Tuesday, May 6, 2025
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भारत में जॉन डियर की 25 सालों की सफलता, इसकी टेक्नोलॉजी और समाज पर इसके प्रभाव से ही संभव हुई है

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देहरादून, जॉन डियर ने देश और दुनिया भर में किसानों की सेवा के लिए अपने इन्नोवेटिव टेक्नोलॉजी, इन्वेस्टमेंट और सतत उत्पादन क्षमता द्वारा देश के विनिर्माण, प्रतिभा और सप्लाई चैन को जारी रखा है | कंपनी ने इन सभी चीजों को तकनीकी रूप से खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया है।

5M सीरीज़ ट्रैक्टर और इसकी उत्पादन प्रणाली इस बात का ताजा उदाहरण है, जो अधिक हॉर्सपावर और अत्याधुनिक विशेषताओं के साथ-साथ उन्नत टेक्नोलॉजी प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य खेती करने की लागत को कम करना और किसानों की आमदनी को बढ़ाना है।

ट्रेक्टर, हार्वेस्टर और अत्याधुनिक तकनीक वाले उपकरणों के साथ, इस प्रकार के उत्पादों और नए तरीकों की पेशकश, सही मायने में जॉन डियर की ओर से किसानों को तकनीकी रूप से बेहतर कृषि समाधानों की एक बड़ी रेंज उपलब्ध कराने की लगातार कोशिश का नवीनतम उदाहरण है।

श्री मुकुल वार्ष्णेय, डायरेक्टर – कॉर्पोरेट अफेयर्स, जन संपर्क, मीडिया एवं कम्युनिकेशन ने मीडिया के सभी साथियों का स्वागत किया। उन्होंने कंपनी की 187 वर्षों की विरासत के बारे में बताते हुए कहा, ” वी रन सो लाइफ कैन लीप फॉरवर्ड| जॉन डियर खेती और खेती के लिए जमीन तैयार करने वाले उपकरणों, उत्पादों और तरीकों का निर्माण करने वाली दुनिया की अग्रणी कंपनी है, जो निर्माण और वानिकी उद्योग को भी अपनी सेवाएं प्रदान करती है। जॉन डियर अपनी अत्याधुनिक तकनीक और समाधानों के जरिए अपने ग्राहकों को आर्थिक रूप से, स्थायी तौर पर फायदा पहुंचाने के लिए अद्वितीय है। भारत में अपने 25 सालों की इस यात्रा के दौरान, हमने भारतीय खेती में भी बदलाव देखा है। जॉन डियर में हम सही मायने में अपने ऊंचे इरादों की ओर आगे बढ रहे हैं।”

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए श्री शैलेन्द्र जगताप, मैनेजिंग डायरेक्टर, जॉन डियर इंडिया, ने कहा, “25 साल पहले अत्याधुनिक सुविधाओं वाले उत्पादों की पेशकश के साथ भारत में हमारे सफर की शुरुआत हुई थी, जिसमें पावर स्टीयरिंग, ऑयल में डूबे हुए डिस्क ब्रेक, प्लेनेटरी रिडक्शन, फोर्स फीड लुब्रिकेशन, और बहुत अधिक टॉर्क वाले मशीन के साथ-साथ फ्रंट पीटीओ, पर्मा क्लच, ऑटोट्रैक™, पावररिवर्सर™ और जेडीलिंक™ जैसी बेहद महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी शामिल हैं।” उन्होंने आगे कहा कि, “जॉन डियर ने इनोवेशन करना और भारत में इन अत्याधुनिक सुविधाओं को पेश करना जारी रखा है, जो अब इस उद्योग जगत के मानक बनते जा रहे हैं। किसानों की सोच प्रगतिशील है, और जब वे टेक्नोलॉजी की अहमियत और इससे लागत में होने वाले फायदे को देखते हैं तो वे इसे जरूर अपनाते हैं।”

श्री जगताप ने आगे बताया कि, डियर देश के खाद्य सुरक्षा मिशन के साथ-साथ बढ़ती आबादी के लिए भोजन से संबंधित लगातार बदलती जरूरतों में अपना सहयोग देने के वायदे पर कायम है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि डियर भारत को निर्वाह खेती से कृषि-उद्यमिता तक ले जाने पर गर्व महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा, “खेती के लिए संपूर्ण समाधान उपलब्ध कराने और कृषि मशीनीकरण के सफर में महिला किसानों को शामिल करने की हमारी कोशिशों को हमारे ग्राहकों ने काफी महत्व दिया है। हम किसान परिवारों में गर्व की भावना महसूस करते हैं, क्योंकि हम महिला किसानों को खुद को कुशल बनाने और आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करते हैं।”

25 सालों के अपने सफर में, जॉन डियर ने भारत में विनिर्माण और उत्पाद विकास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है, जिसमें शामिल हैं:

