Thursday, March 5, 2026
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छायावाद के अमर कवियों पर केन्द्रित बहुआयामी साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन

‘उत्तराखंड़ राज्य रजत जयंती उत्सव शृंखला के अंतर्गत दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में हुआ भव्य कार्यक्रम’

देहरादून, उत्तराखंड़ राज्य की रजत जयंती उत्सव शृंखला के अंतर्गत दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र द्वारा छायावाद युग के महान कवियों जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ तथा सुमित्रानन्दन पन्त की कृतियों एवं वैचारिक योगदान पर केन्द्रित एक बहुआयामी साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शनिवार को देर सायं तक आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और युवा छात्रों की सहभागिता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवि निराला की रचित सरस्वती वंदना से हुआ, जिसकी प्रस्तुति एमकेपी कॉलेज, देहरादून की छात्राओं ने सुरुचि पूर्ण ढंग से दी। मुख्य अतिथि उत्तराखंड की मुख्य सूचना आयुक्त श्रीमती राधा रतूड़ी थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के मानद निदेशक श्री रवि शंकर थे,
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों व चर्चाकारों का औपचारिक स्वागत भी किया गया।
स्वागत उद्बोधन डॉ. इन्दु सिंह द्वारा दिया गया, जबकि विषय-प्रस्तुति के तौर पर बीज वक्तव्य पूर्व कुलपति डॉ. सुधा रानी पांडेय ने दिया। डॉ. पाण्डेय ते छायावाद को भारतीय काव्य परंपरा का संवेदनात्मक पुनर्जागरण बताते हुए उसके दार्शनिक और विविध मानवीय आयामों पर गहनता के साथ प्रकाश डाला।
इसके उपरांत आयोजित परिचर्चा में श्री अनिल रतूड़ी (पूर्व पुलिस महानिदेशक), डॉ. दिनेश भट्ट (पूर्व सदस्य, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग) तथा डॉ. कमला पन्त (पूर्व उप-निदेशक, शिक्षा) ने छायावादी काव्य की समकालीन प्रासंगिकता, राष्ट्रचेतना, मानवीय संवेदना और प्रकृति-बोध पर अपने विचार साझा किए। परिचर्चा का संचालन डॉ. सुशील उपाध्याय ने किया।
मुख्य अतिथि श्रीमती राधा रतूड़ी ने अपने वक्तव्य में कहा कि छायावाद केवल काव्यधारा नहीं, बल्कि भारतीय आत्मबोध और संवेदनशीलता की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी है, जो नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकती है।
कार्यक्रम के द्वितीय चरण में केन्द्र के एम्फीथिएटर में आयोजित छायावाद क्विज प्रतियोगिता में एमकेपी (पीजी) कॉलेज, डीएवी (पीजी) कॉलेज, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय तथा गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, देहरादून परिसर की टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता का संचालन श्रीमती भारती मिश्रा एवं श्री सचिन सिंह ने किया। कार्यक्रम के अन्तिम चरण में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और भेंट में पुस्तकें प्रदत्त की गईं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अंतर्गत छायावादी काव्य पर आधारित गीतों की प्रस्तुति, “जय जन भारत” समूह नृत्य तथा प्रसिद्ध नृत्यांगना श्रीमती शर्मिला गांगुली भरतरी द्वारा “हिमाद्रि तुंग-शृंग से” पर शानदार प्रस्तुति दी. दर्शकों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केन्द्र रहे, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के दौरान चारों छायावादी कवियों पर आधारित 4 पोस्टर भी लगाये गये, समापन वक्तव्य अध्यक्ष श्री रविशंकर ने तथा धन्यवाद चन्द्र शेखर तिवारी ने दिया, कार्यक्रम का प्रभाव संचालन डॉ० दिनेश शर्मा ने किया।
इस दौरान साहित्य प्रेमी, साहितकार, लेखक सहित जगदीश बाबला, जय प्रकाश खंकरियाल, डॉ. पंकज नैथानी, डी. के. काण्डपाल, अजय जोशी, मनोज पंत, जगदीश पाहवा, एन. शांता रवि शंकर, बीना कंडवाल, कुल भूषण, जे.बी. गोयल, डॉ.डी. के. पाण्डे, सुंदर सिंह बिष्ट,जगदीश सिंह, मधनसिंह, राकेश कुमार, आदि उपस्थित रहे।

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