देहरादून, उत्तराखंड़ गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) महासंघ ने पंचायती राज निदेशालय द्वारा प्रशिक्षणदाता के चयन हेतु मास्टर ट्रेनरों की परीक्षा कराए जाने पर आपत्ति प्रकट की। कहा कि उत्तराखंड मूल की संस्थाओं को बेदखल करने के लिए परीक्षा का हथकंडा अपना जा रहा है, जिसे किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निदेशालय स्वयं पेपर तैयार कर रहा है और खुद ही परीक्षा का मूल्यांकन करेगा। इसलिए निदेशालय की इस व्यवस्था पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।
महासंघ के राज्य संयोजक जगत मर्तोलिया ने निदेशालय के निदेशक सचिव पंचायतीराज तथा मुख्य सचिव को परीक्षा कराए जाने पर अपनी आपत्ति से संबंधित पत्र पूर्व में ही दे दिया था।
इस पत्र के मिलने के बाद भी निदेशालय परीक्षा कराने पर आमदार है। 16 अक्टूबर को निदेशालय में इसकी परीक्षा रखी गई है।
उन्होंने कहा कि एक डिपार्मेंट प्रश्न पत्र बनाएगा वही डिपार्मेंट मूल्यांकन करेगा वही डिपार्टमेंट चयन करेगा। पूरी व्यवस्था सिंगल हाथ होने के कारण इस पर महासंघ ने सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि जब यूकेएसएससी का पेपर लीक हो सकता है तो फिर निदेशालय का पेपर क्यों नहीं लीक हो सकता।
उन्होंने कहा कि मास्टर ट्रेनरों के प्रशिक्षण के बाद उनके मस्तिक लेवल को जांचने के लिए सामान्य परीक्षा होती थी।
इस बार निदेशालय ने परीक्षा को ही चयन का आधार बनाने का मन बना लिया है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उत्तराखंड बनने के बाद से लगातार केवल उत्तराखंड में पंजीकृत संस्थाओं को ही प्रशिक्षण कार्य दिया जाता था। इस बार भारत सरकार में इन पैनल बाहर की संस्थाओं के लिए दरवाजा खोला गया है। इसीलिए परीक्षा आयोजित कर मनमानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि महासंघ ने इस परीक्षा पद्धति पर अपनी आशंका लिखित रूप में जाहिर कर दी है।
परीक्षा पद्धति पारदर्शी व निष्पक्ष नहीं होने के कारण इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है, उन्होंने कहा कि उत्तराखंड मूल के गैर सरकारी संगठनों को इस कार्य से बेदखल करने के लिए इस प्रकार के हथकंडे अपनाए जा रहे है।
इस बात की शिकायत शीघ्र ही प्रदेश के मुख्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से की जाएगी।



Recent Comments