  • · पुणे (महाराष्ट्र) और देवास (मध्य प्रदेश) में ट्रैक्टर निर्माण केंद्र
  • · पुणे (महाराष्ट्र) में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम निर्माण केंद्र
  • · पुणे (महाराष्ट्र) में इंडिया इंजीनियरिंग सेंटर
  • · पुणे (महाराष्ट्र) में एंटरप्राइज़ टेक्नोलॉजी सेंटर
  • · पुणे (महाराष्ट्र) और बेंगलुरु (कर्नाटक) में ग्लोबल (IT) आईटी सेंटर
  • · नागपुर (महाराष्ट्र) और इंदौर (मध्य प्रदेश) में पार्ट्स के लिए डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर
  • · पुणे (महाराष्ट्र) में जॉन डियर फाइनेंस
  • · देश भर में 580 चैनल पार्टनर्स के तहत 1200 टच पॉइंट्स, 22 शाखा कार्यालय और 4 क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र
  • · विर्टजेन ग्रुप (Wirtgen Group) – जॉन डियर कंपनी, पुणे (महाराष्ट्र)

 

श्री जगताप ने कहा कि, जॉन डियर ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों में टेक्नोलॉजी लाने के मामले में भी सबसे आगे है, जो खेतों को तैयार करने के लिए आवश्यक कार्यों की संख्या को कम करने के साथ-साथ, उर्वरकों और रसायनों को कुशल तरीके से इस्तेमाल के जरिए, कुल मिलाकर खेती की लागत को कम करता है। ये सस्टेनेबिलिटी के लक्ष्यों को हासिल करने और उत्सर्जन के स्तर में कमी लाने के लिए बेहद आवश्यक हैं – और ये दोनों ही पर्यावरण की हिफाजत के लिए डियर के रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करते हैं।

उन्होंने कहा कि, मिसाल के तौर पर फ्रंट पीटीओ (पावर टेकऑफ़) और विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए फ्रंट फ़ार्म इम्प्लीमेंट्स जैसी टेक्नोलॉजी की शुरुआत से खेती से जुड़ी कुछ गतिविधियों की लागत को 25 प्रतिशत से भी कम करने में मदद मिली है, साथ ही इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आई है।

 

भारत में डियर के कारोबार के संचालन के बारे में:

पुणे में स्थित जॉन डियर एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेंटर और ग्लोबल आईटी सेंटर ऐसी सेवाएँ और समाधान उपलब्ध कराता है, जो विश्व स्तर पर जॉन डियर के विभिन्न व्यवसायों के लिए उत्पाद इंजीनियरिंग, निर्माण, गुणवत्ता, आपूर्ति श्रृंखला, आईटी समाधान और ग्राहक सहायता सेवाओं की अहमियत को कई गुना बढ़ा देता है। यहां के सभी इंजीनियर कॉन्सेप्ट और डिजाइन से लेकर प्रोडक्ट डिलीवरी तक के हर क्षेत्र में पूरी काबिलियत से काम करते हैं। इसके अलावा, वे साइबर सुरक्षा, फिनटेक सॉल्यूशंस, स्मार्ट कनेक्ट फैक्ट्रीज, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन के अलावा स्मार्ट कनेक्ट मशीन और ग्राहकों के साथ वास्तविक समय में कनेक्टिविटी सहित ग्राहकों के सामने आने वाली समस्याओं के समाधान जैसे विभिन्न विषयों पर भी काम करते हैं। हमारी टीम को आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स / मशीन लर्निंग क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा साइंस और डेटा एनालिटिक्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों में डोमेन विशेषज्ञता प्राप्त है।

पुणे में स्थित जॉन डियर के इंडिया इंजीनियरिंग सेंटर के पास दुनिया भर के यूटिलिटी ट्रैक्टर्स में डियर के डिजाइन और इनोवेशन की जिम्मेदारी है। श्री जगताप ने कहा कि सभी ग्राहकों ने पर्मा-क्लच, फ्रंट पीटीओ, पावर रिवर्सर, टेलीमैटिक्स और वातानुकूलित केबिन जैसी उत्पाद सुविधाओं को काफी पसंद किया है। उन्होंने कहा कि ‘ग्रीन सिस्टम’ कृषि उपकरण और जॉन डियर कंबाइन हार्वेस्टर की पेशकश के साथ खेती के लिए संपूर्ण समाधान तैयार किए गए हैं।

श्री रमाकांत गर्ग, डायरेक्टर, सेल्स एवं मार्केटिंग, ने कहा, “हम खेती के लिए अलग-अलग तरह की मिट्टी , जलवायु और विभिन्न प्रकार के फसलों के लिए जॉन डियर के उत्पाद उपलब्ध कराते हैं, और यही बात भारत में हमारे विकास की कुंजी रहा है। हमारा प्रोडक्ट पोर्टफोलियो व्यक्तिगत किसानों, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले किसानों और कस्टम हायरिंग के व्यवसाय से जुड़े उद्यमियों को अपनी सेवाएं प्रदान करता है। हमारा चैनल भी प्रोडक्ट के पूरे जीवन काल के दौरान किसानों की सेवा करने के लिए शशक्त में है। हम ग्राहकों की संतुष्टि के मामले में देश में सबसे आगे हैं।”

