Monday, June 24, 2024
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चारधाम में 200 मीटर के दायरे में मोबाइल प्रतिबंध, रील बनाने वालों पर होगी सख्ती

देहरादून, चारधाम में 200 मीटर के दायरे में मोबाइल प्रतिबंध, रील बनाने वालों पर सख्ती के
नियमों के उल्लंघन पर एफआईआर दर्ज की जाएगी, यात्रा शुरू होने के बाद केदारनाथ में सामने आया था एक प्रपोज वीडियो, जिसकी जमकर आलोचना हुई थी। इस तरह की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए अब उत्तराखंड सरकार एफआईआर दर्ज कराएगी।
चारधाम यात्रा आस्था और विश्वास का प्रतीक है। तभी तो इसे सामान्य पर्यटन की जगह तीर्थाटन का नाम दिया गया है। यहां आने वाले लोग भी पर्यटक नहीं, बल्कि श्रद्धालु कहलाते हैं। बावजूद इसके चारधाम यात्रा पर आने वाले तमाम लोग बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा को पिकनिक की भांति समझ रहे हैं। इन पवित्र धामों में आकर फूहड़ नृत्य कर रहे हैं, रील बनाई जा रही है और आस्था को मनोरंजन का जरिया बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे लाखों-करोड़ों लोगों की भावना भी आहत हो रही है। लिहाजा, सरकार ने इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए चारों धाम के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। भलाई इसी में है कि आप आस्था भाव के साथ यात्रा करें। नहीं तो कहीं रील बनाने के फेर में पुलिस आपकी ‘रेल’ न बना दे।
बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी गुरुवार को मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने दी। राज्य सरकार के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग (डीआईपीआर ) ने एक्स के माध्यम से मुख्य सचिव के इन निर्देशों को साझा किया। बीते दिनों केदारनाथ धाम में कुछ युवकों के रील बनाने का मामला सामने आया था। जिस पर केदारसभा के सदस्यों के कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। पूर्व में भी इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। लिहाजा, मुख्य सचिव ने चारों धाम के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल के प्रयोग पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश स्थानीय पुलिस और प्रशासन को जारी किए हैं। जो भी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, उन पर एफआईआर दर्ज की जाए।

वहीं मुख्य सचिव ने सभी तीर्थ यात्रियों से अपील की है कि वह पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण कराए बिना चारधाम यात्रा पर न निकलें। क्योंकि, इससे भीड़ अधिक होने पर व्यवस्था बिगड़ रही है। उन्होंने सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि चेकपोस्टों पर सघनता के साथ तीर्थ यात्रियों के पंजीकरण की स्थिति देखी जाए। बिना पंजीकरण किसी भी यात्री को आगे न बढ़ने दिया जाए। मुख्य सचिव ने उत्तराखंड में चारधाम की यात्रा पर आने वाले यात्रियों से अपील की है कि वह व्यवस्था बनाने में प्रदेश सरकार का सहयोग करें।

 

विधायक विधायक निधि से रखे गेस्ट टीचर, विधानसभा अध्यक्ष को भेजा प्रस्ताव

“शिक्षकों के नहीं होने से खस्ताहाल हुए सरकारी विद्यालय”

पिथौरागढ़, उत्तराखंड़ के प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों के चलते शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है।
चीन सीमा से लगे जनप्रतिनिधियों ने सरकार तथा विधायकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
जनप्रतिनिधियों ने उत्तराखंड की विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी को पत्र भेजकर विधायक निधि से सरकारी विद्यालयों में गेस्ट टीचर रखे जाने पर खर्च करने के लिए पहल करने की मांग की।
उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के सैकड़ो पद रिक्त है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद इस राज्य की जनता को आशा थी कि यहां की स्थानीय सरकार और जनप्रतिनिधि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन लाने का कार्य करेंगे, लेकिन जनता को आज तक निराशा ही हाथ लगी है।
चीन सीमा क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य तथा उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायती राज संगठन के प्रदेश संयोजक जगत मर्तोलिया ने उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष श्रीमती रितु खंडूरी को आज ईमेल के माध्यम से एक पत्र भेजकर एक नई मांग उठा दी है।
उन्होंने कहा कि चॉकलेट मीटिंग, सामुदायिक पुस्तकालय तथा क्षेत्रीय महापुरुषों की जयंती के अवसर पर उन्हें विद्यालयों में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से बातचीत करने पर ज्ञात हुआ है कि सरकारी विद्यालयों में 70 से 80 प्रतिशत पद रिक्त चल रहे है।
उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद किसी भी सरकार ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पटरी में लाने के लिए कोई प्लानिंग नहीं बनाई।
उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों का को भारी नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विधानसभा अध्यक्ष होने के नाते श्रीमती रितु खंडूरी जी को यह प्रस्ताव भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष से यह अनुरोध किया गया है कि वह स्वयं विधानसभा के आगामी सत्र में य प्रस्ताव लाकर उत्तराखंड की जनता को एक उपहार दे, कि विधायक निधि की समस्त धनराशि से उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में रिक्त पदों के सापेक्ष गैस फैकल्टी को रखा जाएगा।

