजुला मंजुलाखनसली खनसली 13:36 सुमित देवरानी'

क्या कहते स्थानीय नागरिक :

सड़क बनाने का काम आधा छोड़ दिया :

हमारी गणेश पुरम कॉलोनी में मुश्किल से 50 घर होंगे यहां सीवर लाइन का काम लगभग 8-10 महीने तक रुक रुक कर किश्तों में चला। अब काम खत्म होने के बाद भी सड़क बनाने का काम आधा छोड़ दिया गया हैं। कीचड़ और गड्ढों के कारण कभी भी बच्चों और बुजुर्गों के साथ कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती हैं।
-मंजुला खनसली, मोहकमपुर

साइड लेन 6 वर्ष बाद भी पक्की नहीं बन पाई :

देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर, मोहकमपुर फ्लाईओवर बनने के बाद से, साइड लेन आज लगभग 6 वर्ष बाद भी पक्की नहीं बन पाई है।
सीवर और पेयजल लाइन डालने से हुई खुदाई के कारण गर्मियों में धूल और अब बरसात में कीचड़ से चलना मुश्किल हो गया हैं। इस साइड लेन पर, मोहकमपुर, माजरी माफ़ी, नवादा, लोवर नत्थनपुर, नेहरूग्राम, मियांवाला आदि क्षेत्र के लगभग 30- 40 हजार लोग रोज आना जाना करते हैं।
इस साइड लेन पर कई कई फिट गहरी खोदी गई ट्रेंच पर ठीक से भराव न होने के कारण, सड़क जगह जगह धस रही है, जिसमें दोपहिया वाहन गिर रहे हैं और चार पहिया वाहन फंस रहे हैं।
-मधुकांत सिलोड़ी, नत्थनपुर

सीवर और पेयजल का काम कछुआ गति से चल रहा :

सीवर और पेयजल लाइन डालने का काम सालों से कछुआ गति से चल रहा हैं। धूल, गड्ढे, बंद नालियां, कीचड़ से परेशानी कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही हैं। यदि मेन पावर/सामान की कमी थी तो एक साथ पूरा क्षेत्र खोदने की बजाय एक एक कॉलोनी करके काम कराया जाना चाहिए था।
-एडवोकेट सुनील नौटियाल

मरम्मत का काम समय से नहीं होता :

स्मार्ट सिटी के नाम पर सालों से गलियों और मुख्य मार्ग पर तोड़ फोड़ तो चल रही है पर मरम्मत का काम समय से नहीं हो रहा है। जहां कुछ सड़कें बनी भी हैं उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं हैं। वहां का मलवा और नालियों का कचरा साइड पर इकट्ठा करके छोड़ दिया जाता है जो फिर से नालियों में ही गिर जाता है। सिर्फ ओर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है मॉनिटरिंग की कमी है।
-सुमित देवरानी

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