श्री गर्ग ने कहा कि जॉन डियर की वित्तीय सेवाएं, डिजिटल प्लेटफॉर्म का बेहतर ढंग से लाभ उठाने के साथ-साथ पारदर्शिता, तीव्र गति और सुविधा प्रदान करती है, जो ग्राहकों के लिए फायदेमंद है। उन्होंने आगे कहा, “5 साल की वारंटी और कल-पुर्जों की आसानी से उपलब्धता, तुरंत मिलने वाली सेवाओं और खेती में महिलाओं को शामिल करने की मुहिम की वजह से हमारे ग्राहकों को, सचमुच यह उन्हें अपनी “ज़िंदगी का बेस्ट डिसीजन” लगता है।”

श्री जगताप ने भविष्य में पूरे कृषि उद्योग को विकसित करने के लिए डियर की प्रतिबद्धता के बारे में भी समझाया। भारत में निर्माण की किफायती लागत, विश्वसनीय और बेहतर गुणवत्ता वाले आपूर्तिकर्ताओं, और विनिर्माण के शानदार माहौल के कारण और भारत की आपूर्ति श्रृंखला, प्रतिभा और बाजार की अच्छी उपलब्धता के कारण जॉन डियर दुनिया के 110 से अधिक देशों में किसानों की सहायता कर पा रहा है।

देश में रीज़न 1 में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक, श्री मुकुल वार्ष्णेय ने कहा, “वर्तमान में बेहतर माहौल के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों ने खेती में सुधार लाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने को अपनी प्राथमिकता बनाया है। कृषि उत्पाद मूल्य श्रृंखला में सटीकता और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी सबसे ज्यादा मायने रखती हैं। सरकारों ने उद्योग और शिक्षा जगत के साथ मिलकर उत्पादकता को बढ़ाने और किसानों की लाभप्रदता पर दूरगामी प्रभाव डालने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। जॉन डियर इन प्रयासों में सदैव आगे बना रहेगा और किसानों के हित में काम करना जारी रखेगा।”

श्री वार्ष्णेय ने कहा कि, डियर कृषि-तकनीक, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और ग्रामीण युवाओं को कुशल बनाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों में नीतिगत सुधारों की अनुशंसा करता है, जो पारंपरिक तरीकों के बजाय खेती के आधुनिक और बेहतर प्रक्रियाओं को अपनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। ट्रैक्टरों में इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रॉनिक घटकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिस पर सरकार ने ध्यान दिया है और खेती के लिए अच्छी तरह से एकीकृत परिवेश तैयार करने के उद्देश्य से आवश्यक सुधारों की योजना बनाई गई है।

साल 2017 में विर्टजेन ग्रुप के अधिग्रहण से भारत में जॉन डियर की उपस्थिति को और मजबूती मिली है, जो पुणे में स्थित है। विर्टजेन ग्रुप दुनिया में सड़कों का निर्माण करने वाली सबसे बड़ी कंपनी है।

कैदियों को हुनरमंद बनाने की पहल : जेल में बन रहा होली का हर्बल रंग, हाथों में सजेगी हाथ से बनी चूड़ियां

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(मुन्ना अंसारी)
हल्द्वानी, जनपद के उप कारागार में राज्य महिला आयोग महिला व पुरुष कैदियों को हुनरमंद बनाने के जुटा हुआ है । ताकि यह बंदी जब भी जेल से रिहा हों तो मुख्यधारा में शामिल होकर आसानी से जीवन गुजर-बसर कर सके। जिससे सुरक्षा, सुधार, पुनर्वास का उद्​देश्य पूरा हो सके इस वक्त हल्द्वानी उप कारागार में 69 महिला बंदियों को उनकी क्षमता के अनुसार हुनरमंद बनाने की कवायद तेज हो गई हैं।
राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ज्योति साह मिश्रा की पहल पर पहले चरण में महिला बंदियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। होली पर्व के मौके पर महिला बंदी आकर्षक चूड़ियां बना रही हैं इसके अलावा होली में प्रयोग होने वाले प्राकृतिक तरीकों और फूलों-सब्जियों से हर्बल रंग भी तैयार किया जा रहा हैं इसके अलावा अन्य सजावटी सामान आदि बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं । सामाजिक कार्यकर्ता पूनम बंदियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। प्रशिक्षण पाकर यह बंदी काफी उत्साहित दिखाई दे रही है उनका कहना है कि यह प्रशिक्षण उनके जेल में होने के बावजूद आय अर्जित करने का साधन बन गया है वही जेल अधीक्षक एसके सुखीजा का कहना है कि ऐसे रचनात्मक कार्यों से बंदियों में तनाव भी कम होता है और जब वे सजा काटकर समाज की मुख्यधारा से जुडेंगे तो उनके पास स्वरोजगार करने के अवसर होंगे ।
उन्होंने बताया कि होली के लिए रंग आदि चीजों के लिए संस्था द्वारा कच्चा सामान उपलब्ध कराया जा रहा है और तैयार उत्पाद विभिन्न संस्थाएं खरीदेंगी, इस कार्य के लिए बंदियों को मेहनताना भी दिया जाएगा ।

एफटीआई में 128 वन आरक्षियों ने पूरा किया प्रशिक्षण, दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आरक्षी हुए सम्मानित

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(मुन्ना अंसारी)

