रुद्रप्रयाग : गढ़वाल की सांस्कृतिक आस्था और पारंपरिक शक्ति उपासना को नई ऊर्जा देते हुए श्री चंडिका देवी महा बनियाथ–वीरों देवल (वसुकेदार) का शुभारंभ अभूतपूर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ हो गया है। यह महा आयोजन 23 फरवरी तक चलेगा। वीरों देवल, संगुड, नैनी पोंडार और क्यार्क बरसूडी समेत कई गांवों की कुलदेवी श्री चंडिका माता को समर्पित यह लोकपर्व क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक है।
सुबह से ही आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। ढोल-दमाऊ की पारंपरिक थाप, मंत्रोच्चार और देवी आराधना के साथ पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है। सभी वैदिक अनुष्ठान कुल पुरोहित डिमरी और कांडपाल ब्राह्मणों द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न किए जा रहे हैं।
आज होगा पावन ब्रह्मोदय, तैयारियां पूरी
आयोजन का सबसे पवित्र क्षण ब्रह्मोदय 3 दिसंबर को होगा। ब्रह्मोदय को महाबनियाथ का हृदय माना जाता है, जहां हजारों श्रद्धालु देवी महाशक्ति के आशीर्वाद के लिए एकत्रित होते हैं। इस अवसर पर क्षेत्र के सभी गांवों से भारी भीड़ पहुंचने की संभावना है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रवासी ग्रामीण भी इस पारंपरिक अनुष्ठान का हिस्सा बनने लौट रहे हैं।
समिति के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष भंडारी, सचिव मदन मोहन डिमरी, कोषाध्यक्ष राजेश विष्ट ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे इस प्राचीन धार्मिक परंपरा में सहभागिता कर इसे और अधिक भव्य एवं सफल बनाने में सहयोग दें।
सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, सांस्कृतिक पहचान का उत्सव:
पंडित देवी प्रसाद काण्डपाल, दीपक डिमरी, पीयूष डिमरी, सनातन व शुसील डिमरी ने बताया कि यह बनियान 21 वर्ष बाद हो रही है। उन्होंने बताया कि श्री चंडिका देवी महा बनियाथ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, यह पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक जड़ों, सामुदायिक एकजुटता और लोक-गौरव का उत्सव है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन आस्था, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।



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