 

विधायक निधि बनी कार्यकर्ता निधि

पिथौरागढ़, जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने उत्तराखंड के 70 विधायकों से सवाल किया कि अगर 24 वर्षों में विधायक निधि से किसी भी विधायक ने कोई नवाचार किया है, तो वह अपनी सक्सेस स्टोरी को सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि विधायक निधि का प्रयोग केवल कार्यकर्ताओं की सेवा के लिए हो रहा है। इसलिए यह विधायक निधि कम कार्यकर्ता निधि ज्यादा हो गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य के विधायकों को स्वयं आगे आकर इस विधायक निधि से सरकारी विद्यालयों में गेस्ट टीचर रखने की पहल करने के लिए आगे आना चाहिए।

 

 

टीनेजर्स ने ब्यूटीफुल स्माइल से जीता सबका दिल

देहरादून, इम्बेलिश टैलेंट मैनेजमेंट की ओर से मिस टीन उत्तराखंड का आयोजन किया जा रहा है।जिसमें गुरुवार को मिस ब्यूटीफुल स्माइल प्रतियोगिता कराई गई। इस दौरान टीनेजर्स ने अपनी स्माइल का जादू बिखेरा।
इम्बेलिश टैलेंट मैनेजमेंट की ओर से मिस टीन उत्तराखंड के चौथे सीजन का आयोजन किया रहा है। जिसमें देहरादून सहित टिहरी, पौड़ी, चमोली, नैनीताल की टीनएजर्स लड़कियां प्रतिभाग कर रही हैं। इस दौरान गुरुवार को रेसकोर्स में एंबेलिश टैलेंट मैनेजमेंट ने डा. ए अग्रवाल्स के साथ मिलकर मिस ब्यूटीफुल स्माइल का आयोजन किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने कैटवॉक कर जजेस के सवालों के जवाब दिए और अपनी ब्यूटीफुल स्माइल से सबका दिल जीता।आयोजक ख्याति शर्मा ने बताया कि 13 से 19 साल की लड़कियां इसमें हिस्सा ले रही हैं। अलग-अलग सब टाइटल के बाद 19 मई को इसका ग्रैंड फिनाले होगा। यहां से विनर मॉडल को नेशनल इम्बेलिश मिस इंडिया टीन एशिया पैसिफिक के लिए जयपुर भेजा जाएगा। जहां देश भर की मॉडल्स पहुंचेंगी। वहां से चयन होने के बाद विनर को इंटरनेशनल के लिए भी भेजा जाएगा। ख्याति ने बताया ये कांटेस्ट उन टीनेजर्स लड़कियों के लिए है जो बचपन से ही अपनी आंखों में कुछ अलग करने का सपना तो रखती हैं लेकिन उनको सही प्लेटफार्म नहीं मिल पाता है। एक महिला और मॉडल होने के नाते लड़कियों के सपनों को पूरा करने का भरसक प्रयास हमारी ओर से किया जा रहा है इस मौके पर जजिस की भूमिका में डेंटिस्ट अंजुम अग्रवाल, युगांशी नेगी उपस्थित थे, साथ ही कोरियोग्राफर निहारिका सिंह और फोटोग्राफर कुमार पीयूष ने विशेष सहयोग किया।

 

बीस से अधिक कलाकारों ने किया प्रदर्शनकारी कला का अभिनव प्रदर्शन

“इंटरनेशनल बिहेवियरल आर्ट फेस्टिवल (आईबीएएफ) के समूह कलाकारों ने किया प्रदर्शन”