हल्द्वानी, उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी (एफटीआई) में 128 वन आरक्षियों ने छह माह का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। इस मौके पर आयोजित दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आरक्षियों को पुरस्कृत किया गया। प्रशिक्षण में प्रदेश भर के जिलों के फॉरेस्ट गार्ड शामिल रहे। समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तैनात फॉरेस्ट गार्डों को मानव वन्य जीव संघर्ष के बारे में विस्तार से बताया गया साथ ही वन्य जीव अपराध विषय पर कार्यशाला आयोजित कर महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। आपको बता दें कि वन आरक्षी प्रशिक्षण के द्वितीय सत्र में 99 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया, इनमें 39 पुरुष व 60 महिला वन आरक्षी शामिल रहे। इसके अलावा प्राथमिक वानिकी प्रशिक्षण केंद्र जैंती अल्मोड़ा के 29 पुरुष फॉरेस्ट गार्डों को भी प्रशिक्षण दिया गया। वही वन आरक्षियों को जीपीएस, कंप्यूटर, ट्रेंक्यूलाइजेशन, कैमरा ट्रेप, स्नेक रेस्क्यू, ड्रोन वन जंगल सरवाइवल का भी प्रशिक्षण दिया गया। दीक्षांत समारोह के मौके पर फॉरेस्ट गार्ड ने परेड भी की और सभी आरक्षी जंगल के प्रति अपने कत्तर्व्यों को लेकर खासे उत्साही नजर आए। एफटीआई में आयोजित वन आरक्षी महिला प्रशिक्षण में चंपावत वन प्रभाग में तैनात विमला तिवारी ने पहला स्थान हासिल किया है जबकि जैती के प्रशिक्षणार्थी व चकराता वन प्रभाग के दलवीर सिंह सजवाण को सर्वश्रेष्ठ आरक्षी चुना गया ।

यमुनोत्री रोपवे प्रोजेक्ट के लिए पर्यटन विभाग ने किया अनुबंध

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज की उपस्थिति में किया गया अनुबंध

देहरादून,  मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज की उपस्थिति में गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास में यमुनोत्री रोपवे प्रोजेक्ट के लिए पर्यटन विभाग, निजी निर्माण कंपनी एस.आर.एम. इंजीनियरिंग एवं एफआईएल इंडस्ट्री प्रा. लि. के बीच अनुबंध किया गया। ले. कमान्डर दीपक खण्डूरी (से.नि.) निदेशक अवस्थापना एवं श्री अविरल जैन ने एमओयू हस्ताक्षरित किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस इस रोपवे परियोजना के पूर्ण होने के बाद यमुनोत्री धाम अपने शीतकालीन स्थल खरसाली से जुड़ जायेगा। इस रोपवे परियोजना के बनने के बाद श्रद्धालुओं को यमुनोत्री धाम के दर्शन करने में सुगमता होगी। अभी पैदल मार्ग से यमुनोत्री धाम पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 2 से 3 घण्टे का समय लग जाता है, रोपवे बन जाने के बाद मात्र 15 से 20 मिनट में श्रद्धालु यमुनोत्री के दर्शन के लिए पहुंच जायेंगे एवं प्रदूषण मुक्त प्राकृतिक सौन्दर्य का लाभ उठा पायेंगे। इस रोपवे परियोजना के पूर्ण होने पर श्रद्धालुओं को तो सुविधा मिलेगी ही साथ ही स्थानीय स्तर पर लोगों के रोजगार के संसाधन भी बढ़ेंगे।

पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज ने कहा कि खरसाली से यमुनोत्री धाम तक बनने वाला यह रोपवे मॉ यमुना के ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन धामों को एक साथ जोड़ने एवं उत्तराखण्ड में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं में एक और नये अध्याय का कार्य करेगा। परियोजना का क्रियान्वयन तय सीमा में पूर्ण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

सचिव पर्यटन श्री सचिन कुर्वे ने कहा कि जानकीचट्टी (खरसाली) से यमुनोत्री बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा साथ ही श्रद्धालुओं को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी।

यमुनोत्री धाम के लिए बनने वाला 3.38 किमी लंबाई का यह रोपवे मोनोकेबल डिटैच्चेबल प्रकार का होगा। जिसका निर्माण यूरोपीय मानकों के अनुसार फ्रांस और स्विटजरलैंण्ड की तर्ज पर किया जायेगा। इस रोपवे की यात्री क्षमता एक घंटे में लगभग 500 लोगों को ले जाने की होगी। रोपवे के एक कोच की क्षमता आठ लोगों को ले जाने की होगी। यह रोपवे पर्यटन विभाग द्वारा पीपीपी मोड पर निर्मित किया जाना प्रस्तावित है। यमुनात्री को रोपवे से जोड़ने के साथ ही पार्किंग, आवासीय व्यवस्था, रेस्टोरेंट के निर्माण भी प्रस्तावित हैं। लगभग 166.82 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले रोपवे का लोअर टर्मिनल खरसाली में 1.787 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जायेगा, जबकि अपर टर्मिनल 0.99 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जायेगा।

इस अवसर पर विधायक यमुनोत्री श्री संजय डोभाल, अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (साहसिक विंग) कर्नल अश्वनि पुण्डीर (से.नि.), अपर निदेशक पर्यटन श्रीमती पूनम चंद, साहसिक खेल अधिकारी श्रीमती सीमा नौटियाल उपस्थित थे।

हिमनगरी में राजस्थान की तर्ज़ पर जनजाति संस्कृति पर आधारित गीत, नृत्य एवं वाद्य यंत्र का एक माश का प्रशिक्षण हुआ शुरू

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पिथौरागढ़ (मुनस्यारी),पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अथक प्रयासों से हिमनगरी में राजस्थान की तर्ज़ पर जनजाति संस्कृति पर आधारित एक माह का गीत, नृत्य एवं वाद्य यंत्र का प्रशिक्षण आज से शुरू हो गया है। कुछ दिनों के बाद आपको यहां पर्यटन तथा संस्कृति का समन्वय स्वरोजगार के क्षेत्र में नजर आयेगा।
निदेशालय संस्कृति उत्तराखंड द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण के माध्यम से हिमनगरी में एक अनूठा नवाचार होने वाला है, जिसकी नींव इस प्रशिक्षण के माध्यम से रखी जा रही है। इस प्रशिक्षण के बाद सांस्कृतिक दलों का गठन कर टूरिज्म सीजन में देशी एवं विदेशी पर्यटकों को शौ दिखाकर स्वरोजगार के नाते आयाम स्थापित किए जाने की योजना है।
आज ग्राम पंचायत जैती के मिलनकुटिया स्थित पंचायत घर में इस प्रशिक्षण का उद्घाटन जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने किया।
इस प्रशिक्षण में स्थानीय लोक कलाकारों तथा इसमें रुचि रखने वाले युवाओं, महिलाओं को गीत, नृत्य एवं वाद्य यंत्र की विधा में दक्ष बनाया जा रहा है।
मास्टर ट्रेनर्स हेमा भट्ट तथा पार्थ भट्ट, गौरव कुमार गगन द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
जिपंस जगत मर्तोलिया ने बताया कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इस अनूठे नवाचार को यहां आयोजित करने का अवसर प्रदान किया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कहीं पर भी राजस्थान की तर्ज़ पर पर्यटन तथा संस्कृति की एकरुपता टूरिज्म में नजर नहीं आता है। इस प्रशिक्षण के बाद मुनस्यारी में उत्तराखंड के टूरिज्म के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा तो यह मील का पत्थर साबित होगा।
प्रशिक्षण का संचालन कर रही संस्था सोसायटी फॉर एक्सन इन हिमालया पिथौरागढ़ की सचिव पुष्पा ने बताया कि एक माह के प्रशिक्षण में उभरी प्रतिभावों का एक सांस्कृतिक दल रजिस्ट्रेड किया जाएगा। उसके बाद राजस्थान की तर्ज़ पर सांस्कृतिक टूरिज्म की शुरुआत कर स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे।
प्रतिदिन आठ घंटे प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में जैती की ग्राम प्रधान पुष्पा रावत, महेश रावत, यशंवत सिंह बृजवाल, नीमा पांगती, ममता टोलिया, लवराज कुमार, जया नित्वाल, गौरव कुमार, उर्मिला लस्पाल, डाली पांगती, चन्द्रा, पूजा रावत, कृष्णा वर्मा, शीला धामी, दीपा मर्तोलिया, प्रेमा देवी, उर्मिला लस्पाल, कृष्णा वर्मा आदि मौजूद रहे।

मुख्य विकास अधिकारी व जिला विकास अधिकारी संभालेगें केदारनाथ यात्रा की अहम जिम्मेदारी

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“आगामी केदारनाथ यात्रा के सफल संचालन के लिये मुख्य विकास अधिकारी सहित 43 नोडल व 25 सहायक नोडल अधिकारी बनाये गये है”।

(देवेंन्द्र चमोली)
रुद्रप्रयाग- 25 अप्रैल से प्रस्तावित केदारनाथ यात्रा को लेकर जिला प्रशासन मुस्तैदी से तैयारियों में जुटा है।केदार घाटी में सुब्यवस्थित यात्रा संचालन एंव आपदा न्यूनीकरण एवं प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने जनपद स्तरीय अधिकारियों को नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारी नामित किया है। मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार को केदारनाथ यात्रा हेतु ओवर आल नोडल अधिकारी नामित किया है जबकि जिला विकास अधिकारी मंनविंदर कौर को सहायक नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
केदारनाथ यात्रा के सफल संचालन के लिये जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सभी अधिकारियों को सौंपे गए दायित्वों एवं जिम्मेदारियों का निर्वहन तत्परता से करने के लिए आदेश निर्गत किए हैं। इसी क्रम में समस्त यात्रा मार्ग पर कानून एवं व्यवस्था के लिए उप जिलाधिकारी ऊखीमठ जितेंद्र वर्मा को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। इसी तरह शांति व सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस उपाधीक्षक गुप्तकाशी विमल रावत को, यातायात व्यवस्था हेतु पुलिस उपाधीक्षक ऑपरेशन हर्षवर्धनी सुमन तथा हैलीकाॅप्टर से संबंधित व्यवस्थाओं हेतु जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
जनपद के अंतर्गत समस्त उप जिलाधिकारियों को तहसील नोडल, केदारनाथ मंदिर परिसर व पूजा व्यवस्था हेतु मुख्य कार्याधिकारी बदरी-केदार मंदिर समिति योगेंद्र सिंह को जिम्मेदारी दी गई है जबकि घोड़ा-खच्चर स्वास्थ्य जांच, उपचार बीमा व्यवस्था के लिए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. आशीष रावत को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। प्रभारी मुख्य अधिकारी प्रेम सिंह रावत को घोड़े-खच्चर मालिकों, श्रमिकों व हाॅकरों के पंजीकरण के लिए, परियोजना अधिकारी उरेड़ा राहुल पंत को घोड़े-खच्चर हेतु गरम पेयजल व्यवस्था तथा उद्यान अधिकारी योगेंद्र चौधरी को फोटोमैट्रिक पंजीकरण हेतु नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
जिलाधिकारी ने अवगत कराया कि श्री केदारनाथ धाम यात्रा हेतु कुल 43 नोडल अधिकारियों सहित 25 सहायक नोडल अधिकारियों की तैनाती के आदेश निर्गत किए गए हैं। उन्होंने सभी नोडल व सहायक नोडल अधिकारियों को उनसे संबंधित व्यवस्थाओं का पालन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि यात्रा के दौरान तैनात अधिकारियों द्वारा किसी भी तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।