देहरादून, इंटरनेशनल बिहेवियरल आर्ट फेस्टिवल (आईबीएएफ) के समूह कलाकारों द्वारा दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के सभागार में दोपहर से लेकर सायं तक अपनी प्रदर्शन कला का प्रस्तुतिकरण किया। इसमें बीस से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रदर्शनकारी कला को बेहतरीन रुप से प्रस्तुत किया। कलाकारों की ओर से प्रस्तुत यह कला कई दृष्टिकोण से अपने आप में अभिनव, विचित्र और विस्मयकारी थी जिसे उपस्थित लोगों ने बहुत सराहा। निकोलस हाॅफलैण्ड ने कलाकारों के प्रदर्शन होने से पूर्व इंटरनेशनल बिहेवियरल आर्ट फेस्टिवल, हैक्सी डेक्सी बाॅक्स और समूह कलाकारों की प्रदर्शनकारी कला के बारे में परिचय दिया।
साल 2018 में हैक्सी डेक्सी बाॅक्स के दो सदस्यों के साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यवहार कला से अपनी यात्रा शुरू कर इस महत्वपूर्ण कला रूप के बारे में व्यापक जागरूकता बढ़ायी गयी थी। इस सफलता से उत्साहित होकर, इन्होनें दिल्ली में अपना पहला कार्यक्रम किया जो उनके मिशन में एक महत्वपूर्ण क्षण था। सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ, उन्होनें कला और सांस्कृतिक जागरूकता को पूरे भारत में विस्तारित किया। इंटरनेशनल बिहेवियरल आर्ट फेस्टिवल (आईबीएएफ) 2020 से विश्व स्तर पर लाइव बॉडी आर्ट और सहयोगी परियोजनाओं का प्रदर्शन कर रहा है, जो महत्वपूर्ण कार्यों को संरक्षित करने के लिए एक अभिलेखीय केंद्र के रूप में काम कर रहा है। एक समावेशी समुदाय को बढ़ावा देते हुए, आईबीएएफ नवाचार को बढ़ावा दे रहा है और उभरती प्रतिभाओं का स्वागत कर रहा है। सम्पूर्ण भारत में कार्यक्रमों के माध्यम से, यह कलाकारों और दर्शकों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संवाद को भी प्रोत्साहित करता है। आईबीएएफ का मुख्य उद्देश्य कलाकारों को पर्यावरणीय और मानवीय समस्याओं से निपटने के लिए अपनी रचनात्मकता का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना है।
इसमें अधिकार संबंधी मुद्दे. पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक न्याय के विषयों को अपनी कलाकृति में एकीकृत करके प्रदर्शनकारी कलाकारों का लक्ष्य दर्शकों के बीच जागरूकता बढ़ाना और कार्रवाई को प्रोत्साहित करना है। वहीं आईबीएएफ कलात्मक हस्तक्षेप, सामूहिक जिम्मेदारी और सक्रिय जुड़ाव को बढ़ावा देकर दर्शकों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा में शामिल करने का प्रयास करता है। सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के अतिरिक्त, आईबीएएफ सभी शैलियों और लिंगों के अनुभवी कलाकारों का स्वागत करते हुए व्यवहार कला में सादगी, रचनात्मकता और सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देता है।
क्यूरेटर की टिप्पणी
पर्यावरण-अनुकूल सुंदरता की घटना एक मिथक है पर्यावरण-अनुकूल सुंदरता की अवधारणा आशा के लिए एक मिथक की तरह लग सकती है, लेकिन वास्तव में, यह टिकाऊ जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू का प्रतीक है जो आज की दुनिया में तेजी से महत्वपूर्ण है। पर्यावरण हितैषी होने का अर्थ है ऐसे तरीके से जीना जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो, यह पहचानते हुए कि हमारे कार्यों का उस ग्रह पर गहरा प्रभाव पड़ता है जिसमें हम रहते हैं। हमारे जीवन का हर पहलू, हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले उत्पादों से लेकर हमारे द्वारा चुने गए विकल्पों तक, या तो पर्यावरणीय क्षरण में योगदान करने या स्थिरता को बढ़ावा देने की क्षमता रखता है। हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन से लेकर हमारे पहनने वाले कपड़ों तक, व्यक्तियों के लिए स्थायी परिवर्तन करने के अनगिनत अवसर हैं जो इसे कम करते हैं। हमारे दैनिक जीवन का पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव। जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने के लिए कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता के बारे में लगातार चेतावनी जारी करता है। निष्क्रियता के परिणाम गंभीर हैं, जलवायु संबंधी घटनाओं के कारण हर साल लाखों लोग पहले ही विस्थापित हो रहे हैं। यह स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और सुरक्षा के लिए कठोर उपायों की आवश्यकता है। विभिन्न प्रकार से पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में शामिल कर सकता है ।ऊर्जा की खपत कम करने से लेकर पर्यावरण-अनुकूल व्यवसायों का समर्थन करने तक के तरीके हैं। जागरूकता बढ़ाकर और सचेत विकल्प चुनकर, हम और अधिक सृजन कर सकते हैं। हम अपने और आने वाली पीढ़ियों के लिए टिकाऊ भविष्य बना सकते हैं।
सामाजिक न्याय के लिए प्रदर्शन के रूप में कलाकृति की मौखिक अभिव्यक्ति ने सौंदर्यवादी डायस्पोरा में व्यवहारिक प्रदर्शन कला के समझ का दृष्टिकोण बनाया। व्यापक कलाकार-प्रवासी लोगों को सामाजिक व्यवहार के रूप में व्यवहारिक दृष्टिकोण से जोड़ना हमारा उद्देश्य है। प्रायः यह ग्लोबल वार्मिंग को भी संबोधित करने के साथ ही पारिस्थितिक जागरूकता और मानवाधिकारों की वकालत भी करता है।
कार्यक्रम में देहरादून के अनेक कलाकार, संगीत प्रेमी, बुद्धजीवी, पत्रकार, साहित्यकार, साहित्य प्रेमी और पुस्तकालय के युवा पाठक व अन्य लोग उपस्थित रहे।

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