टीबी मुक्त भारत अभियान को उच्च प्राथमिकता: डॉ ममता

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हरिद्वार  (कुलभूषण) प्रधानमंत्री टीण्वीण् मुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत एस एम जे एन पी जी कालेज में बुधवार को डा ममता डयूंडी नैथानी उप निदेशक उच्च शिक्षा व कालेज के प्राचार्य डा सुनील कुमार बत्रा द्वारा क्षय रोगियों हेतु नि.क्षय पोष्टिक फूडकिट की चतुर्थ किस्त को डा प्रदीप त्यागी को सौपी गयी।
इस अवसर पर उप निदेशक उच्च शिक्षा डा ममता डयूंडी ने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान को उच्च प्राथमिकता देना तथा इस अभियान को जन.आन्दोलन बनाना सभी नागरिकों का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि टीबी के बारे में जागरूकता पैदा करनी होगी तथा उन्हें बताना होगा कि इस बीमारी की रोकथाम सम्भव है। कालेज द्वारा पिछले चार महीनों से की जा रही किट वितरण की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि एस एम जे एन कालेज अपनी सामाजिकता के कारण एक सकारात्मक संदेश प्रसारित कर रहा है।
कालेज के प्राचार्य डा सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान की परिकल्पना सभी सामुदायिक हितधारकों को टीबी के इलाज में समर्थन देने और टीबी के उपचार की दिशा में देश की प्रगति में तेजी लाने के लिए की गयी है।
आन्तरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ प्रभारी डा संजय माहेश्वरी ने कहा कि प्रधानमंत्री टीण्वीण् मुक्त भारत अभियान के तहत नि.क्षय मित्र द्वारा टीण्वीण् रोगियों को 06 माह से 03 वर्ष तक पोषण सहायता नैदानिक सहायता और व्यवसायिक सहायता प्रदान की जा सकती है। कालेज में माह फरवरी हेतु 22 क्षय रोगियों हेतु नि.क्षय पोष्टिक फूडकिट का वितरण किये जाने में प्रो डा सुनील कुमार बत्रा प्रो तेजवीर सिंह तोमर डा संजय कुमार माहेश्वरी प्रोण् जेण्सीण् आर्य वन्दना सिंह मोहन चन्द्र पाण्डेय रिंकल गोयल आलोक शर्मा व डा शिवकुमार चौहान का योगदान रहा।

नगर निगम में बजट का टोटा, बजट के अभाव में करीब 34 करोड़ रुपये की लागत के कार्यों पर ब्रेक

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देहरादून, मार्च आते आते जहां बजट को खपाने की कवायद हषशुरू हो जाती है, वहीं नगर निगम के वार्डों में बजट के न होने से विकास कार्यों पर करीब तीन माह से ब्रेक लग गया है। बजट के अभाव में करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित नालियों, पुश्तों, सड़कों आदि का काम धरातल पर शुरू नहीं हो पाया। जिसे लेकर जनता और पार्षर्दों में नाराजगी बढ़ रही है।
अब जबकि राज्य में निकाय चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। राजनैतिक दलों की ओर से बैठकें आयोजित कर रणनीति बनाई जा रही है। नगर निगम के वार्डों में 34 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित विकास कार्यों का काम शुरू होना था। जिसकी कवायद दिसंबर माह से चल रही है। सूत्रों के मुताबिक बजट के अभाव में निगम टेंडर जारी नहीं कर पा रहा। निगम पर करीब 70 करोड़ की देनदारी है। शासन की ओर से विकास कार्यों के लिए आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही। ऐसे में निगम ने फिलहाल विकास कार्यों पर बजट खर्च से हाथ खींच लिए हैं। नगर आयुक्त ने लोक निर्माण अनुभाग से अब तक हुए विकास कार्यों का पूरा ब्यौरा तलब किया है। ताकि पहले ठेकेदारों को पूर्व में हुए कार्यों का भुगतान हो सके और आगे योजनाबद्ध तरीके से कार्य हो सकें, नगर निगम के वार्डों में नई स्वच्छता समितियों में शामिल 900 से ज्यादा कर्मचारियों को वेतन का भुगतान पार्षदों के माध्यम से होता है। लेकिन जनवरी माह का वेतन मंगलवार सुबह तक भी जारी नहीं हो पाया था। इस बात को लेकर पार्षदों ने निगम आकर कड़ी नाराजगी जताई,धरना प्रदर्शन की भी चेतावनी दी। जिसके बाद वित्त अनुभाग ने वेतन जारी करने की प्रक्रिया शुरू की, इधर
आईटीबीपी निरंजनपुर में मिनी झील के सौंदर्यीकरण कार्य का शिलान्यास अक्तूबर 2021 में हो चुका है। पहले चरण का काम करीब 12 करोड़ रुपये के बजट से होना है। शासन को डीपीआर भेजी गई है, लेकिन बजट के अभाव में धरातल पर काम शुरू नहीं हो पा रहा। इसके साथ ही यमुना कालोनी में एक करोड़ 71 लाख रुपये की लागत से पार्क का सौंदर्यीकरण होना है। इस साल दो जनवरी को इस योजना का शिलान्यास हुआ था। लेकिन बजट के अभाव में फिलहाल ये योजना भी कागजों पर ही दौड़ रही है, मेहूंवाला वार्ड में मछली तालाब का सौंदर्यीकरण कार्य होना है। यहां 1 करोड़ 74 लाख के बजट से काम होने हैं। निगम के अधिकारियों का कहना है कि बजट प्राप्त होने के साथ ही इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया को जारी किया जाएगा।

 

प्रदेश में हुई तमाम भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग लेकर तीन बेरोजगार युवा उपवास पर बैठे

Unemployed fast on demand for CBI inquiry - सीबीआई जांच की मांग पर  बेरोजगारों का उपवास
देहरादून, बेरोजगार युवा लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में हुई तमाम भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग लेकर बुधवार को घंटाघर स्थित इंद्रमणि बडोनी के मूर्ति के नीचे उपवास पर बैठ गए।

उपवास पर बैठे तीन बेरोजगार युवाओं का कहना है कि शहीद स्थल से उनका धरना समाप्त हो गया था, लेकिन आंदोलन लगातार जारी है। बेरोजगार अभी भी दोनों आयोगों की सभी भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं। उपवास पर बैठे सुरेश सिंह ने बताया कि उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पवार व देवभूमि बेरोजगार मंच के अध्यक्ष राम कंडवाल सहित जेल गए तमाम बेरोजगार नेताओं को धरना प्रदर्शन या उपवास की अनुमति नहीं है। ऐसे में युवा बेरोजगार अपने स्तर से उपवास या धरने प्रदर्शन कर आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं उपवास पर बैठे आशीष शाह और अभिषेक तोमर ने बताया कि वह बुधवार सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उपवास पर बैठे रहेंगे। इसके बाद गुरुवार को भी सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उपवास होगा। इस दौरान वे आंदोलन को आगे जारी रखने की रणनीति बनाएंगे।

महिला पुलिसकर्मियों को दिये जा रहे आत्मरक्षा प्रशिक्षण के कार्यक्रम का हुआ समापन

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देहरादून, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड अशोक कुमार द्वारा आज पुलिस लाइन में गौरा शक्ति के अंतर्गत महिला पुलिसकर्मियों को दिये जा रहे आत्मरक्षा प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया।

महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा हेतु उत्तराखण्ड पुलिस की थाना स्तर पर गठित टीम गौरा की 35 महिला पुलिस कर्मियों को Self Defence Master Training Programme के अन्तर्गत पुलिस लाईन देहरादून में दिनांक 20 फरवरी से दिनांक 22 फरवरी 2023 तक आत्मरक्षा तकनीक का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अन्तर्गत महिला पुलिस कर्मियों को रोजमर्रा की वस्तओं जैसे पेन, मोबाइल, रूमाल, दुपट्टा, चूड़ी आदि को हथियार बनाकर आत्मरक्षा करने एवं Smart Self Defence के अन्तर्गत स्मार्ट स्किल से आत्मरक्षा करने हेतु प्रशिक्षित किया गया।

प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों द्वारा अपने-अपने जनपदों में गौरा टीम में नियुक्त अन्य महिला कर्मियों के साथ-साथ स्कूल/कालेज/ग्राम/मौहल्लों में जाकर महिलाओं एवं बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

श्री अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड ने कहा कि मिशन गौरा शक्ति केवल एक पुलिस एप्प नहीं अपितु उत्तराखण्ड पुलिस एप्प का हिस्सा है। मिशन गौरा शक्ति के अन्तर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है, जिसमें महिलाओं को आत्मरक्षा की ट्रैनिंग देना, प्राप्त शिकायतें का समय से निस्तारण किया जाना, स्कूल/कालेजों में जाते वक्त जिन क्षेत्रों में महिलाओं/लडकियों के साथ छेडछाड होती है, उन क्षेत्रों में फोकस करना, वहां पैट्रोलिंग बढाना ये सब इस मिशन के पार्ट है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस के जूडो, कराटे, बांक्सिग, ताइक्वोंडो के खिलाड़ियों को भी इस प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। साथ ही महिला पुलिस कर्मियों हेतु आत्मरक्षा प्रशिक्षण का सेकंड लेवल एडवांस कोर्स का आयोजन किया जाएगा। आत्मरक्षा कोर्स में प्रतिभाग करने वाली महिला पुलिसकर्मी आत्मविश्वास से भरपूर है, परन्तु जब हमें दूसरे लोगों को प्रशिक्षण देना होता है, तो हमें एक लेवल उपर होना पडेगा। इसके लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण का सेकंड लेवल एडवांस कोर्स जल्द ही आयोजित किया जायेगा। इस प्रकार प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरान्त जनपदवार ट्रैनर्स का निर्धारण कर लिया जाये । जिससे कि एक जनपद में कम से कम 5-6 ट्रेनर्स प्रशिक्षण हेतु उपलब्ध हो। स्कूल एवं कालेजों में भी आत्मरक्षा हेतु ऐसे प्रशिक्षण शिवरों का आयोजन किया जाएगा।

इस अवसर पर अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था- श्री वी मुरूगेशन, पुलिस उप महानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था- सुश्री पी0 रेणुका देवी, पुलिस उपमहानिरीक्षक, गढ़वाल परिक्षेत्र- श्री करन सिंह नगन्याल, पुलिस उप महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून श्री दलीप सिंह कुँवर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

देवबंद रेलवे स्टेशन पर काम के चलते आठ दिन प्रभावित रहेंगी दून, हरिद्वार और ऋषिकेश की 17 ट्रेनें

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देहरादून, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश की 17 ट्रेनें 23 फरवरी से दो मार्च तक प्रभावित रहेंगी। देवबंद रेलवे स्टेशन पर काम के चलते रेलवे ने कुछ ट्रेनों के रूट तो कुछ का समय बदला है। कुछ ट्रेनों को रास्ते में कुछ देर रोककर चलाया जाएगा।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (कोचिंग) सुधीर सिंह ने बताया कि दिल्ली मंडल देवबंद स्टेशन पर पूर्व नॉन इंटर लॉकिंग और नॉन इंटर लॉकिंग का कार्य होना है। जिसके चलते मुरादाबाद मंडल की 19 ट्रेनें प्रभावित रहेंगी। इसमें 17 ट्रेनें देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश की हैं। ट्रेन संख्या 22917 ब्रांदा से हरिद्वार 22 फरवरी से एक मार्च तक निजामुद्दीन-तिलक ब्रिज-दिल्ली-शहादरा-नोली-शामली-टिपरी होकर आएगी। ट्रेन संख्या 14309 उज्जैन से देहरादून 22 को 70 मिनट, 23 को 100 मिनट और एक मार्च को 30 मिनट मोदीनगर-मुज्जफरनगर मार्ग में देरी से संचालित होगी। ट्रेन संख्या 14304 हरिद्वार से दिल्ली 23 से 26 फरवरी, एक और दो मार्च को टपरी-शामली होकर दिल्ली जाएगी। जबकि 27 और 28 फरवरी को यह ट्रेन रद रहेगी।

बताया कि ट्रेन संख्या 19565 ओखा से देहरादून 24 फरवरी को नई दिल्ली से तिलक ब्रिज-दिल्ली-शहादरा-नोली होकर आएगी। ट्रेन संख्या 14317 इंदौर से देहरादून 26 फरवरी को हजरत निजामुद्दीन-तिलक ब्रिज-दिल्ली शहादरा-नोली-शामली-टपरी होकर आएगी। ट्रेन संख्या 18477 पुरी-योगनगरी ऋषिकेश 25 और 26 फरवरी परिवर्तित मार्ग से आएगी। ट्रेन संख्या 22660 योगनगरी ऋषिकेश-कोच्चुवेली 27 को अंबाला कैंट-पानीपत-नई दिल्ली-हजरत निजामुद्दीन होकर जाएगी। ट्रेन संख्या 1255 नई दिल्ली-देहरादून 27 और 28 फरवरी मोदीनगर-मुज्जफ्फरनगर मार्ग में देरी से संचालित होगी। ट्रेन संख्या 19020 हरिद्वार-ब्रांदा 27 और 28 फरवरी को हरिद्वार से परिवर्तित समय शाम पांच बजकर दस मिनट पर संचालित होगी। यही ट्रेन एक मार्च को टपरी स्टेशन से 60 मिनट देरी से चलेगी। ट्रेन संख्या 12911 वलसाड-हरिद्वार 28 फरवरी को हजरत निजामुद्दीन-तिलक ब्रिज-दिल्ली शहादरा-नोली-शामली-टपरी होकर आएगी। ट्रेन संख्या 19032 योगनगरी ऋषिकेश-अहमदाबाद 27 और 28 फरवरी को ऋषिकेश से परिवर्तित समय शाम चार बजकर 25 मिनट पर चलेगी। ट्रेन संख्या 12171 लोक मान्य तिलक-हरिद्वार 27 और ट्रेन संख्या 14310 देहरादून-उज्जैन 28 को फरवरी को हजरत निजामुद्दीन-तिलक ब्रिज-दिल्ली शहादरा-नोली-शामली-टपरी होकर आएगी।